Thursday, April 16, 2026
Newspaper and Magzine


एसडी पीजी कॉलेज पानीपत एन.सी.सी. यूनिट ने थल सेना दिवस शौर्य और देशभक्ति के जज़्बे के साथ मनाया

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at January 15, 2024 Tags: , , , ,

कैडेट्स ने ली देश की एकता और अखंडता को संजोने की शपथ

थल सेना दिवस थल सेना की वीरता, अदम्य साहस, शौर्य और कुर्बानी की दास्ताँ को बयान करता है: लेफ्टिनेंट कर्नल विनोद कुमार प्रशासनिक अधिकारी

BOL PANIPAT , 15 जनवरी,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एन.सी.सी. यूनिट ने थल सेना दिवस शौर्य और देशभक्ति के जज़्बे के साथ मनाया । इस अवसर पर कॉलेज प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम, सेमीनार, परेड के आयोजन के साथ-साथ कैडेट्स ने प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और कॉलेज एएनओ लेफ्टिनेंट (डॉ) बलजिंदर सिंह की अगुआई में देश की एकता और अखंडता को संजोने की शपथ उठाई । लेफ्टिनेंट (डॉ) बलजिंदर सिंह ने सेमीनार के माध्यम से कैडेट्स को थल सेना दिवस के महत्व और इसे कैसे मनाया जाता है के बारे में विस्तार से समझाया । उन्होनें थल सेना में व्याप्त रोजगार के अवसरों और योग्यताओं पर भी कैडेट्स के साथ विस्तृत चर्चा की । इस वर्ष के थल सेना दिवस का थीम ‘देश की सेवा’ है और इसे दिल्ली की जगह लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में मनाया गया । विदित रहे कि थल सेना दिवस  के अवसर पर पूरे देश में जगह-जगह पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । दिल्ली में सेना मुख्यालय के साथ-साथ देश के कोने-कोने में शक्ति प्रदर्शन के अलावा भारतीय सेना की मुख्य उपलब्धियों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है ।

लेफ्टिनेंट कर्नल विनोद कुमार प्रशासनिक अधिकारी 12 हरियाणा एन.सी.सी. बटालियन सोनीपत ने अपने सन्देश में कहा कि थल सेना दिवस के अवसर पर पूरा देश थल सेना की वीरता, अदम्य साहस, शौर्य और कुर्बानी की दास्ताँ को बयान करता है । सेना दिवस भारत में हर वर्ष 15 जनवरी को लेफ्टिनेंट जनरल (फ़ील्ड मार्शल) के.एम. करियप्पा के भारतीय थल सेना के शीर्ष कमांडर का पदभार ग्रहण करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है । उन्होंने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश राज के समय के भारतीय सेना के अंतिम अंग्रेज शीर्ष कमांडर जनरल रॉय फ्रांसिस बुचर से यह पदभार ग्रहण किया था । यह दिन सैन्य परेडों, सैन्य प्रदर्शनियों व अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों के साथ नई दिल्ली और सभी सेना मुख्यालयों में मनाया जाता है । आज के दिन उन सभी बहादुर सेनानियों को सलामी भी दी जाती है जिन्होंने कभी न कभी अपने देश और लोगों की सलामती के लिये अपना सर्वोच्च न्योछावर कर दिया ।

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ तब देश भर में व्याप्त दंगे-फसादों तथा शरणार्थियों के आवागमन के कारण उथल-पुथल का माहौल था । इस कारण कई प्रशासनिक समस्याएं पैदा होने लगी और इन घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए सेना को आगे आना पड़ा । इसके पश्चात एक विशेष सेना कमांड का गठन किया गया ताकि विभाजन के दौरान शांति-व्यवस्था बहाल हो सके । परन्तु भारतीय सेना के अध्यक्ष तब भी ब्रिटिश मूल के ही हुआ करते थे । 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख बने । उस समय भारतीय सेना में लगभग 2 लाख सैनिक ही थे। उसके बाद से ही प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है।

लेफ्टिनेंट (डॉ) बलजिंदर सिंह ने कहा की के.एम. करिअप्पा पहले ऐसे अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई । उन्होंने साल 1947 में भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना का नेतृत्व किया था । सेना दिवस के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष दिल्ली छावनी के करिअप्पा परेड ग्राउंड में परेड निकाली जाती है जिसकी सलामी थल सेनाध्यक्ष लेते हैं । इस वर्ष देश ने 76 वाँ सेना दिवस मनाया है ।

इस अवसर पर कॉलेज स्टाफ सदस्य डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ राकेश गर्ग, प्रो मनोज कुमार, दीपक मितल, चिराग सिंगला मौजूद रहे ।

Comments