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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर वाईआरसी कार्यकर्ताओं को किया गया प्रशिक्षित

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at September 9, 2023 Tags: , , , ,

प्राथमिक चिकित्सा ज्ञान अमूल्य है और यह असल मदद आने से पहले जान बचाने में बहुत मददगार है: डॉ अनुपम अरोड़ा

BOL PANIPAT, 09 सितम्बर.
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर फर्स्ट ऐड प्रशिक्षण कैंप का आयोजन किया गया जिसमे कॉलेज के लगभग 100 वाईआरसी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. प्रशिक्षण कैंप में जिला रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत से फर्स्ट ऐड ट्रेनर सोनिया शर्मा और कला भारद्वाज ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को फर्स्ट ऐड के बारे में विस्तार से बताया और सिखाया. गौरव आर रामकरण सचिव जिला रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत के मार्गदर्शन में कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और कॉलेज में वाईआरसी नोडल ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग ने की. विदित रहे कि इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज ने साल 2000 में विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस की शुरूआत की थी. तब से प्रत्येक वर्ष सितंबर महीने के दूसरे शनिवार को वर्ल्‍ड फर्स्ट एड डे मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है कि वे दैनिक जीवन में संकट की स्थिति आने पर किस तरह से प्राथमिक चिकित्सा के जरिए किसी की भी जान बचा सकते हैं. आज के दिन लोगों को प्राथमिक चिकित्सा की जरूरत, प्राथमिक चिकित्सा के फायदे और घर में फर्स्ट एड बॉक्स रखने के बारे में जागरुक किया जाता है.
रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत से पधारी सोनिया शर्मा ने अपने प्रशिक्षण में बताया कि किसी भी बीमारी, चोट या दुर्घटना के लिये चिकित्सक या ऐम्बुलेंस आने से पहले जो राहत कार्य और उपचार किया जाता है उसे ही प्राथमिक सहायता कहते हैं. इस उपचार के दौरान उपयोग मे आने वाले साधनो के संग्रह को फर्स्ट ऐड किट कहते हैं. फर्स्ट ऐड के तीन महत्वपूर्ण उद्देश्य होते हैं. जीवन संरक्षण प्राथमिक उपचार का सबसे पहला उद्देश्य है क्यूंकि इसमें लक्ष्य मरीज़, बीमार या घायल व्यक्ति के जीवन की रक्षा करना होता है. दूसरा उद्देश्य स्थिति को अधिक खराब होने से बचाना है. इसके लिये बाहरी और आंतरिक स्थिति को नियंत्रण मे रखना आवश्यक है. इसलिये बाहरी तौर पर मरीज़ या घायल व्यक्ति को उसके कष्ट या पीडा के कारण की स्थिति से दूर ले जाना होता है और आंतरिक तौर पर उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था को बिगडने से बचाया जाना शामिल है. रोग-मुक्त होने मे सहायता करना फर्स्ट ऐड का तीसरा उद्देश्य है. रोगी को दवाई और मरहम-पट्टी दे कर उसे निरोगी और पूर्णतः स्वस्थ करना फर्स्ट ऐड का अंतिम उद्देश्य है. प्राथमिक उपचार शुरु करने पर सबसे पहले मरीज़ या घायल व्यक्ति की जाँच के लिये इन तीन चीज़ो को अहमियत दी जानी चाहिए जिसे संक्षेप मे फर्स्ट ऐड की एबीसी के नाम से जाना जाता है.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि किसी भी घायल या बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक पहुँचाने से पहले उसकी जान बचाने के लिए हम जो कुछ भी कर सकते हैं उसे प्राथमिक चिकित्सा कहते हैं और इसका ज्ञान हर विद्यार्थी को होना चाहिए. आपातकाल में पड़े हुए व्यक्ति की जान बचाने के लिए हम आस-पास की किसी भी प्रकार की वस्तु का उपयोग कर सकते हैं जिससे घायल या बीमार व्यक्ति को जल्द से जल्द आराम मिले. यह इतना महत्वपूर्ण नहीं की हमें इमरजेंसी के समय क्या करना चाहिए बल्कि इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह जानना है कि क्या नहीं करना चाहिए क्योंकि गलत चिकित्सा कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है और इससे बीमार या घायल व्यक्ति की जान जाने का खतरा बढ़ सकता है. प्राथमिक चिकित्सा दम घुटना (पानी में डूबने के कारण, फांसी लगने के कारण या साँस नली में किसी बाहरी चीज के अटकने के कारण), ह्रदय गति रूकना, हार्ट अटैक, खून बहना, शरीर में जहर का असर होना, जल जाना, हीट स्ट्रोक , बेहोश या कोमा, मोच, हड्डी टूटना और किसी जानवर के काटने जैसी आपातकाल अवस्था में दी जा सकती है. वाईआरसी में इन बातों को सिखाकर हम देश के भावी जिम्मेदार नागरिक तैयार कर सकते है.
वाईआरसी नोडल ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि फर्स्ट ऐड किट में क्या-क्या साधन रखे होने चाहिए यह इसके इस्तेमाल करने वाले के ज्ञान और अनुभव पर निर्भर करता है. सामान्यतः किट मे हर साईज़ के 2-3 बैंडॆड, रूई, छोटी कैंची और चिमटी, प्लास्टिक या रब्बर के दस्ताने, गाज स्क्वायर, एंटीसेप्टिक दवा जैसे डिटोल, सेफ्टी पिन, थर्मामीटर, सर्जिकल टेप, ऑय पैड, ऑय वाश, ओआरएस का घोल, ग्लूकोज, बरनोल, सिरदर्द, बुखार, पेट दर्द, उल्टी, सर्दी-खाँसी, दर्द निवारक जैसी सामान्य दवाईयाँ रखी जाती है. उन्होनें कहा कि इस सामान को एक साफ, स्वच्छ, मज़बूत और पानी निषेधक डब्बे मे रखना चाहिए. फर्स्ट ऐड किट पर लाल टेप या रंग से रेड क्रॉस का निशान बनाना चाहिए ताकि आपका किट अन्य सामान या डब्बो मे आसानी से पहचाना जा सके. किट के उपर किसी डॉक्टर या एम्बुलैंस का नाम और नम्बर अवश्य लिखना चाहिए तथा हर 6 महीने मे दवाईयो और अन्य सामानो की तारीख की जाँच अवश्य करनी चाहिए और उन्हें आवश्यकता अनुसार बदलते रहना चाहिए.
तत्पश्चात मुसीबत में पड़े व्यक्तियों की मदद करने की शपथ सभी वाईआरसी कार्यकर्ताओं को प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने दिलाई.

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