एसआईआर में नोटिस पाने वालों के घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे बीएलओ : उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ हरीश कुमार वशिष्ठ
ई आरओ कार्यालय में बुलाने की जरूरत नहीं, विशेष परिस्थितियों में ऑनलाइन होगी सुनवाई
रैन बसेरों, मजदूरों, गरीब और बेघर लोगों के लिए विशेष सहायता केंद्र व शिविर लगाने के निर्देश
दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अवधि बढ़ी, लगातार अद्यतन प्रक्रिया के तहत छूटे मतदाता भी करा सकेंगे नाम शामिल
BOL PANIPAT , 26 सितंबर। भारत निर्वाचन आयोग की बैठक का हवाला देते हुए उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ हरीश कुमार वशिष्ठ ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय जो आयोग ने लिए है उन पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया है कि एसआईआर के दौरान जिन व्यक्तियों को अनमैप्ड अथवा तार्किक विसंगतियों के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं, उनके दस्तावेज एकत्र करने के लिए बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) संबंधित मतदाताओं के घर जाएंगे। इसके बाद दस्तावेजों को ईसीआईनेट पर अपलोड किया जाएगा जहां निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा निर्णय लिया जाएगा।
उपायुक्त ने आयोग की शनिवार को ही बैठक का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तियों को सामान्य तौर पर ईआरओ या सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल विशेष परिस्थितियों में, ईआरओ के निर्णय के अनुसार सुनवाई आयोजित की जाएगी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है। ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
उपायुक्त ने बताया कि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीबों, बेघर लोगों तथा अन्य जरूरतमंद वर्गों की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं और आवश्यकता के अनुसार विशेष शिविर लगाए जाएंगे
विदित रहे कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा है। वहीं एसआईआर अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के अनुसार लागू प्रपत्रों का ही उपयोग किया जाएगा।
ध्यान रहे कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुसार ईसीआईनेट प्रणाली में भूमिका आधारित पहुंच प्रदान की गई है। ईसीआईनेट की कार्यप्रणाली की दोबारा समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। इसमें आईआईटी/आईआईआईटी के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। समिति यह जांच करेगी कि ईसीआईनेट अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को देगी।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई सुधार किए जा चुके हैं। फील्ड अधिकारियों को आगे किसी अतिरिक्त सुविधा या लचीलेपन की आवश्यकता होने पर उसे भी लागू किया जाएगा। भविष्य में सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित नए मॉड्यूल और पोर्टल शुरू करने से पहले अधिकारियों की समिति में उनका विचार-विमर्श किया जाएगा।

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