Thursday, October 22, 2026
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व्यर्थ सामग्री से कलाकृति एवं उपयोगी वस्तुओं का सृजन विषय पर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 22, 2026 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : आई.बी. (पी.जी.) महाविद्यालय, पानीपत के ईको क्लब के तत्वावधान में आज महाविद्यालय परिसर में “Transforming Waste into Wonders” (व्यर्थ सामग्री से कलाकृति एवं उपयोगी वस्तुओं का सृजन) विषय पर एक भव्य एवं प्रेरणादायक प्रदर्शनी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर छुपा रचनात्मक कौशल बाहर लाना, कबाड़ एवं अनुपयोगी वस्तुओं के पुनः उपयोग (Reuse & Recycle) के प्रति जागरूकता फैलाना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित करना था।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह द्वारा किया गया। उद्घाटन के पश्चात् उन्होंने प्रदर्शनी में सजाए गए सभी मॉडलों एवं कलाकृतियों का अवलोकन किया और विद्यार्थियों की प्रतिभा की मुक्तकंठ से सराहना की।
विषय-वस्तु की सार्थकता (Theme Justification)
“कचरा कोई व्यर्थ वस्तु नहीं, अपितु एक अव्यक्त संसाधन है। आवश्यकता केवल उस सकारात्मक दृष्टि की है जो अनुपयोगी सामग्री में भी उपयोगिता और सुंदरता देख सके। जब हमारी सोच रचनात्मक होती है, तब कबाड़ भी ‘कंचन’ का रूप ले लेता है और पर्यावरण-संरक्षण की दिशा में एक नया मार्ग प्रशस्त करता है।”
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने दैनिक जीवन में बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं—जैसे पुराने समाचार पत्र, प्लास्टिक की बोतलें, काँच के टुकड़े, गत्ते के डिब्बे, पुराने वस्त्र एवं पॉलीथिन—का अत्यंत कुशलता से प्रयोग करते हुए कलात्मक, टिकाऊ और आकर्षक वस्तुएँ निर्मित कीं।
प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह का वक्तव्य
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा:
“आज सम्पूर्ण विश्व अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) और पर्यावरण असंतुलन की गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। ऐसे परिदृश्य में ‘जुगाड़ से सृजन’ की यह सोच भारत को स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रधानमंत्री के ‘स्वच्छ भारत – स्वस्थ भारत’ के संकल्प को मूर्त रूप देने के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने दैनिक जीवन में 3R—रिड्यूस (Reduce), रीयूज (Reuse) और रीसाइकिल (Recycle) के सिद्धांत को अपनाएँ। विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई प्रत्येक कृति यह संदेश देती है कि यदि हम अपनी जीवनशैली में थोड़ा सा बदलाव लाएँ, तो पर्यावरण संरक्षण कोई कठिन लक्ष्य नहीं है।”
डॉ. अर्पणा गर्ग का वक्तव्य
प्रदर्शनी के अवसर पर निर्णायक मंडल की सदस्य डॉ. अर्पणा गर्ग ने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा:
“कचरे को चमत्कार में बदलना केवल एक कला नहीं, बल्कि वर्तमान युग की एक अनिवार्य आवश्यकता है। जब विद्यार्थी अपनी कल्पनाशीलता से किसी व्यर्थ वस्तु को एक नया जीवन देते हैं, तो वे न केवल अपनी रचनात्मकता को निखारते हैं, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले बोझ को भी कम करते हैं। इस प्रकार के आयोजन युवाओं में पर्यावरण-संवेदनशीलता (Eco-consciousness) विकसित करते हैं और उन्हें सतत विकास (Sustainable Development) के लिए प्रेरित करते हैं।”

निर्णायक मंडल एवं उपस्थित प्राध्यापकगण
प्रदर्शनी का निष्पक्ष एवं सूक्ष्म मूल्यांकन करने के लिए एक योग्य निर्णायक मंडल का गठन किया गया था, जिसमें डॉ. निधान सिंह, डॉ. अर्पणा गर्ग, पवन कुमार एवं कनक शर्मा शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान ईको क्लब के सदस्यों के साथ-साथ महाविद्यालय के प्राध्यापकगण— संगीता, डॉ. सुमन सिंगला, मनीष कुमार एवं कीर्ति विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

प्रतियोगिता के परिणाम
निर्णायक मंडल के निर्णय के अनुसार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के परिणाम इस प्रकार रहे:
प्रथम स्थान: नैंसी ( B.Com 2nd Year Hons )
द्वितीय स्थान: राजीव ( M.Com Final Year )
तृतीय स्थान: रौनक ( B.A. 1st Year )
तृतीय स्थान (संयुक्त): आंचल ( B.A. 3rd Year English Hons ) एवं कुमकुम ( B.A. 3rd Year English Hons )

कार्यक्रम के अंत में विजेता विद्यार्थियों को स्मृति चिह्न एवं प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही, उपस्थित सभी प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थियों ने अपने दैनिक जीवन में कम से कम कचरा उत्पन्न करने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने की शपथ ली।

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