एक्सपर्ट टॉक सत्र में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
BOL PANIPAT : आई बी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्लेसमेंट एवं करियर गाइडेंस प्रकोष्ठ तथा मेधा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में एक प्रभावशाली एक्सपर्ट टॉक का आयोजन किया गया। सत्र में विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्पोकन इंग्लिश में फ्लुएंसी (Fluency), एक्युरेसी (Accuracy) और कॉन्फिडेंस (Confidence) के अंतर को समझाना तथा उन्हें व्यावहारिक तकनीकों के माध्यम से प्रभावी संप्रेषण कौशल विकसित करने हेतु प्रेरित करना था। सत्र के दौरान विद्यार्थियों को सिखाया गया कि बोलने से पहले विचारों को सरल संरचना में व्यवस्थित करना कितना आवश्यक है। उच्चारण की स्पष्टता के लिए बुनियादी फोनेटिक जागरूकता (Basic Phonetic Awareness) पर अभ्यास कराया गया। साथ ही, दैनिक एवं प्रोफेशनल बातचीत के लिए उपयोगी फंक्शनल वोकेबुलरी पर विशेष बल दिया गया, जिससे विद्यार्थी स्वाभाविक और प्रवाहपूर्ण ढंग से अभिव्यक्ति कर सकें। शैडोइंग तकनीक के माध्यम से उच्चारण, टोन और रिदम सुधारने की विधि भी बताई गई। सत्र में मिरर प्रैक्टिस और रिकॉर्ड एवं रिव्यु तकनीक के माध्यम से आत्ममूल्यांकन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि प्रभावशाली संप्रेषण केवल शब्दों से नहीं, बल्कि बॉडी लैंग्वेज, आई कॉन्टैक्ट और वॉयस मॉड्यूलेशन से भी निर्मित होता है। सत्र में “थिंक इन इंग्लिश ” अभ्यास पर विशेष बल दिया गया, जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को अपनी दैनिक गतिविधियों को मन ही मन अंग्रेज़ी में वर्णित करने की आदत विकसित करने की सलाह दी गई। इससे अनुवाद की प्रवृत्ति कम होती है और बोलने में स्वाभाविकता आती है। विशेष रूप से यह रेखांकित किया गया कि अंग्रेजी एक विषय नहीं, बल्कि एक कौशल है, जिसे नियमित अभ्यास, सही तकनीक और आत्मविश्वास के साथ विकसित किया जा सकता है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह ने इस प्रकार के सत्रों की सराहना करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों के लिए प्रभावी संप्रेषण कौशल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे एक्सपर्ट टॉक्स विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ अपने विचार व्यक्त करने और पेशेवर दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने में सहायक सिद्ध होते हैं। प्लेसमेंट एवं करियर गाइडेंस सेल की टीपीओ डॉ. अर्पणा गर्ग ने कहा कि कॉलेज निरंतर ऐसे सत्रों का आयोजन करता है, जिससे विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी प्राप्त हो सके। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास के माध्यम से अपनी संप्रेषण क्षमता विकसित करने और करियर के बेहतर अवसरों के लिए स्वयं को तैयार करने के लिए प्रेरित किया। छात्रों ने इस सत्र को अत्यंत व्यावहारिक, सहभागितापूर्ण और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि अब वे बोलने से पहले सोचने, संरचना बनाने और स्पष्टता के साथ अभिव्यक्ति करने की दिशा में अधिक सजग रहेंगे। अंत में विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि निरंतर अभ्यास, सही मार्गदर्शन और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ हिचकिचाहट को आत्मविश्वास में बदला जा सकता है।

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