-नमाजियों ने इस बार रमजान में पांच जुम्मे के लिए भी अल्लाह का शुक्र अदा किया
अल्लाह की रजा में बीता रमजान का तीसरा जुमा, मांगी दुआएं
-हाथ उठे तो किसी की भलाई को, कदम बढ़े तो नेकी के लिए : सादिक
-कहा, रोजा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं बल्कि खुद पर नियंत्रण बनाए रखने का जरिया
BOL PANIPAT। पाक ए माह रमजान का आज 15वां रोजा और तीसरा जुम्मा रहा। तीसरे जुमे पर मस्जिदों में रोजेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। नमाज के दौरान मस्जिदें खचाखच भरी रहीं और अपने रब को राजी करने के लिए लोगों ने रो रोकर दुआएं मांगी। मुकद्दस रमजान आधा बीत गया है और आधा बाकी है इसके लिए भ्ी लोगों ने अल्लाह का शुक्र अदा किया। शहर की छोटी बड़ी तमाम मस्जिदों में जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। शही की सबसे बड़ी व पुरानी ईदगाह मस्जिद के इमाम मौलाना सादिक साहब ने कहा कि रोजेदार खुशनसीब हैं, क्योंकि इस बार अल्लाह ने पांच जुम्मा रमजान में नसीब किये हैं। रोजेदारों का जिक्र करते हुए मौलाना ने फरमाया कि इनके लिए हर रोज जन्नत सजायी जाती हैं। रोजेदार की मगफिरत के लिए दरिया की मछलियां दुआ करती हैं। रोजा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है बल्कि खुद की इच्छाओं पर नियंत्रण का जरिया है। असल रोजा तो वह है जिससे अल्लाह राजी हो जाए। जब हाथ उठे तो भलाई के लिए, कान सुने तो अच्छी बातें, कदम बढ़े तो नेकी के लिए, आंख देखे तो जायज चीजों को।
अहले सुबह रोजेदारों ने सेहरी खायी। पुरुषों ने मस्जिदों में तो महिलाओं ने घरों में नमाज ए फज्र अदा की। इसके बाद कुरआन शरीफ की तिलावत की गई। कुछ आराम करने के बाद जुमे की नमाज की तैयारी शुरू हो गई। लोगों ने गुस्ल किया। साफ सुथरे कपड़े पहनकर इत्र लगाए। जुमा की अजान होने से पहले ही मस्जिदें नमाजियों से भरने लगीं। इसके बाद नमाजियों ने सुन्नतें अदा कीं। इमाम ने तकरीर पेश की। इसमें रोजे के फजाइल बयां किए। मौलाना सादिक ने कहा कि रमजान का एहतराम बेहद जरूरी है। महिलाओं ने घरों में जुमे की नमाज अदा कर दुआएं मांगी।
रोजा से मेहरबानी का जज्बा पैदा होता है
रोजा रखने में बहुत सी सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। रोजा रखने से भूख और प्यास की तकलीफ का पता चलता है। इससे भोजन और पानी की कद्र मालूम होती है और इंसान अल्लाह का शुक्र अदा करता है। रोजा से भूखों और प्यासों पर मेहरबानी का जज्बा पैदा होता है क्योंकि मालदार अपनी भूख याद करके गरीब मोहताज की भूख का पता लगाता है। रोजा से भूख के बर्दाश्त करने की आदत पड़ती है। अगर कभी खाना मयस्सर न हो तो घबराता नहीं और अल्लाह की नाशुक्री नहीं करता। चिकित्सक और वैज्ञानिक बताते है कि रोजा रखने से बहुत सी बीमारियों खुद ब खुद खत्म हो जाती हैं। रोजा ब्लड प्रेशर, कैंसर, फालिज, मोटापा, चमड़े की बीमारियों और भी बहुत सारी बीमारियों में फायदा बख्श है। ऐसा विशेषज्ञों का शोध भी है।
रोजा रखने से परहेजगारी हासिल होती है
साल के 12 माह में रमजान शरीफ सबसे खास महीना होता है। पूरे महीने लोग रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं और अन्य अच्छे काम करते हैं। इस माह में नेकी करने वालों को सवाब बहुत अधिक मिलता है। रोजेदार अपनी दिनचर्या में अधिक से अधिक अल्लाह का जिक्र करें और जकात समेत अन्य दान करें। लोगों को इस माह अपने अंदर का गुस्सा को निकाल देना चाहिए। यह माह एक तरह से ट्रेनिंग का माह होता है। रोजा रखकर दूसरे की भूख का अहसास होता है। रोजा सिर्फ इंसान ही की इबादत है। रोजा रखने वाला इंसान बहुत से बुराईयों से छुटकारा पा सकता है।
अमन-चैन और भाईचारे की दुआएं मांगी
शहर व ग्रामीण क्षेत्रों की तमाम मस्जिदों में पवित्र रमजान माह के तीसरे जुमे की नमाज अदा की गई। नमाज अदा करते समय नमाजियों ने मुल्क में अमम-चैन और भाईचारे की दुआएं मांगी। जुमे के दिन को अल्लाह के घर में रहम का दिन माना गया है। इसलिए इसको रहम का दिन माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नमाज पढऩे से अल्लाह इंसान की पूरे हफ्ते की गलतियों को माफ कर देते हैं।
इस बार 5 जुमे का होगा रमजान
इस बार रमजान के महीने में 5 जुमा यानी शुक्रवार पड़ेंगे। ऐसा संयोग पूरे 5 पांच साल बाद बना है, जब रमजान का महीना 5 जुमे का होगाण् रमजान का पहला जुमा 25 मार्च को था, आज यानी 31 मार्च को दूसरा जुमा, 7 अप्रैल को तीसरा जुमा, 14 अप्रैल को चौथा जुमा और 21 अप्रैल को रमाजन का आखिरी यानी अलविदा जुमा होगा। इस बार रमजान के महीने में 5 जुमा यानी शुक्रवार पड़ेंगे। ऐसा संयोग पूरे 5 पांच साल बाद बना है। जब रमजान का महीना 5 जुमे का होगा।

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