6 माह में 75 नशा तस्करों को माननीय न्यायालय से सजा. 54 तस्कर गिरफ्तार. लाखों रुपये के मादक पदार्थ जब्त. नशा मुक्त समाज की मुहिम को मिली नई मजबूती.
BOL PANIPAT : 06 जुलाई : हरियाणा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अजय सिंघल आईपीएस के मार्गदर्शन एवं पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह आईपीएस के कुशल नेतृत्व में पानीपत पुलिस प्रदेश सरकार की नशे के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्य कर रही है। पानीपत पुलिस ने वर्ष 2026 के पहले छह माह में नशा तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के साथ-साथ माननीय न्यायालय में जिला न्यायवादी के सहयोग से मजबूत पैरवी की। सशक्त पैरवी के परिणामस्वरूप इस अवधि के दौरान नशा तस्करी के 42 मामलों में 75 आरोपियों को कारावास व जुर्माना राशि की सजा हुई है। माननीय न्यायालय द्वारा आरोपियों को 20 दिन से लेकर 20 वर्ष तक के कारावास तथा 15 हजार रुपये से 2 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह उपलब्धि नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस की प्रभावी कार्रवाई और मजबूत अनुसंधान का परिणाम है।
6 माह में 54 नशा तस्कर गिरफ्तार, भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद:
जनवरी से जून 2026 तक जिला पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 41 मामले दर्ज कर 54 नशा तस्करों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया। आरोपियों के कब्जे से 489 किलो 465 ग्राम गांजा, 3 किलो 619 ग्राम चरस, 402 ग्राम हेरोइन, 2 किलो 483 ग्राम अफीम तथा 88 ग्राम स्मैक बरामद की गई। पानीपत पुलिस का उद्देश्य केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना भी है।
नशे के खिलाफ सामाजिक भागीदारी जरूरी:
पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह आईपीएस ने कहा कि नशा केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चुनौती है। इसको जड़ से उखाड़ फैंकने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आकर पुलिस का सहयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि जिला पुलिस नशा तस्करों पर लगातार शिकंजा कस रही है और नशा तस्करी की पूरी चेन को तोड़ने के लिए सुनियोजित कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशा बेचता है या नशे का सेवन करता है तो उसकी सूचना तुरंत जिला पुलिस को दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। जिला पुलिस का यह अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रहेगा।
नशा मुक्त समाज की दिशा में बहुआयामी प्रयास:
पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह आईपीएस के कुशन नेतृत्व और प्रेरणा से जिला पुलिस केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के खिलाफ जनजागरूकता और पुनर्वास पर भी विशेष जोर दे रही है। विभिन्न गांवों की ग्राम पंचायत व मौजिज लोगों के सहयोग से अब तक जिले के 176 गांव और 35 वार्डों को नशा मुक्त घोषित किया जा चुका है।
नशे की लत से प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सिविल सर्जन के सहयोग से डी-एडिक्शन कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। इसके तहत सिविल अस्पताल के डी-एडिक्शन सेंटर में अब तक 1141 लोगों की काउंसिलिंग कर उन्हें उपचार एवं दवाईयां उपलब्ध करवाई गई हैं।
इसके साथ ही गिरफ्तार नशा तस्करों द्वारा नशे की काली कमाई से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अटैच करने की प्रक्रिया भी तेजी से अमल में लाई जा रही है, ताकि अपराध से अर्जित आर्थिक संसाधनों पर भी प्रभावी प्रहार किया जा सके।

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