सांझी हमारी संस्कृति और विरासत की पहचान है- शकुंतला।
BOL PANIPAT :1 जून। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा द्वारा अपने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक लोक कला सांझी को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष संरक्षण अभियान के तहत तीन दिवसीय कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है। करनाल मण्डल स्तर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली में तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ पूर्व सरपंच शकुंतला मिटान ने रिबन काटकर किया।
पूर्व सरपंच शकुंतला ने बताया कि हरियाणा की लोक कला को न केवल बचाने का प्रयास करना चाहिए अपितु युवा वर्ग को प्राचीन संस्कृति से जोडऩे के लिए भी प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि आधुनिकता की दौड़ में प्रदेश की लोक कला विलुप्त होती जा रही है इसे बचाने के लिए विभाग के प्रयासों से हरियाणा के समस्त मण्डलों में तीन-तीन दिन की सांझी कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है जिसमें स्थानीय महिलाएं अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए सांझाी तैयार करेंगी और अपने प्रदेश की लोक कला व संस्कृति को प्रदर्शित करेंगी।
मास्टर ट्रेनर कमलेश देवी ने बताया कि सांझी केवल एक कला नहीं, बल्कि हरियाणा प्रदेश की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। इस कला के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रह सकेगी।
सहायक रीटा ने बताया कि बढ़ते शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण युवा पीढ़ी इस पारंपरिक लोक कला से दूर होती जा रही है। जिसके कारण कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा महिलाओं और बालिकाओं को इस कला के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यशाला आयोजित कर रहा है।
कार्यशाला के संयोजक प्रदीप मलिक ने बताया कि इस नि:शुल्क कार्यशाला में सांझी सीखने की इच्छुक महिलाएं सांझी बनाने की कला के गुर सीख रही हैं और अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति को प्रस्तुत कर रही हैं। कार्यशाला के पहले दिन मिट्टी से सांझी बनाने के लिए सितारे, मुख, हाथ, पैर, आभूषण और सजावट आकृतियां बनाई गई। इस अवसर पर सेवानिवृत प्राचार्य ओम सिंह राणा, विभाग की तरफ से सतीश शर्मा, डीपीई उमेद सिंह, सीमा, रेखा, दिक्षु, आशु, दीप्ति, रूनी, शीला, नेहा, आरती, काजल शर्मा, राखी, लक्ष्मी आदि मौजूद रहे।

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