एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में ‘आधुनिक विज्ञान और प्रौध्योगिकी में नये रुझान’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस का सारगर्भित समापन
उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजित रही कांफ्रेंस
विज्ञान में आधुनिकशोध की जड़े छिपी है भारतीय सनातन परंपरा में: प्रो पवन शर्मा डीन,रिसर्च एंड डेवलपमेंट कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र
विज्ञान औरअनुसंधानकेविकासपरटिकीहैभविष्यकेभारतकीनींव: प्रो पवन शर्मा
आयन बीम तकनीक का पदार्थों की सतह संशोधन में उपयोग का दायराबहुत वृहद: डॉ संजीव अग्रवालभौतिकी विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालयकुरुक्षेत्र
BOL PANIPAT , 30 मार्च,
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजित आधुनिक विज्ञान और प्रोद्योगिकी में नये रुझान’विषय पर चलने वाली दो दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस का सारगर्भित समापन मुख्यअतिथिप्रो पवन शर्मा डीन,रिसर्च एंड डेवलपमेंट कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने किया. प्रात: कालीन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो संजीव अग्रवाल प्रोफेसर भौतिकी विभाग एवं निदेशक अयन बीम सेंटर कुरुक्षेत्र विश्वविधालयकुरुक्षेत्रने की और ‘आयन बीम का पदार्थों की सतह संशोधन में प्रयोग’ विषय पर व्याख्यान दिया.माननीय मेहमानों का स्वागत एसडी पीजी कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रो राकेश सिंगला और डॉ प्रवीन कत्याल ने पुष्प रोपित पौधे और शाल भेंट कर किया.कांफ्रेंस के दूसरे दिन की शुरुआत शोध पत्रों की प्रस्तुति से हुई.मंच का संचालन डॉ प्रियंका चांदना नेऔर माननीय मेहमानों का जीवन परिचय डॉ प्रियंका चांदना और डॉ चेतना नरूला ने प्रस्तुत किया.दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस में भौतिकी, वनस्पतिशास्त्र, प्राणी शास्त्र, रसायन शास्त्र,अभियांत्रिकी औरतकनीकी, गणित,और कंप्यूटर साइंस जैसे विषयों पर गंभीर मंथन और विचार-विमर्श कर नए विचारों और सिद्धांतों को प्रतिपादित किया गया.कांफ्रेंस में प्रदेश और देश के अलग-अलग राज्यों के लगभग 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और अपने विषय के विविध शोध पत्र प्रस्तुत किये. कांफ्रेंस के समापन पर शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को सर्टिफिकेट्स वितरित किये गए.
प्रो पवन शर्मा डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने अपने समापन भाषणमें कहा किविज्ञान में आधुनिक शोध की जड़े भारतीय सनातन परंपरा में छिपी है.अच्छे विज्ञान से ही अच्छी तकनीक का जन्म होता है. आज विज्ञान में पुन: दर्शन को पैदा करने की आवश्यकता है. बहुविषयी शिक्षा बदलते समय की मांग है और जिन देशों ने इस परिकल्पना को समय रहते अपना लिया था आज वे उसी की लाभ की फसल काट रहे है. विज्ञान का सीधा अर्थ प्रश्न पूछने की कला है. जो व्यक्ति अपने भीतर की जिज्ञासा और प्रश्नोंको अपने भीतर जिन्दा रखता है वही सहीमायनों में वैज्ञानिक है. विज्ञानव्यवस्थित ज्ञान का दूसरा नाम है.भविष्यकेभारतकीनींव विज्ञान औरअनुसंधानकेविकासपरटिकीहै और जितना अधिक निवेश हम शोध और विज्ञान में केअरेंगे उतना ही फायदा देश को होगा. उन्होनें कहा कि इस प्रकार की बहुविषयी कांफ्रेंस में भाग लेने से न सिर्फ हमारा ज्ञान बढ़ता है बल्कि ऐसे आयोजन हमारी आँखें भी खोलते है.विज्ञान के विद्याथी को ‘क्या’ नहीं बल्कि ‘कैसेकरना है’ पर बल देना चाहिए. भारत की संस्कृति की जड़े विज्ञान से जुडी है और सनातन संस्कृति केहर पहलु पर हमें गर्व होना चाहिए. बेशकहमें कुछ बातें आज समझ न आये या फिर अन्धविश्वासी लगे, परन्तुधैर्य, वैज्ञानिक सोच और प्रश्न पूछने की आदत से भविष्य में इन सवालों का जवाब अवश्य मिलेगा. नई शिक्षा नीति (एनईपी)से देश में रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और आने वाले समय में विद्यार्थियों को बहुविषयी विकल्प उपलब्ध होंगे. अज का सामाजिक परिवेश निरंतर बदल रहा है और ऐसे माहौल में इस प्रकार की कांफ्रेंस का आयोजन कर कॉलेज ने सराहनीय कार्य किया है.विषयों के मिश्रित पाठ्यक्रम केफायदे भविष्य में देखने को मिलेंगे.
