टॉयकाथोन का लक्ष्य खिलौना इंडस्ट्री में आत्मनिर्भर बनना – साहा
-पाईट कॉलेज में 35 टीमें पहुंचीं, छह मंत्रालयों के साथ एआइसीटीई ने की पहल
BOL PANIPAT : समालखा – देश की खिलौना इंडस्ट्री किस तरह आगे बढ़े, आयात पर निर्भरता खत्म हो, नए-नए खिलौने इजाद हों, इसी लक्ष्य को लेकर मंगलवार से पानीपत इंस्टीटयूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलोजी (पाईट) में टॉयकाथोन का शुभारंभ हुआ। देश के अलग-अलग राज्यों से कॉलेज के छात्रों और कंपनियों में काम करने वाले युवाओं की 35 टीमों ने भाग लिया। कार्यक्रम में सीबीएसई के ट्रेनिंग एंड स्किल एजुकेशन विभाग के निदेशक डॉ. विश्वजीत साहा बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। साहा ने कहा कि टॉयकाथोन का लक्ष्य भारत की खिलौना इंडस्ट्री को आगे बढ़ाना है। देश को खिलौना निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके बाद निर्यात भी करना है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती वंदना से हुआ। डॉ. विश्वजीत साहा, एआइसीटीई से सलाहकार डॉ.आरके सोनी, इसरो के डिप्टी जनरल मैनेजर डॉ.बीके भद्रा, इसरो से इंजीनियर डॉ.विनोद शर्मा, एआइसीटीई से असिस्टेंट इनोवेशन डायरेक्टर डॉ.प्रदूत कोले, पाईट के चेयरमैन हरिओम तायल, सचिव सुरेश तायल, वाइस चेयरमैन राकेश तायल, मेंबर बीओजी शुभम तायल, निदेशक डॉ.शक्ति कुमार, नोडल सेंटर हेड डॉ.देवेंद्र प्रसाद, डीन डॉ.बीबी शर्मा ने दीप प्रज्वलित किए। एआइसीटीई के चेयरमैन प्रो.अनिल सहस्रबुद्धे वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए। उन्होंने रोजगार की जगह स्वरोजगार की राह दिखाई।
डॉ.विश्वजीत साहा ने कहा कि कॉलेज में ट्रैक-2 और 3 की प्रतियोगिता हो रही है। इसमें कॉलेज के छात्र और कंपनी में काम करने युवा खिलौने बना रहे हैं। अगली बार से स्कूल के छात्रों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। उन्होंने छात्रों से कहा कि आपको अपना टारगेट पता होना चाहिए। क्या आप केवल सर्टिफिकेट लेने आए हैं या फिर खिलौना इंडस्ट्री के लिए वास्तव में कुछ करना चाहते हैं। आप इस इंडस्ट्री में आगे बढ़ें, देश को आगे लेकर जाएं। अगले दो दिन आपकी जिंदगी बदलने वाले होंगे। टॉयकाथोन कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि इसमें छह मंत्रालय एकसाथ जुड़े हैं। यहां आइडिया लैब में आसपास के स्कूलों के बच्चे इनोवेशन पर काम कर सकते हैं। उन्हें इसके लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। आइडिया लैब को भारत सरकार की ओर से भी ग्रांट दी गई है।
वाइस चेयरमैन राकेश तायल ने कहा कि हमें नवाचार पर निवेश करना होगा। भारत बहुत बड़ा बाजार है। क्यों नहीं हम खुद खिलौने बनाते। क्यों नहीं इसका निर्यात कर पाते, यह सोचने की बात है। हमने दुनिया को चेस, लूडो जैसे खिलौने दिए। अब नई तकनीक के साथ अपनी जड़ों से जुड़ते हुए खिलौने बनाएं। डॉ.आरके सोनी ने कहा कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है। उन्होंने कॉलेज में देखा कि टोंटी के आगे हाथ रखते ही पानी आने लगता है। कोविड के कारण ये तकनीक सामने आई। इसी तरह छोटे-छोटे प्रयोग कर खिलौना इंडस्ट्री में आगे बढ़ सकते हैं। अगर इनोवेशन नहीं करेंगे तो नोकिया की तरह पिछड़ जाएंगे। डॉ.बीके भद्रा ने कहा कि टॉय बिजनेस लीग कराई जा रही है। जिन्होंने खिलौने बनाए, उन्हें सीधे कंपनियों से मिलवाया गया। इसके शानदार परिणाम सामने आए हैं। मंच संचालन डॉ. अंजू गांधी ने किया। इस अवसर पर पीआरओ ओपी रनौलिया, डॉ.सुनील ढुल, राजन सलूजा, राजीव ढांडा, कुलवंत, रोहित शर्मा प्रीति दहिया, अमित दुबे, तरुण मिगलानी, डॉ.वैशाली, हरविंदर कौर मौजूद रहीं।
जानिये, क्यों जरूरी है टॉयकाथोन
पाइट के निदेशक डॉ.शक्ति कुमार ने बताया कि दुनिया में चीन ही ऐसा देश है जो सबसे ज्यादा खिलौने बनाता और बेचता है। उसका मार्केट शेयर 44 प्रतिशत है। हमारे देश में 12 हजार करोड़ की खिलौना की मार्केट है लेकिन देश 80 प्रतिशत से ज्यादा का निर्यात करता है। हमारी सबसे ज्यादा और बड़ी आबादी है। बहुत बड़ा बाजार है। इसे समझने की जरूरत है।
प्रिंसिपल का सम्मान किया
कॉलेज में 40 से ज्यादा स्कूलों के प्रिंसिपल का सम्मान किया गया। सीबीएसई के ट्रेनिंग एंड स्किल एजुकेशन विभाग के निदेशक डॉ. विश्वजीत साहा ने सभी को आइडिया लैब के बारे में बताया। स्कूलों से बच्चों को यहां सीखने को भेजने के लिए कहा। कॉलेज की ओर से सभी तकनीक उपलब्ध कराई जाएंगी।

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