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जैव विविधता के साथ छेड़छाड़ और बेलगाम दोहन ने पैदा किया वन्य प्राणियों के अस्तित्व पर संकट: डॉ अनुपम अरोड़ा

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 4, 2022 Tags: , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह के माध्यम से छात्र-छात्राओं को किया जा रहा जागरूक

पोस्टरमेकिंगऔर स्लोगन लेखन प्रदर्शनी का हुआ भव्य आयोजन

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में 2 से 8 अक्टूबर तक मानाये जा रहे राष्ट्रीय वन्य जीव सप्ताह के माध्यम से छात्र-छात्राओं को जागरूक किया जा रहा है ताकि वे पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवो की सुरक्षा को लेकर संजीदा हो और इनकी रक्षा करे.आज आयोजित पोस्टर और स्लोगन मेकिंग प्रतियोगिता का उदघाटन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया. उन्हें साथ प्राणी शास्त्र विभाग से डॉ प्रियंका चांदना, डॉ राहुल जैन,भौतिकी विभाग से प्रो राकेश सिंगला,अंग्रेजी विभाग से डॉ एसके वर्मा, प्रो डेंनसन डी पॉल, प्रो रिया अग्रवाल, प्रो काजल जिंदल, दीपक मित्तलने पर्यावरण और वन्य जीवन पर आधारित पोस्टर्स एवं स्लोगन प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रतिभागियों का हौंसला बढाया. कार्यक्रम में बीएससी मेडिकल के साथ-साथ कॉलेज के लगभग 150 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. विदित रहे की वनों का संरक्षण अब हर सरकार की पहली प्राथमिकता है.बेहतर ताल-मेलसे हम कई लुप्त हो रहे पेड़-पौधों, सुक्ष्म जीवो,जंगली जानवरों और पक्षियों के संरक्षण को सुनिश्चित कर सकते है. इसी उद्देश्य से प्रत्येकवर्ष 2 से8 अक्टूबर के दौरान वन्य जीव सप्ताह काआयोजिन किया जाता है ताकि देश के आमजन भी अपनी जिम्मेदारी को समझे और वन्य प्राणियों को बचाने और संजोने के कार्य में तत्पर बने. इस बार के राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह का थीम है ‘पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के लिए प्रमुख प्रजातियों को पुन र्प्राप्त करना’.

डॉ अनुपम अरोड़ा प्राचार्य ने कहा की भारत की वनस्पतियों और जीवों की रक्षा और संरक्षण के उद्देश्य से 2से 8 अक्टूबर के दौरान प्रतिवर्ष राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है. इस वर्ष यह देश का 68वां वन्यजीव सप्ताह हैं.उन्होनें कहा की भारतीय वन्यजीव बोर्ड का गठन भारत के वन्यजीवों की रक्षा के दीर्घकालिक लक्ष्यों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 1952 में किया गया था.अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का अंधाधुंध दोहन करने में डूबे इंसान को इस बात का अंदाजा ही नहीं है कि वह अपने साथ-साथ लाखों अन्य जीवों के लिए इस धरती पर रहना कितना दूभर बनाता जा रहा है. हमने अपनी सुख-सुविधाओं और तथाकथित विकास के नाम पर धरती पर मौजूद संसाधनों का प्रबंधन और दोहन इस तरह से किया है कि दूसरे जीवधारियों के जीवन के आधार ही समाप्त हो गए हैं. विकास का सबसे बुरा शिकार वन हुए हैं. कितने ही पशु-पक्षियों की प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं और कितनी ही विलुप्ति के कगार पर खड़ी हैं.वन्य जीवों के संरक्षण के लिए हम हजारों कार्यशालाएं, सेमिनार और सम्मेलन आयोजित करते आ रहे हैं लेकिन इससे वन्य जीवों की विलुप्ति दर में कमी नहीं आ रही है. वन्य जीव सप्ताह सिर्फ नारे लगाने से नहीं सफल होगा बल्कि इसको सफल बनाने के लिए हमें वन्य जीवों को स्वयं के अस्तित्व से जोड़कर देखना होगा. अब समय आ गया है कि हम सभी इंसान अपनी जिम्मेदारियां समझें. सिर्फ विचार-विमर्श या सम्मेलन ही नहीं धरती और वन्य जीवों को बचाने के संकल्प के साथ इस दिशा में ठोस कदम हमें उठाने होंगे.

डॉ राहुल जैन ने कहा की जब से इंसान ने अपनी भौतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए जैव विविधता के साथ छेड़छाड़ और बे-लगाम दोहन शुरू किया हैतभी से वन्य प्राणियों के अस्तित्व के लिए संकट पैदा हो गया है. हम अपनी लालची प्रवृत्ति और विकास के नाम पर पृथ्वी को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. पर्यावरण,प्राकृतिक संसाधन और वन्य जीव सभी इंसान की करतूतों से परेशान है.हमारी लालच भरी करतूतों का ही यह परिणाम है कि पृथ्वी पर उपस्थित तमाम वन्य प्राणियों के विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है. कई प्रजातियों का धरती से नामोनिशान ही मिट चुका है और एक बार विलुप्त हो जाने के बाद किसी प्रजाति को वापस लाने का कोई भी तरीका नहीं है. ऐसे में इंसान को अब भी समझदारी का परिचय देना होगा.

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