Sunday, May 31, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में नेशनल काउंसिलफॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन भारत सरकार द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 29, 2022 Tags: , , , ,

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार नई दिल्ली की उत्प्रेरणा में हो रही है कार्यशाला

कार्यशाला की संयोजक है इंडियन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन कुरुक्षेत्र

दैनिक जीवन के छोटे-छोटे प्रयोगों द्वारा विज्ञान के महत्त्व एवं उपयोगिता के प्रति जागरूकता लानाहैकार्यशाला का विषय

प्रदर्शन के माध्यम से विज्ञान की शिक्षा को और अधिक जागरूक एवं प्रभावी बनाना है कार्यशाला का उद्देश्य

     BOL PANIPAT :एसडी पीजी कॉलेज पानीपत मेंराष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार हेतू राष्ट्रीय परिषद (एनसीएसटीसी) भारतसरकार एवंविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार नई दिल्ली की उत्प्रेरणा में तथाइंडियन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन (इरादा) कुरुक्षेत्र के संयोजन से दो दिवसीय कार्यशाला के प्रथम दिवस इरादा एनजीओ के जनरल सेक्रेटरी राज पाल पांचाल, भिवानीसे पधारे रिसोर्स पर्सन रण सिंह और कार्यकर्ता प्रतीक सैनी एवं पंकज कुमार ने विज्ञान संकाय के छात्र-छात्राओं को विज्ञान के पीछे छिपे रहस्योंको उजागर करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया.माननीय मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो राकेश सिंगला ने किया. उनके साथ डॉ रवि रघुवंशी, डॉ राहुल जैन, डॉ रेखा रानी, डॉ एसके वर्मा,प्रो मयंक अरोड़ा, डॉबलजिंदर सिंह, डॉ चेतना नरूला और दीपक मित्तल भी उपस्थित रहे.इंडियन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन (इरादा) कुरुक्षेत्र का उद्देश्य कबाड़ से जुगाड़ बनाकर विज्ञान के ऐसे मॉडल विकसित करना है जो न सिर्फ बहुत ही सस्ते होते है बल्कि स्कूल-कॉलेज में पढने वाले विद्यार्थियों को विज्ञान सरलता के साथ समझाने में भी सक्षम होतेहै. आजके दिन भी रंगों के सिद्धांत, बर्नोली का सिद्धांत, सुई का पानी पर तैरना, साइफन, फोटोसिंथेसिसइत्यादि जैसे वैज्ञानिक प्रयोग छात्र-छात्राओं को सिखाये गए. मनोरंजक और सजीव संवाद में प्राध्यापकों ने भी ललक के साथ इस कार्यशाला में हिस्सा लिया.

     रण सिंहरिसोर्स पर्सन ने कहा की यह कार्यशाला लक्ष्याधारित प्रशिक्षण माडयूल है जिससे विद्यार्थियों को बुनियादी कौशल प्राप्त होगा और वेविज्ञान के पीछे के चमत्कारों की जांच खुद अपने हाथों से कर पायेंगे. उन्होनें कहा कि इस प्रकार के क्रियाशील मॉडल्स बहुत ही कम या फिर मुफ्त में ही बनाये जा सकते है. किसी कबाड़ी की दुकान पर जाकर हम कबाड़ से जुगाड़ बना सकते है जिसकी मदद से विज्ञान को समझना और आसान हो जाता है. खुद अपने हाथ से किये गए प्रयोग को हम कभी नहीं भूलते है. रटने की बजाय चीजों को करनेसे हमारे ज्ञान में व्यावहारिक वृद्धि होती है.उन्होनेंकहा कि प्रतिभावान विद्यार्थीयों को विज्ञान में कैरियर चुनने हेतूप्रोत्साहित करने के लिए हीविभिन्न प्रयोगशालाओं,विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित कार्यो के बारे में उन्हें संवेदनशील एवं जागरूक कियाजा रहा है.

     प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने 20वी सदी के मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टीन का उदाहरण देते हुआ समझाया वे स्विट्जर्लैंड के पेटेंट ऑफिस में बतौर थर्ड डिवीज़न क्लर्क कार्य करते थे जहाँ उन्हें दुनिया भर में हो रही नई-नई खोजों और अनुसंधानों की फाइलों को पढने का मौका मिलता था. उन्हें पढ़ कर धीरे-धीरे उनके मनमें भी विज्ञान के प्रति आकर्षण पैदा हो गया. फिर जो कुछ इस वैज्ञनिक ने विज्ञान में किया और पाया वह आज हम सब के सामने है. नोबेल प्राइज के साथ-साथ कितने ही सिद्धांतअल्बर्ट आइन्स्टीन हमें दे गए है. वैज्ञानिक बन कर शोध करने के लिए किसी भी तरह की औपचारिक शिक्षा का होना कोई जरुरी नहीं है. कितने ही महान वैज्ञानिक इस धारणा को गलत साबित कर चुके है. इस कार्यशाला का उद्देश्य भी यही है की हम सभी अपने अन्दर छुपे उस वैज्ञानिक को पहचान पाए और विज्ञान को अपना भी योगदानदे पाए.नेशनल काउंसिलफॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन (एनसीएसटीसी) भारत सरकार के बारे में बताते हुए कहा कि इसका कार्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित जानकारी कोजनता के साथ बांटना है.वैज्ञानिक और तकनीकी को प्रौत्साहितकरना और पूरे देश में ऐसे प्रयासों को समंवित करने का प्रबंधन करना भी इसी संस्था का कार्य है. एनसीएसटीसी के कार्यक्रमों का उददेश्य समाज में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना और तर्कसंगत निर्णय लेने की क्षमता का निर्माण करना है. यह वैज्ञानिक तरीके से वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार के द्वारा सामाजिक उत्थान की ओर समर्पित है और यह विभिन्न मीडिया की मदद से कार्यक्रम तैयार कर समाज के हर कोने में फैलाता है. इंडियन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन कुरुक्षेत्र भी इन्ही लक्ष्यों के साथ इस प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित कर रही है जो अत्यंत सराहनीय एवं दूरदर्शी प्रयास है.

राज पाल पांचालजनरल सेक्रेटरी इरादाने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्यविद्यार्थीयों में शुद्ध विज्ञान के रूप में शैक्षिक और कैरियर विकल्प को चुनने में जागरूकता एवं रूचि का निर्माण करना है. ये कार्यशाला इंटरैक्टिव है इसलिए इसका लाभ भी जल्द और ज्यादा होगा. उन्होनें प्राध्यापकों का आह्वान किया कि वे भी अपनी कक्षाओं को और अधिक रोचक बनाने के लिए रोचक एवं क्रियाशील मॉडल्स का इस्तेमाल करे.

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