अतिक्रमण हटाना जरूरी, लेकिन प्रभावित लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था और पारदर्शी प्रक्रिया भी मिले: अधिवक्ता निखिल चुघ
BOL PANIPAT। शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर अधिवक्ता निखिल चुघ ने कहा कि सार्वजनिक भूमि और जल निकासी व्यवस्था को अतिक्रमण मुक्त करना जरूरी है, लेकिन ऐसी कार्रवाई के दौरान प्रभावित लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई कानून के अनुरूप, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को पर्याप्त पूर्व सूचना, स्पष्ट demarcation तथा अपनी आपत्ति या शिकायत रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
निखिल चुघ ने कहा कि अतिक्रमण हटाना केवल तत्काल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य शहर की जल निकासी व्यवस्था को बेहतर करना, सार्वजनिक रास्तों को सुगम बनाना और भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न होने देना होना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि जहां कार्रवाई से वास्तविक रूप से प्रभावित परिवारों की आजीविका जुड़ी हो, वहां नियमों के दायरे में रहते हुए उनके लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था अथवा पुनर्वास संबंधी विकल्पों पर भी विचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि “कानून का पालन और मानवीय दृष्टिकोण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। प्रशासन को विकास और सार्वजनिक हित के साथ-साथ प्रभावित नागरिकों के अधिकारों का भी संतुलन बनाए रखना चाहिए।”
निखिल चुघ ने कहा कि यदि अतिक्रमण हटाने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से और समान रूप से लागू की जाती है, तो इससे न केवल प्रशासन पर जनता का विश्वास बढ़ेगा बल्कि शहर की व्यवस्था में भी दीर्घकालिक सुधार आएगा।

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