Friday, September 11, 2026
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स्वामी अग्निवेश का जीवन संघर्ष और उनके संदेश आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत : राम मोहन राय

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at September 11, 2026 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : पानीपत। निर्मला देशपांडे संस्थान, पानीपत में संचालित हाली अपना स्कूल में स्वामी अग्निवेश की सातवीं पुण्यतिथि के अवसर पर एक प्रेरणा सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता बंधुआ मुक्ति मोर्चा की संयोजक अनीता जयकिशन ने की। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन तथा वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए स्वामी अग्निवेश द्वारा किए गए संघर्ष को याद करते हुए उनके विचारों और संदेशों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताया गया।

सभा को संबोधित करते हुए गांधी ग्लोबल फैमिली के महासचिव राम मोहन राय ने स्वामी अग्निवेश के संघर्षशील जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी अग्निवेश केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता या आंदोलनकारी नहीं थे, बल्कि वे अन्याय और शोषण के विरुद्ध निरंतर संघर्ष करने वाले निर्भीक जननायक थे। उन्होंने अपना जीवन उन लोगों के लिए समर्पित किया जिन्हें समाज और व्यवस्था के हाशिये पर छोड़ दिया गया था।

राम मोहन राय ने स्वामी अग्निवेश के साथ बिताए अपने समय और उनसे जुड़े व्यक्तिगत अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी के व्यक्तित्व में सादगी, निर्भीकता, संवेदनशीलता और संघर्षशीलता का अद्भुत समन्वय था। वे किसी भी प्रकार के अन्याय के सामने समझौता करने के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि समाज में वास्तविक शांति तभी स्थापित हो सकती है जब शोषण, भेदभाव और असमानता को समाप्त किया जाए।

उन्होंने कहा कि बंधुआ मजदूरी के खिलाफ स्वामी अग्निवेश का आंदोलन भारतीय सामाजिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने हजारों बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया और उनके पुनर्वास तथा सम्मानजनक जीवन के अधिकार की आवाज बुलंद की। उनका संघर्ष केवल मजदूरों की मुक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि मानव गरिमा और सामाजिक न्याय की व्यापक लड़ाई का हिस्सा था।

राम मोहन राय ने कहा कि स्वामी अग्निवेश का संदेश आज के युवाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे केवल अपने व्यक्तिगत भविष्य के बारे में न सोचें, बल्कि समाज में व्याप्त अन्याय, हिंसा, भेदभाव और असमानता के विरुद्ध भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि स्वामी जी की स्मृति को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब उनके विचारों को जीवन और समाज में व्यवहार के रूप में उतारा जाए।

सभा की अध्यक्षता कर रहीं अनीता जयकिशन ने कहा कि स्वामी अग्निवेश ने बंधुआ मजदूरी के विरुद्ध जो संघर्ष खड़ा किया, उसने देश और दुनिया का ध्यान इस गंभीर सामाजिक समस्या की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि संकल्प दृढ़ हो तो सामाजिक परिवर्तन संभव है।

निर्मला देशपांडे संस्थान की निदेशक पूजा सैनी ने कहा कि स्वामी अग्निवेश का जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को ऐसे व्यक्तित्वों के संघर्ष और विचारों से परिचित कराना समय की आवश्यकता है, ताकि उनमें संवेदना, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।

कार्यक्रम में अधिवक्ता स्पर्श वर्मा, न्यायिका भारती, लक्ष्मी सैनी तथा रिया अवस्थी ने भी अपने विचार रखे और स्वामी अग्निवेश के सामाजिक एवं मानवीय योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन दिलाने का संघर्ष आज भी उतना ही आवश्यक है।

सभा में उपस्थित लोगों ने स्वामी अग्निवेश के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके संघर्षों को आगे बढ़ाने तथा सामाजिक न्याय, समानता, अहिंसा और मानवीय गरिमा के मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का वातावरण भावपूर्ण एवं प्रेरणादायक रहा। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि स्वामी अग्निवेश शरीर से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, बंधुआ मजदूरों की मुक्ति और मानव गरिमा के लिए उनका संदेश आज भी समाज को रास्ता दिखाता है।

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