शुभ भावना का बीज निराशा रूपी मरुभूमि में भी फल पैदा कर सकता है :बीके सुनीता बहन
BOL PANIPAT : ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा सत्यम पैलेस में आयोजित घर बनें मंदिर विषय पर चल रहे कार्यक्रम के दूसरे दिन को शुभ कामना दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता राजयोगिनी बीके सुनीता बहन ने विषय पर बोलते हुए कहा कि शुभ भावना का बीज निराशा रूपी मरुभूमि में भी फल पैदा कर सकता है। भले ही हर इंसान में कुछ न कुछ बुराई जरूर होती लेकिन परमात्मा ने हर किसी मे कम से कम एक विशेषता भी जरूर दी है। तो अगर हम उस गुण को देखकर उनसे व्यवहार करेंगे तो हमे सब अच्छे लगने लगेंगे।
बीके बहन ने कहा दुआएँ ऐसी संजीवनी बूटी है जो हर बीमारी और हर मुसीबत में हमें सुरक्षित रखती है। इसीलिए दुआएँ दो और दुआएँ लो। रोज सुबह उठकर परमात्मा का दुवाओं भरा वरदानी हाथ अपने सिर पर अनुभव करो तो आप सदा दुवाओं के खजाने से भरपूर रहेंगे। बहनजी ने पूरी सभा में कॉमेंट्री द्वारा ये प्रैक्टिकल अनुभूति कराई की कैसे परमात्मा का दुवाओं भरा हाथ अपने सिर पर महसूस करने से हमें खुशी और शांति की अनुभूति होती है।

ब्रह्माकुमारी बहन ने आगे कहा कि कमजोर व्यक्ति क्रोध को अपना हथियार बनाते हैं लेकिन वहीं शक्तिशाली लोग अपने प्रेमपूर्वक व्यवहार से हर कार्य में सफलता हासिल कर लेते हैं। तो आज से अपने स्वभाव में एक बात जोड़ लीजिए कि दिनभर जिस व्यक्ति के भी हम सम्पर्क में आएं उसे एक बार ये शब्द जरूर कहो कि आप बहुत अच्छे हो और ये शब्द केवल बाहरी मन से नही कहना बल्कि उसकी कोई न कोई एक विशेषता को मन मे रख फिर बोलना है, यही है सच्ची-सच्ची शुभ भावना।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में पूरी सभा में परमात्मा शिव के प्रतीक झण्डियां बांटी गई। बहनजी ने बताया कि सभी धर्म की आत्माओं के परमपिता परमात्मा एक ही निराकार ज्योति बिंदु रूप शिव है। उनको याद करने से हमारे अंदर शांति, शक्ति और प्रेम की भावना उत्पन्न होती है क्योंकि वह शांति का सागर और प्रेम का सागर है। कार्यक्रम के दूसरे दिन भी सैकड़ों की संख्या में शहरवासियों ने हिस्सा लिया।

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