एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में डॉ. पद्मसिंह शर्मा ‘कमलेश’मेमोरियल काव्य संगोष्ठी का आयोजन
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के तत्वाधान में आयोजित प्रतियोगिता में करनाल जोन के 13 महाविद्यालयों के प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
युवाओं के सर्वांगीण विकास और बहुआयामी व्यक्तित्व के लिए ऐसे आयोजन मील का पत्थर है: डॉ महासिंह पूनिया, निदेशक
BOL PANIPAT , 02 मई. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में डॉ पदमसिंह शर्मा ‘कमलेश’मेमोरियल कवितापाठ प्रतियोगिता 2022-23काभव्य आयोजन हुआ जिसमेंकरनाल जोन के 13महाविद्यालयोंके प्रतिभागीयों ने हिस्सालिया और अपनी स्वरचित कविताओं को पढ़कर-गाकर सभी का दिल जीत लिया.संगोष्ठी के मुख्य अतिथि और वक्ता डॉ महासिंहपूनियानिदेशक युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्ररहे. बतौर विशिष्ट अतिथि प्रधान पवन गोयल ने कार्यक्रम में शिरकत की. जूरी का दायित्व साहित्यिक विद्वान एवं ज्योतिषाचार्य महावीर शास्त्री, संस्कृत विभाग केयूके के पूर्व प्रोफेसर डॉ सीडीएस कौशल और विश्वकर्मा यूनिवर्सिटी गुरुग्राम से प्रो चंचल भारद्वाज ने निभाया. माननीय मेहमानों का स्वागत पौधे रोपित गमले भेंट करके किया गया. मंच संचालन डॉ संगीता गुप्ता और प्रो मानवी ने किया.

संगोष्ठी का आयोजन युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के तत्वाधान में हुआ जिसकी मेजबानी का दायित्व सनातन धर्म महाविद्यालय पानीपत को प्राप्त हुआ. विदित रहे कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा वार्षिक रूप से आयोजित चिर प्रतिष्ठित युवा महोत्सव की तरह डॉ पदमसिंह शर्मा ‘कमलेश’ मेमोरियल काव्य संगोष्ठी को भी विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कैलेंडर में उच्च मान हासिल है.प्रतियोगिता में आर्य कॉलेज पानीपत, पाईट समालखा, देशबंधु राजकीय महाविद्यालय पानीपत, वैश कन्या महाविद्यालय समालखा, जीवन चानना महिला महाविद्यालय असंध, आईजी पीजी महिला महाविद्यालय कैथल, गुरु नानक खालसा कॉलेज करनाल, सीडीएलएम महिला महाविद्यालय सिवाह पानीपत, दयाल सिंह कॉलेज करनाल, केवी डीएवी कॉलेज करनाल, डीएवी पीजी कॉलेज करनाल, राजकीय महाविद्यालय करनाल के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.

प्रतियोगिता में किसान और बदहाल खेती, लड़कियों की ज़िन्दगी आसान नहीं होती, कोरोना काल, मेरा भारत मंजुल भारत, भारत का युवा, कलयुग की द्रौपदी, बनना है तो असल बनो , इंसानियत की राह, हिन्दू मुस्लिम एकता आदि जैसे विषयों परमार्मिक और अर्थपूर्ण कवितायें पढ़ी गई जिसे श्रोताओं ने बड़े ध्यान से सुना और जमकर तालियाँ बजाईं.

काव्य संगोष्ठी के परिणाम इस प्रकार रहे-
प्रथम कनिका केवी डीएवी कॉलेज करनाल 3100 रुपये
द्वितीय पंकज आर्य कॉलेज पानीपत 2100 रुपये
तृतीय तानिया देशबंधु राजकीय कॉलेज पानीपत 1100 रुपये
सांत्वना रोहित दयाल सिंह कॉलेज करनाल 500 रुपये
आकांक्षा एसडी पीजी कॉलेज पानीपत 500 रुपये
प्रतिभागियों की स्वरचित कविताओं के कुछ अंश:“लड़के भी रोते हैं जब घर से दूर होते हैं, मैं जो चलूँ साथ तो हर कर्म को ढांप लू,तूलाख कर गुनाह न तेरा कुछ बिगड़ने दूं, मेरे करम से ही फैलता है भ्रष्टाचार”, “ठण्डमें बिस्तर में सब है मौज से लेटेहुए, नेताजी को कोसना नित काम अपना नहीं, जनता के मुद्दे उठाना काम कवि है कठिन”, “सब कुछ बिखरा है, पर एक लगाव है, कभी पास है सुकून तो कभी उससे अलगाव है, बहुत सी आजमाईश है, दिल को बहलाने की, पर रूह को मालूम है, साहित्यही इन बिखरे हुए टुकड़ों का जुड़ाव है”, “मैं एक कविता हूँ, एक सृजन हूँ विचारों का, और उनमें बहती विचारधाराओं का, और उनमे बहती हूँ जो प्रकाश का आगाज़ है, मुझमेंबसतीअन्याय के ख़िलाफ़ से एक आवाज़ है”.

