हरिहर केशा में कत्थक से कराए श्रीकृष्ण के दर्शन
BOL PANIPAT : समालखा – चलो थियेटर उत्सस के चौथे दिन हरिहर केशा नाटक का मंचन हुआ। खास बात ये रही इस नाटक में कत्थक के माध्यम से श्रीकृष्ण के दर्शन कराए गए। मंच पर कलाकारों के पैर 80 मिनट तक थिरकते रहे। दर्शक सांस बांधे इन्हें देखते रहे।
नूपुर नृत्य दल कुरुक्षेत्र की टीम ने इस नाटक का मंचन किया। रास कला मंच के निदेशक रवि मोहन ने कहा कि कथा कहे सो कत्थक कहलावे। कत्थक के माध्यम से कथा कहने की कला को इस दल ने पूरी तरह से साकार किया। श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर यमुना में कालिया के मान मर्दन तक पहले तो श्रीकृष्ण के बाल रूप को दिखाया गया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का मान मर्दन किया और गोवर्धन पूजा का शुभारंभ कराया। महाभारत से पूर्व हस्तिनापुर में की सभा में उन्होंने श्रीकृष्ण का चीर हरण होने से बचाया। महाभारत के युद्ध में उन्होंने अर्जुन को विराट स्वरूप का दर्शन किया। इससे पहले गोकुल में राधा रानी के साथ रासलीला का मंचन हुआ। यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्। इस श्लोक के साथ हरिहर केशा का विराम होता है। इस नाटक का निर्देशन नृत्य में पीएचडी कर रहीं दीप्ति शर्मा ने किया है। संस्कृति मंत्रालय, हरियाणा कला परिषद एवं गीता सरोवर पोर्टिको का भी सहयोग है। इस अवसर पर बाल विकास प्रोग्रेसिव स्कूल की प्रिंसिपल अनुपमा शाह, उनके पति कैप्टन निखिल शाह, एलसीआरटी से रवींद्र गुप्ता, पाइट एनएफएल की प्रिंसिपल रेखा बजाज, पाइट के चेयरमैन हरिओम तायल व वाइस चेयरमैन राकेश तायल भी मौजूद रहे।

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