नाबालिक द्वारा एक व्यक्ति को टक्कर मारने को लेकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट ने सुनाया फैसला।
3 महीने तक युवक को ट्रैफिक पुलिस के साथ देनी होगी ड्यूटी सीखने होंगे ट्रैफिक रूल्स।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा की अपील, अभिभावक अपने नाबालिक बच्चों को ना दें वाहन।
BOL PANIPAT : 10 अगस्त। विगत 2024 में मॉडल टाउन थाना क्षेत्र में हुए एक सड़क दुर्घटना के केस में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड पानीपत ने नाबालिक युवक द्वारा एक व्यक्ति को टक्कर मारकर उसे घायल करने को लेकर उस युवक को सीख देने वाली सजा दी है। यह फैसला उसे स्वयं भी ट्रैफिक नियमों को लेकर जागरूक ही नहीं करेगा बल्कि यह दूसरों के लिए भी नज़ीर पेश करेगा।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2024 में स्थानीय दत्ता कॉलोनी के एक व्यक्ति जतिन को असंध रोड पर एक नाबालिक ने उस समय टक्कर मारकर घायल कर दिया जब वह व्यक्ति अपनी नौकरी से रात 8 बजे अपने घर की ओर लौट रहा था। इस दुर्घटना में उसे काफी चोट लगी थी। उसी को लेकर यह केस मॉडल टाउन थाना के माध्यम से जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष गया था। उन्होंने बताया कि उस समय बच्चे की आयु 17 वर्ष थी और चूंकि वह नाबालिक था इसीलिए उसे सजा के तौर पर 3 महीने का समय ट्रैफिक पुलिस के साथ बिताने के लिए कहा गया है। ताकि वह खुद ट्रैफिक नियमों को सीखे और दूसरों को भी सिखाए।
उन्होंने बताया कि सडक़ दुर्घटनाएँ केवल एक क्षण की लापरवाही का परिणाम नहीं होतीं, बल्कि कई बार इनके पीछे यातायात नियमों की अनदेखी, तेज रफ्तार, बिना लाइसेंस वाहन चलाना और उम्र से पहले वाहन चलाने जैसी गंभीर वजहें होती हैं। जब ऐसी गलती किसी नाबालिग से होती है और उसके कारण किसी व्यक्ति के साथ दुर्घटना हो जाती है, तो मामला और भी संवेदनशील हो जाता है। इसमें कानून के साथ-साथ बच्चे के भविष्य और समाज की सुरक्षा का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है।
जस्टिस पुनीत लिंबा ने बताया कि मामले में जुवेनाइल कोर्ट द्वारा नाबालिग को यातायात नियमों का पालन करने की सीख और दायित्व से जोड़ते हुए आदेश दिया गया। इस तरह के मामलों में न्याय का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि नाबालिग को उसकी गलती का एहसास कराकर उसे जिम्मेदार नागरिक बनाना भी होता है। नाबालिग अवस्था सीखने और संस्कार ग्रहण करने की उम्र होती है। यदि इस उम्र में कोई बच्चा यातायात नियमों की अनदेखी करता है, तो उसके पीछे केवल उसकी अपनी गलती ही नहीं, बल्कि अभिभावकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा ने जिला के सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति न दें और उसे सडक़ सुरक्षा के नियमों की पूरी जानकारी दें। ये सभी नियम हमारी और दूसरों की जिंदगी की सुरक्षा से जुड़े हैं। नाबालिग द्वारा की गई दुर्घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि सडक़ पर वाहन चलाना अधिकार से अधिक एक जिम्मेदारी भी है। कुछ मिनटों की लापरवाही किसी व्यक्ति के जीवन को हमेशा के लिए बदल सकती है। इसलिए बच्चों को वाहन की चाबी देने से पहले अभिभावकों को यह सोचना चाहिए कि वे अपने बच्चे के साथ-साथ सडक़ पर चलने वाले दूसरे लोगों की जिंदगी को भी जोखिम में डाल रहे हैं।
ऐसे फैसले समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश हैं—नाबालिग होना यातायात नियमों की अनदेखी का लाइसेंस नहीं है। उम्र कम होने के बावजूद सडक़ पर की गई लापरवाही के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। साथ ही, बच्चों को केवल दंडित करने के बजाय उन्हें समझाना, शिक्षित करना और जिम्मेदार नागरिक बनाना अधिक प्रभावी समाधान है। आज आवश्यकता इस बात की है कि स्कूलों, अभिभावकों और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से बच्चों में सडक़ सुरक्षा की संस्कृति विकसित की जाए। स्कूलों में यातायात नियमों पर जागरूकता कार्यक्रम हों, अभिभावक नाबालिगों को वाहन न दें और प्रशासन नियमों के पालन को लेकर प्रभावी निगरानी रखे।

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