पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने की प्रेसवार्ता।हरियाणा की राजधानी अलग बनाये जाने के मुद्दे पर रखे विचार।
पंजाब व हरियाणा के राजनेता कर रहे चंडीगढ़ मुद्दे पर फर्जी नूरा कुश्ती : दलाल
BOL PANIPAT : 29 अप्रैल 2022 को उच्चतम व उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायधीशों व मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में हरियाणा के मुख्यमंत्री ने राज्य के लिए अलग हाईकोर्ट की मांग केवल लोगों की आखों में धूल झोकने के लिए की। इस तरह की मांग हरियाणा विधानसभा में कई बार प्रस्ताव पास कर की जा चुकी है। जो महज औपचारिकता है। अगर हरियाणा अपनी अलग राजधानी बनाता है तो अलग हाईकोर्ट अपने आप बन जाऐगा। हरियाणा का अलग हाईकोर्ट बनने पर हरियाणा के वकीलों और न्यायाधिशों को हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में न्यायधीश बनने का मौका मिलेगा और हरियाणा के लोगों को न्याय सुलभ होगा।मेरी हरियाणा विधानसभा के सभी माननीय सदस्यों व प्रबुद्ध जनता से विनती है कि चंडीगढ़ पर अपना हक जताने के साथ-2 हरियाणा की जनता की सहूलियत के लिए हरियाणा के मध्य कहीं भी राज्य की अपनी राजधानी बनाने पर विचार करें। चंडीगढ़ में पिछले 55 सालों से हमारी हैसियत एक किरायेदार की है।
देश में कोई ऐसा राज्य नहीं है जिसकी अपनी राजधानी न हो। हमारे से बाद में बने छोट-2 राज्यों ने भी अपनी राजधानी बना ली है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड ने तो दो-दो राजधानी बना ली है और हाल ही में बने आंध्रप्रदेश तीन राजधानी बना रहा है। हमें भी चंडीगढ़ में किराएदार की हैसियत की राजधानी के साथ-2 अपनी राजधानी बनाने के लिए प्रयास करने चाहिए। हरियाणा की अपनी अलग राजधानी बनाने का मुद्दा में विधानसभा में कई बार उठा चूका हूं, लेकिन अब समय आ गया है कि हरियाणा की भविष्य की पीढ़ियों के वास्ते राज्य की राजधानी बनाने का फैसला लिया जाए। नई राजधानी जहा बनेगी वहां लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा और प्रदेश का विकास होगा।चंडीगढ़ की भाषा व संस्कृति का हरियाणा से कोई वास्ता नहीं है। यह एक बाबुओं का शहर है। राज्य के लोगों को अपने प्रशासनिक व न्यायिक कार्यों के लिए चंडीगढ़ आने के लिए हजारो रूपये किराए और टोल टैक्स में खर्च करने पड़ते है। चंडीगढ़ में हरियाणा के लोगों को दोयम दर्जे का व्यवहार मिलता है।
हरियाणा के लोग जब अपनी गाड़ी में चंडीगढ़ में प्रवेश करते है तो चंडीगढ़ पुलिस हरियाणा नम्बर की गाडी देखते ही टूट पड़ते है। चंडीगढ़ के किसी भी संस्थान में हरियाणा का कोई हिस्सा नहीं है। इस शर्मनाक स्थिती से छुटकारा पाने का एक ही तरीका है वह है अपनी राजधानी व अपना हाईकोर्ट यह शर्म की बात है कि हरियाणा जैसा विकसित प्रदेश अपनी राजधानी नही बना सका और केन्द्र शासित क्षेत्र से अपने प्रशासनिक कार्य कर रहा है। हरियाणा विधानसभा सचिवालय, विधायक होस्टल, विधायक व मंत्री आवास सभी चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकार क्षेत्र के अधीन है। राजधानी चंडीगढ़ में प्रवेश दूसरे प्रदेश पंजाब से होकर करना पड़ता है। चंडीगढ़ को हरियाणा की राजधानी बरकरार रखने में नौकरशाहो व नेताओं का तो स्वार्थ हो सकता है लेकिन हरियाणा की 80 प्रतिशत जनता के साथ यह घोर अन्याय है। 55 साल तक जनता ने सहन कर लिया पर अब आगे सहन नहीं होगा।
राज्य की अपनी राजधानी की जगह चिन्हित कर जमीन अधिग्रहण कर लेनी चाहिए और केन्द्र सरकार से प्रयाप्त धन की व्यवस्था करवाने की मांग करनी चाहिए वरना जमीन के बढ़ते भावों के कारण आगे राजधानी के लिए जमीन नही मिलेगी। चंडीगढ केन्द्र शासित क्षेत्र का कुल रकबा 11000 हेक्टेयर है जिसमें 60:40 के अनुपात में 40 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा का 4400 हेक्टेयर बनता है, जिसका कलेक्टर रेट के हिसाब से हरियाणा को उसकी अलग राजधानी बनाने में केन्द्र सरकार धन उपलब्ध करवाए।

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