Friday, July 3, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के तीन खिलाडियों ने राज्य स्तरीय ताइक्वांडो और पेनचाक सिलाट चैंपियनशिप में झटके पांच गोल्ड और एक सिल्वर मैडल.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL SPORTS , at July 24, 2024 Tags: , , , ,

अम्बाला में ताइक्वांडो और पलवल में हुआ पेनचाक सिलाट चैंपियनशिप 2024 का आयोजन

अपने भारवर्ग में कैफ और अभिषेक जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में हरियाणा राज्य का करेंगे प्रतिनिधित्व   

BOL PANIPAT , 24 जुलाई,एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के बीए तृतीय वर्ष के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी महोम्मद कैफ अंसारी अम्बाला में आयोजित राज्य स्तरीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप के 45 किलोग्राम भारवर्ग में दो गोल्ड मैडल झटक कर कॉलेज और जिले का मान बढाया । इसी प्रतियोगिता के 48 किलोग्राम भारवर्ग में बीए प्रथम के खिलाड़ी अभिषेक ने भी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दो गोल्ड मैडल झटक कर कॉलेज के खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज किया । दोनों ही खिलाड़ी ताइक्वांडो  के अपने-अपने भारवर्ग में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में हरियाणा राज्य का प्रतिनिधित्व करेगे और प्रदेश से यह गौरव इन दोनों ही खिलाड़ियों को हासिल हुआ है ।  

     इसी प्रकार बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा किरण ने राज्य स्तरीय पेनचाक सिलाट चैंपियनशिप में एक गोल्ड और एक सिल्वर मैडल हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया । किरण ने यह उपलब्धि पेनचाक सिलाट की महिला गंडा विधा में हासिल की जिसका आयोजन पानीपत और पलवल में हुआ । किरण इससे पहले खेलो इंडिया राष्ट्रीय टूर्नामेंट में पदक हासिल कर चुकी है और उसने आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में भी कॉलेज का प्रतिनिधित्व किया है । कॉलेज के लिए एक और उपलब्धि मोहित कुमार ने हासिल की जब उन्होनें रेफरी की योग्यता परीक्षा को सफलता पूर्वक पास करके राज्य स्तरीय पेनचाक सिलाट टूर्नामेंट में रेफरी की भूमिका अदा की ।

कैफ, अभिषेक और किरण का कॉलेज पहुँचने पर स्वागत एसडी पीजी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, जनरल सेक्रेटरी महेंद्र अग्रवाल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो रेखा, कोच अंकुश, ग्राउंड्स मैन प्रताप और अन्य प्राध्यापकों ने किया । तीनों खिलाड़ी इससे पहले भी राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तरीय और इंटर यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट्स में शानदार प्रदर्शन के दम पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते आ रहे है ।

प्रधान दिनेश गोयल ने कहा कि खेलों में भाग लेने के हमें अनेकों फायदे मिलते है । इससे हमारा रूप और व्यक्तित्व बनता और निखरता है । खेल के मैदान और मुकाबले में हर खिलाड़ी यदि लगन के साथ भाग ले तो जीत अवश्य मिलती है । माता-पिता आज भी चाहतें हैं कि उनका बेटा या बेटी डाक्टर-इंजिनियर बने परन्तु कैफ, अभिषेक और किरण ने खेल के महत्व को पुनः समाज में स्थापित किया है । कॉलेज ऐसे खिलाडियों का निरंतर मार्गदर्शन करता रहेगा । तनाव और अवसाद से भरी आज की आधुनिक जीवन शैली में खेल ही हमें स्वस्थ और तनावमुक्त रख सकतें है ।

महेंद्र अग्रवाल जनरल सेक्रेटरी ने कहा कि युवा जीवन में खेलों में भाग लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जीवन में तनाव कम होता है और हमारा मानसिक संतुलन अच्छा होता है । खेल स्वस्थ हड्डियों और मांसपेशियों का निर्माण करते हैं, फिटनेस बढ़ाते हैं, नींद में सुधार करते हैं और इंसान को सामाजिक रूप से जुड़ने में मदद करते हैं । ये तीनों खिलाड़ी और उप्लाब्दियाँ हासिल करे ऐसी उनकी मंगल कामना है ।

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कैफ, अभिषेक और किरण की भरपूर प्रशंसा की और कहा कि इन खिलाड़ीयों की उपलब्धि अत्यंत गौरवपूर्ण है । इनकी जीत से न सिर्फ ये तीनों खिलाड़ी जीवन में सफलता की सीढियां चढ़ेंगे बल्कि इनसे दूसरे विद्यार्थियों को भी भरपूर प्रेरणा मिलेगी । राज्य स्तर पर भाग लेना मात्र ही हर खिलाड़ी का स्वप्न होता है परन्तु इन तीनों खिलाड़ियों ने तो मैडल प्राप्त करके एक नई बुलंदी को छुआ है । ये तीनों खिलाड़ी जल्द अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करे यही उनकी कामना है । ताइक्वांडो  और पेनचाक सिलाट में शामिल खेल लचीलेपन, सजगता, ताकत, धीरज और चपलता की मांग करते है ।  

डॉ सुशीला बेनीवाल ने कहा कि पेनचाक सिलाट शब्दावली का इस्तेमाल 1950 के दशक में इंडोनेशियाई आजादी के बाद आम प्रचलन में आया । यह कई तरह के मार्शल आर्ट्स के लिए सामान्य रूप से प्रयोग होने वाला शब्द है । यह पूर्ण रूप से शारीरिक युद्ध है जिसमें हमला, उठापटक, फेंकने के अलावा हथियारों का प्रयोग भी शामिल रहता है । पेनचाक सिलाट में शरीर के हर हिस्से का उपयोग किया जाता है और यह हमले के अधीन होता है । इसका अभ्यास न केवल शारीरिक रक्षा के लिए बल्कि मनोवैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भी किया जाता है । इसी प्रकार ताइक्वांडो को आसान शब्दों में समझा जाए तो यह किक और पंच मारने की कला है । यह एक मार्शल आर्ट है जिसकी जड़ें कोरिया के तीन साम्राज्यों के काल (लगभग 57 ईसा पूर्व से 668 ईस्वी) में फैली हुई हैं ।   

इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, दीपक मित्तल आदि मौजूद रहे ।

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