प्रो संजीव अग्रवाल भौतिकी विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने ‘आयन बीम का पदार्थों की सतह संशोधन में प्रयोग’ विषय पर बोलते हुए कहा कि सामान्य तौर पर इलेक्ट्रॉन बीम मशीनिंग में उच्च प्रसंस्करण दक्षता और व्यापक अनुप्रयोग रेंज होती है. आयन बीम प्रसंस्करण अधिक सटीक प्रसंस्करण है और यह सबसे सूक्ष्म प्रसंस्करण के लिए सर्वथा उपयुक्त विधि है. इसका उपयोग शक्ति घनत्व और ऊर्जा इंजेक्शन समय के आधार पर किया जा सकता है. इलेक्ट्रॉन बीम प्रसंस्करण का उपयोग विभिन्न प्रकार के कार्यों जैसे कि छिद्रण, काटना, नक़्क़ाशी, वेल्डिंग, गर्मी उपचार और फोटोलिथोग्राफी के लिए किया जाता है. विभिन्न पदार्थों जैसे स्टील, पोर्सिलीन इत्यादि के गुण, रंग,मजबूती, टिकाउपन, लम्बी उम्र आदि को हासिल करने के लिए इस विधि का इस्तेमाल किया जाता है. आज आयन बीम प्रसंस्करण का अनुप्रयोग नए क्षेत्र का विस्तार और नवाचार कर रहा है. वर्तमानमेंआयनबीमप्रसंस्करणकाउपयोगभागोंकेआकारऔरसतहकेभौतिकऔरयांत्रिकगुणोंको बदलने के लिए भी किया जा रहा है. स्वास्थ्य सेवाओं में दिमाग में छुपे ऐसे ट्यूमर जिनका इलाज करना असंभव होता है को आयन बीम तकनीक से आसानी के साथ ठीक किया जा सकता है. एसआरआईएम(पूर्वमेंटीआरआईएम) का उपयोग व्यापक रूप से आयन बीम आरोपण और सामग्री के आयन बीम प्रसंस्करण से संबंधित कई मापदंडों की गणना करने के लिए किया जाता है.इसमें परमाणु विस्थापन प्रति परमाणु (डीपीए) के रूप में जानी जाने वाली एक सामान्य विकिरण क्षति जोखिम इकाई की गणना करने की क्षमता भी होती है.
पवन गोयल प्रधान एसडी पीजी कॉलेज ने अपने सन्देश में कहा कि वैज्ञानिकों को चाहिए कि वे आमजन के फायदे के लिए अनुसंधान करें. इस कांफ्रेंस का उद्देश्य वैज्ञानिक उपलब्धियों और सिद्धांतों को समाज तक पहुंचाना है. इससे न सिर्फ युवाओं मेंवैज्ञानिक चेतना जागृतहोगी बल्कि शोध और अनुसंधान का जज्बा भी पैदा होगा. आज सबसे अधिक मदद की जरुरत कृषि क्षेत्र को है और इसके लिए हमें नयी और क्रांतिकारी तकनीकों को खोजना चाहिए.उन्होनें कहा कि उन्हें इस बात की खुशी हुई है कि इस कांफ्रेंस में विज्ञान, तकनीक और अन्वेषण पर बल दिया गया. भारत का विकास वैसे भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर निर्भर करता है. उन्होनें उम्मीद जताई किइस कांफ्रेंस में भाग लेने प्रतिभागी और शोधकर्ता अवश्य ही कुछ नया सोच कर उस पर क्रियान्वन करेंगे.
डॉ अनुपम अरोड़ा ने अपने धन्यवाद भाषण में कहा किवर्तमान में भारत में अनुसंधान और विकास कार्यों की रफ्तार कई क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ रही है. सरकार के सहयोग और समर्थन के कारण और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष अनुसंधान, विनिर्माण, जैव उर्जा, जल तकनीक और परमाणु ऊर्जा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश और विकास हो रहा है. हम धीरे-धीरे परमाणु प्रौद्योगिकी में भी आत्मनिर्भर हो रहे हैं. शोध के क्षेत्र में सीएसआईआर, डीआरडीओ, आईसीएआर, इसरो, आईसीएमआर, सी-डेक, एनडीआरआई, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय विज्ञान संस्था (आईआईएस) जैसे कई विश्वविख्यात संस्थान आज भारत में हैं. ऐसे में भारत में शोध कार्य की दिशा में हुई प्रगति हमको गौरान्वित करती है परन्तु एक सच्चाई यह भी है कि आज भी कईऐसे अवरोध हैं जिन्हें पार करना भारतीय अनुसंधान और विकास के लिये बहुत ज़रूरी है. इस प्रकार की कांफ्रेंस को आयोजित करने का प्रायोजन भी यही है कि उभरते हुए युवा शोध कर्ताओं को उनकी प्रतिभा दिखलाने का उचित मंच मिले.
शोधार्थियों में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय से निशा मलिक, गुरविंदर और दिव्या गुप्ता ने भौतिकी में, आयन बीम सेंटर केयूके सेउषा रानी और काफी देवी ने, प्राणीशास्त्र विभाग कुरुक्षेत्र विश्विधालय से पारुल और परमेश कुमार ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये.
कांफ्रेंस में संगठन सचिव की भूमिका भौतिकी में डॉ बलजिंदर सिंह, डॉ रेखा रानी, डॉ चेतना नरूला, डॉ रेणु गुप्ताएवंडॉ बिंदु, गणित में प्रो संजय चोपड़ा, आईक्यूएसी में डॉराकेश गर्ग, रसायन शास्त्र में प्रो मयंक अरोड़ा, प्रो प्रवीण कुमारी एवंडॉ प्रोमिला,जीवन विज्ञान में डॉ रवि कुमार एवं डॉ राहुल जैन और कंप्यूटर साइंस में प्रो सतीश अरोड़ाने निभाई. इनके साथ परामर्श समिति में प्रो राकेश सिंगला, प्रो मुकेश गुप्ता, डॉ प्रवीण कत्याल, प्रो प्रवीण आर खेरडे, डॉ मुकेश पुनिया और डॉ प्रियंका चांदना शामिल रहे.

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