किसानों को प्राकृतिक जोखिम से सुरक्षा देने के लिए सुरक्षा कवच के रूप में एक महत्वकांशी योजना : आत्मा राम गोदारा
BOL PANIPAT, 1 जुलाई। उपकृषि निदेशक आत्मा राम गोदारा ने जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को प्राकृतिक जोखिम से सुरक्षा देने के लिए सुरक्षा कवच के रूप में एक महत्वकांशी योजना के रूप में भारत सरकार द्वारा प्रायोजित तथा राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वित एक महत्वपूर्ण योजना की शुरूआत खरीफ- 2016 में की गई। जिसे बाद में खरीफ- 2020 में ऋृणी किसानों के लिए भी इस स्कीम को वैकल्पिक कर दिया गया। उन्होंने बताया कि खरीफ- 2025 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत चार फसल कपास, बाजरा, धान व मक्का को नोटिफाइड किया गया है। खरीफ 2025 में धान के लिए किसानों द्वारा दिया जाने वाली प्रति एकड़ प्रीमियम राशि 860 व बीमित राशि 42997, बाजरा के लिए किसानों द्वारा दिया जाने वाली प्रति एकड़ प्रीमियम राशि 415 व बीमित राशि 20727, कपास के लिए किसानों द्वारा दिया जाने वाली प्रति एकड़ प्रीमियम 2200 व बीमित राशि 43990, मक्का के लिए किसानों द्वारा दिया जाने वाली प्रति एकड़ प्रीमियम 441 व बीमित राशि 22050 रहेगी।
उन्होंने बताया कि यह स्कीम ऋृणी व गैर ऋृणी, दोनों तरह के किसानों के लिए वैकल्पिक है और जिन किसान भाइयों ने बैंक से केसीसी के मार्फत ऋण ले रखा है, संबन्धित बैंक द्वारा उन किसानों का फसल बीमा अपने स्तर पर कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जो किसान भाई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुडऩा नहीं चाहते और जिन्होने बैंक से केसीसी के मार्फत ऋण ले रखा है वे अपने संबन्धित बैंक में 24 जुलाई 2025 तक लिखित में इस बारे लिखकर दें कि वे इस स्कीम में शामिल नहीं होना चाहते तो उन किसानों की प्रीमियम राशि उनके बैंक खाते से नही कटेगी और उनकी फसल का बीमा नही होगा। ऐसा न करने पर बैंक द्वारा किसान की फसल का बीमा आवश्यक रूप से कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा जो किसान भाई अपनी पहले सीजन में बीजी गई फसल में बदलाव करवाना चहाते है, वे सभी किसान 29 जुलाई 2025 तक अपने संबन्धित बैंक से सम्पर्क कर अपनी फसल में बदलाव करवा सकते है। ताकि किसान की सही फसल का बीमा हो सकें और फसल बीमा दौरान किसी प्रकार की फसल मिस मैचिंग की समस्या का सामना न करना पड़े। जो किसान भाई गैर ऋृणी कैटेगरी से अपनी फसल की बीमा करवाना चाहते है, वे अपने नजदीकी सीएससी सेंटर से फसल बीमा करवा सकते है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पानीपत के सहायक सांख्यिकी अधिकारी हरबंस सिंहमार ने बताया कि किसानों को गैर ऋृणी श्रेणी मे बीमा करवाने के लिए जमीन की फरद, आधार कार्ड प्रति, फसल बीजाई का प्रमाण पत्र अनिवार्य है। इसके अलावा जिन किसानों ने जमीन पट्टे/ठेके पर ले रखी है वे किसान बीमा करवाने के लिए जमीन की फरद आधार कार्ड की प्रति फसल बिजाई का प्रमाण पत्र के अलावा जमीन के मालिक से लिया गया एफिडेविट सीएससी पर जमा करवाकर प्रति एकड़ (ऊपर विर्णत) प्रिमियम राशि का भुगतान करके अपनी फसल का बीमा करवा सकते है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सभी किसान अपनी फसल का बीमा अपने संबन्धित बैंक व नजदीकी सेंटर से 31 जुलाई 2025 तक करवा सकते है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत स्थानीय आपदा के अन्तर्गत खड़ी फसल के दौरान भारी बारिश से जलभराव, बादल फटना व औलावृष्टि की स्थिति में फसल में नुकसान होने पर किसानों को व्यक्तिगत रूप से आपदा घटित होने के 72 घण्टे के अन्दर-अन्दर आवेदन स्वयं पीएमयू के मार्फत करना होगा। 72 घण्टे के बाद पीएमयू पर अपलोड किए गए आवेदन स्वीकार नही किए जंाएगे। इसके अलावा किसान कृषि रक्षक पोर्टल हेल्पलाईन न0. 14447 के माध्यम से भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है। निर्धारित समय सीमा में प्राप्त बीमित किसानों के आवेदनों का सर्वे 15 दिन के अन्दर-अन्दर करवा कर बीमा कम्पनी क्लेम अदा कर देती है। धान फसल के लिए स्थानीय आपदा के तहत रिस्क कवरेज नहीं दिया जा सकता।
सहायक सांख्यिकी अधिकारी हरबंस सिंहमार ने बताया कि इसके अलावा कृषि विभाग द्वारा दोनों सीजन में सभी नोटिफाईट फसलों पर चार-चार फसल कटाई प्रयोग संचालित किए जाते है जो गाँव में बीजी गई फसल की उपलब्धता पर निर्भर करती है। इस प्रकार फसल कटाई प्रयोग के आधार पर आई औसत पैदावार को सरकार द्वारा पूर्व निर्धारित थ्रैशोल्ड उपज की तुलना की जाती है। औसत पैदावार, थ्रैशोल्ड उपज में जिस अनुपात में कम रहती है, उसके मुताबिक उस गाँव में उस फसल विशेष के लिए बीमित सभी किसानों का बीमा क्लेम देने का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि फसल की कटाई के उपरान्त यदि किसान ने फसल को खेत में सूखने के लिए कट एण्ड स्प्रीड रूप में छोड़ रखा है तथा स्थानीय आपदा जैसे आँधी – तृफान, औलावृष्टि चक्रवात, चक्रवात वर्षा, जलभराव की स्थिति में किसान कटाई के 14 दिन बाद तक क्लेम का दावा कर सकता है। लेकिन इसके लिए भी किसान को 72 घण्टे के अन्दर – अन्दर आवेदन स्वयं पीएमयू के मार्फत करना होगा। 72 घण्टे बीत जाने के बाद किए गए आवेदन बीमा कम्पनी द्वारा रद्द कर दिए जाऐगे। सर्वे रिपोर्ट में दर्शाए गए नुकसान के अनुसार बीमा कम्पनी के द्वारा किसान को मुआवजे का भुगतान कर दिया जाता है।

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