डॉ महासिंह पुनिया निदेशक युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रकार की काव्य संगोष्ठी को आयोजित करवाने का मूल उद्देश्य छात्र-छात्राओं में छिपी प्रतिभा को ढूंढना और उन्हें प्रोत्साहित करके उचित मंच प्रदान करना है. जिस विद्यार्थी को मंच पर खड़े होकर बोलना आ गया वह जीवन में कभी मार नहीं खाता है.कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने प्रदेश की संस्कृति को संरक्षित करने के लिए कई पहल की है. रत्नावली, सांग महोत्सव, रसिया और लूर नृत्य इसी के कुछ उदाहरण है.कुरुक्षेत्रविश्वविद्यालयहरियाणा की 32 सांस्कृतिक विधाओं को अब तक संरक्षित कर चुका है जो हम सभी के लिए गौरव की बात है.विश्वविद्यालय अब क्लब कल्चर को भी बढ़ावा दे रहा है और फोटोग्राफी, नेचर आदि क्लबों के माध्यमों से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और कौशल का विकास किया जाएगा.युवाओं के सर्वांगीण विकास और बहुआयामी व्यक्तित्व के लिए ऐसे आयोजन मील का पत्थर साबित होते है. उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की तरफ से 21 हजार रुपये की धनराशि भी कॉलेज को देने की घोषणा की.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि आज का युग कंप्यूटर का युग है परन्तु तकनीकी और प्रौद्योगिकी के इस युग ने इंसान को एकाकी बना दिया है. 24 घंटे हाथ में मोबाइल लिए इंसान आज अपने समाज से कट सा गया है. ऐसे में युवाओं को पुन: उनकी संस्कृति से जोड़ना और उनके संस्कारों को जगाने का कार्य इस प्रकार के आयोजन करते है. यही इस संगोष्ठी को आयोजित करने का मूल उद्देश्य है. डॉ महासिंह पूनिया जैसे व्यक्तित्व की बदौलत ही हरियाणवी संस्कृति और कला का संरक्षण संभव हुआ है. डॉ पूनिया हरियाणवी संस्कृति के सच्चे ध्वजवाहक है और हम सभी को उन पर गर्व है.
पवन गोयल प्रधान ने कहा कि डॉ पद्म सिंह शर्मा ‘कमलेश’ का संस्मरण लेखकों में एक विशेष स्थान है. उन्होंने अपने संस्मरणों का विषय साहित्यकारों को बनाया. पद्म सिंह शर्मा के खुद के स्वभाव के कारण ही उनके संस्मरणों में सरसता के साथ-साथ नोकझोंक के भी दर्शन होते हैं. उनके लिखे संस्मरण की भाषा बेहद सशक्त एवं भावाभिव्यंजक में अत्यंत सहयोगी है. ऐसे महान लेखक की याद में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इस वार्षिक कविता पाठ प्रतियोगिता को जोन स्तर पर आयोजित करना अपने आप में एक सराहनीय कार्य है.
इस अवसर पर प्रो अन्नू आहूजा,डॉ मुकेश पूनिया, डॉ एसके वर्मा, डॉ राकेश गर्ग,डॉ संतोष कुमारी,डॉ मोनिका खुराना,डॉ दीपिका अरोड़ा,डॉ पवन कुमार,प्रो वीरेंद्र गिल, प्रो किरण मलिक, प्रो जगमाती गाहल्याण, प्रो कविता, प्रो शिवरानी,प्रो मीतू सैनी, प्रो सनी भुक्कर, प्रो डेंनसन डी पॉल,दीपक मित्तल आदि उपस्थित रहे.

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