अलविदा जुमा : मस्जिदों में उमड़े नमाजी
-शहर की सभी ईदगाह व मस्जिदों में अलविदा जुमे की नमाज अदा की गई
-ईद के आने की जितनी खुशी, उससे अधिक रमजान के जाने का गम
BOL PANIPAT। भीषण गर्मी की तपिश होने के बावजूद रोजेदारों में रमजान का आखिरी जुमा ‘अलविदा जुमा’ की नमाज पढऩे का जज्बा कायम रहा। लोगों ने बड़ी ही अकीदत के साथ ईद की तरह अलविदा जुमा की नमाज अदा की। इस दौरान शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की मस्जिदें नमाजियों से खचाखच भरी रहीं।
शहर की मॉडल टाउन स्थित ईदगाह, दरगाह हजरत रोशन अली शाह मस्जिद, इमाम साहब, गोसअली आदि क्षेत्रों की मस्जिदों में नमाज पढऩे के लिए लोगों को जगह की कमी झेलनी पड़ी। नमाज शुरू होने से पहले ईदगाह के पेश इमाम मौलाना साद्दिक ने अलविदा जुमा की नमाज, रमजान के दौरान पडऩे वाली शबेकद्र की रात की अहमियत, जकात और फितरे की रकम दिए जाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शबेकद्र की एक रात की इबादत हजार रात की इबादत के बराबर है।
जकात-फितरे की अहमियत बताई
उन्होंने कहा कि रमाजनुल मुबारक में निकाले गए जकात से आप की दौलत पाक हो जाती है। फितरे की रकम को ईद की नमाज के पहले निकाल देना चाहिए। इसके बाद लोगों ने खुतबा सुना और नमाज अदा कर अमनो-अमान की दुआ मांगी। मस्जिद में नमाजियों की इतनी भीड़ थी कि मस्जिद से बाहर निकलने में 15 से 20 मिनट लग जा रहे थे।
सुबह सात बजे होगी ईद की नमाज
नमाज के दौरान ही इमाम द्वारा विभिन्न मस्जिदों में ईद की नमाज पढ़े जाने के समय का एलान भी किया। मौलान साद्दिक ने बताया कि गर्मी अधिक होने के कारण ईद की नमाज सुबह सात बजे होगी।
रहमतों और बरकतों का महीना है रमजान
मौलान साद्दिक ने बताया कि वैसे तो इस्लाम में रमजानुल मुबारक का हर दिन बड़ी ही रहमतों और बरकतों का होता है। इस पाक महीने में सवाब का दर्जा सत्तर गुना अधिक हो जाता हैै। जिसके चलते अधिक से अधिक लोग इबादतों और भलाई के कामों में मशगूल हो जाते हैं। इस महीने में ही मोमिन सुबह से शाम तक भूखे प्यासे रहकर तीस दिन तक रोजे रखकर अल्लाह की इबादत करते है। रमजान के महीने में जुमा शुक्रवार का बड़ा ही महत्व होता है। खास तौर पर रमजान के आखिरी जुमा को अलविदा का जुमा कहा जाता है।
कल देखा जाएगा ईद का चांद
मौलाना साद्दिक साहब ने 1 मई शनिवार को ईद का चांद देखने की अपील की। मौलाना ने कहा कि चांद दिखाई देने के बाद ही ईद की तारीख पर मुहर लगेगी।
दुआ में फफक-फफक कर रोजे नमाजी
रमजान में चार जुमे आते हैं और आज माहे रमजान का अंतिम यानि अलविदा जुमा था। नमाज के बाद दुआ कराई गई तो तबरीबन नमाजी फफक फफक कर रोते नजर आए। क्योंकि जितनी खुशी ईद के आने की थी उससे कही अधिक दुख रमजान के जाने का है। ऐसे में नमाजियों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

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