जब रूपान्तर होता है तो फिर पहले वाली स्थिति नहीं रहती: स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज
BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2081 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में सप्ताह भर चलने वाले संत समागम कार्यक्रम के चौथे दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि जिस प्रकार दूध से दही बनती है लेकिन फिर दही से दूध नहीं बनाया जा सकता, उसके बाद जिस प्रकार दही से छाछ बनती है लेकिन फिर उससे दही नहीं बनाई जा सकती, उसके बाद निकले हुए छाछ में से मक्खन बन सकता है लेकिन फिर मक्खन से छाछ नहीं बन सकती। तथा जब मक्खन को जब अग्नि में पकाते हैं तो घी बन जाता है लेकिन घी से पुनः मक्खन नहीं बनाया जा सकता इसी को रूपान्तर कहते हैं जब रूपान्तर होता है तो फिर पहले वाली स्थिति नहीं रहती। मनुष्य के जीवन में जब रूपान्तर होता है व्यक्ति संत बन जाता है उस रूपान्तरण के बाद व्यक्ति पहले वाली स्थिति में नहीं जा सकता, उसके बाद परिवर्तन नहीं होता। इससे पूर्व मुख्य अतिथि विशाल तायल एवं युधिष्ठिर पुनियानी परिवार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया इस अवसर पर रमेश चुघ प्रधान, हरनाम चुघ, उत्तम आहूजा, ईश्वर लाल रामदेव, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, कर्म सिंह रामदेव, ओम प्रकाश चौधरी, अमरजीत सपड़ा, महेन्द्र चुघ, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, ओमी चुघ, अमन रामदेव, हरनारायण जुनेजा, गुलशन नन्दवानी, श्याम लाल सपड़ा, सोनू खुराना, गोपी मेंहदीरत्ता गुलशन रामदेव, आत्म खुराना, जगदीश जुनेजा, राघव चुघ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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