Wednesday, July 29, 2026
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संत रविदास का संदेश समाज को जोडऩे और समानता स्थापित करने का सबसे बड़ा आधार: मंत्री कृष्ण लाल पंवार

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at July 29, 2026 Tags: , , , , ,

27 संगठनात्मक जिलों से होकर गुजरने वाली पवित्र कलश यात्रा देगी प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश

30 जुलाई को गुरुग्राम के सरहौल बॉर्डर पर होगा कलश यात्रा का भव्य स्वागत

कुरुक्षेत्र के उमरी में 5 एकड़ भूमि पर 124 करोड़ रुपए की लागत से होगा गुरु रविदास धाम का निर्माण

1.50 लाख युवाओं को दिया बिना पर्ची  बिना खर्ची रोजगार

BOL PANIPAT , 29 जुलाई। हरियाणा के विकास,पंचायत एवं खनन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बुधवार को स्थानीय लोक निर्माण विश्राम गृह के कांफ्रेंस हॉल में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी भारतीय संत परंपरा के महान संत, समाज सुधारक, कवि तथा निर्गुण भक्ति आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्होंने ऐसे समय में समाज को प्रेम, समानता, भाईचारे, सेवा और मानवता का संदेश दिया, जब जाति-पांति, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव अपने चरम पर था। संत रविदास ने अपने जीवन और वाणी के माध्यम से समाज को नई दिशा दी और उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे। उन्होंने बताया कि संत शिरोमणि गुरु रविदास की पवित्र कलश यात्रा वाराणसी से प्रारंभ हुई है और देश के संगठन के तौर पर 27 जिलों से होकर गुजर रही है। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि संत रविदास जी के विचारों, सामाजिक समरसता, समानता, भाईचारे और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक राष्ट्रीय अभियान है। कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि यात्रा जहां-जहां पहुंच रही है, वहां समाज के सभी वर्गों द्वारा इसका भव्य स्वागत किया जा रहा है।

मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि संत रविदास का जन्म लगभग 15वीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी के निकट सीर गोवर्धनपुर में हुआ माना जाता है। उनके पिता का नाम संतोक दास (रघु) तथा माता का नाम करमा देवी था। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि मनुष्य की महानता उसके विचारों, कर्मों और सेवा भावना से तय होती है। मंत्री ने कहा कि संत रविदास जी की वाणी में प्रेम, करुणा, समानता और मानव कल्याण की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल सच्चे कर्म, विनम्रता और निष्काम भक्ति है। उन्होंने लोगों को बाहरी आडंबर छोडक़र सत्य, सेवा और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।

  उन्होंने कहा कि संत रविदास ने जातिवाद, छुआछूत, ऊंच-नीच और सामाजिक भेदभाव का खुलकर विरोध किया। उनका स्पष्ट संदेश था कि सभी मनुष्य ईश्वर की संतान हैं और किसी भी व्यक्ति का सम्मान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म, चरित्र और व्यवहार से होना चाहिए। उन्होंने समाज में समरसता, समान अवसर और मानव सम्मान की स्थापना के लिए आजीवन कार्य किया। उनके विचारों ने लाखों लोगों को सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि 20 फरवरी को संत की जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे।जो आगे तक जारी रहेंगे। कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि मीराबाई संत रविदास की महान शिष्या मानी जाती हैं। कहा जाता है कि उन्होंने संत रविदास को अपना गुरु स्वीकार किया था। मीराबाई की भक्ति और आध्यात्मिक जीवन पर संत रविदास की शिक्षाओं का गहरा प्रभाव था। इससे स्पष्ट होता है कि संत रविदास  के विचार किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं थे, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।

मंत्री ने कहा कि संत रविदास ने बेगमपुरा नामक एक आदर्श समाज की परिकल्पना की थी। बेगमपुरा का अर्थ है ऐसा नगर, जहां कोई दुख, भय, अन्याय, भेदभाव, कर या शोषण न हो। वहां सभी लोग समान अधिकारों के साथ सम्मानपूर्वक और सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करें। उन्होंने कहा कि आज भी सामाजिक न्याय और समानता की चर्चा होती है तो संत रविदास जी की बेगमपुरा की परिकल्पना सबसे बड़ी प्रेरणा के रूप में सामने आती है। पत्रकार वार्ता के दौरान मंत्री ने संत रविदास के प्रसिद्ध वचनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मन चंगा तो कठौती में गंगा आज भी लोगों को यह संदेश देता है कि यदि मन पवित्र है तो ईश्वर की प्राप्ति कहीं भी संभव है। इसी प्रकार उनका प्रसिद्ध वचन ऐसा चाहूँ राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न। छोट-बड़ो सब सम बसें, रविदास रहे प्रसन्न। आज भी समानता, न्याय और सामाजिक समरसता पर आधारित समाज की प्रेरणा देता है।

  उन्होंने कहा कि संत रविदास का संपूर्ण जीवन इस बात का उदाहरण है कि महानता जन्म से नहीं, बल्कि विचारों, कर्मों, सेवा और समाज के प्रति समर्पण से प्राप्त होती है। उनके जीवन से प्रत्येक व्यक्ति को मानवता, सेवा, सद्भाव और समानता की प्रेरणा मिलती है। कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि 30 जुलाई को यह पवित्र कलश यात्रा गुरुग्राम के सरहौल बॉर्डर पर पहुंचेगी, जहां प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, संत समाज तथा विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा इसका भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके उपरांत कलश को गुरुग्राम स्थित श्री शीतला माता मंदिर में स्थापित किया जाएगा, जहां श्रद्धालु दर्शन एवं पूजन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह यात्रा श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी आस्था को सम्मान देने के साथ-साथ समाज में आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को भी मजबूत करेगी।

  मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार संतों एवं महापुरुषों की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी कड़ी में कुरुक्षेत्र के उमरी में लगभग 5 एकड़ भूमि पर 124 करोड़ रुपए की लागत से गुरु रविदास धाम का निर्माण कराया जा रहा है। यह धाम आने वाली पीढिय़ों के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक प्रेरणा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां संत रविदास जी के जीवन, उनके दर्शन और सामाजिक संदेश को व्यापक रूप से संरक्षित एवं प्रसारित किया जाएगा। कृष्ण लाल पंवार ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के प्रेम, समानता, भाईचारे, सेवा, सामाजिक न्याय और मानवता के संदेश को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि यदि समाज संत रविदास के आदर्शों पर चले तो जातिवाद, भेदभाव और सामाजिक विभाजन जैसी बुराइयों का स्वत: अंत होगा तथा एक समरस, न्यायपूर्ण और मानवता पर आधारित समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।

मंत्री ने कहा कि कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह के प्रयास से प्रदेश में एक लाख 50 हजार युवाओं को मैरिट के आधार पर नौकरियां दी गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना साकार होगा और देश विकसित राष्ट्र बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आधुनिक लाइब्रेरी बनाने का कार्य तीव्र गति से जारी है।

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