फसल अवशेष प्रबंधन योजना-पराली प्रबंधन पर मिलेंगे प्रति एकड़ एक हजार रूपये
सरकार की योजना का लाभ उठाएं किसान: उपायुक्त
BOL PANIPAT , 06 अक्तूबर। राज्य सरकार द्वारा धान की कटाई उपरांत पराली/फसल अवशेषों का खेत में ही प्रबंधन करने पर प्रति एकड़ एक हजार रूपये मुआवजा देने का प्रावधान किया है। इसलिए किसान फसल अवशेष प्रबंधन योजना (सीआरएम) में एक्स-सीटू के तहत बेलर द्वारा पराली की गांठें बनाकर और इन-सीटू में खेत में ही मशीनों की सहायता से धान अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर इस अनुदान योजना का लाभ उठा सकते हैं। उपायुक्त सुशील सारवान यह जानकारी देते हुए ने बताया कि इस समय जिले में धान की अगेती धान की फसलों की कटाई जोरों पर चल रही है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों व जिला प्रशासन द्वारा किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है कि वे धान की कटाई के उपरांत पराली को बिल्कुल भी न जलाएं, बल्कि इसको या तो रिफाइनरी के पास बने 2जी एथेनॉल प्लांट हेतु सीएचसी खरीद सेंटर को बेच दें या सीआरएम स्कीम के तहत प्रबंधन करके एक हजार रूपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान प्राप्त कर लें। दोनों ही तरह से किसानों का फायदा है। परंतु यदि पराली में आग लगाएंगे तो किसानों को दोहरा नुकसान होगा। एक तो पराली में आग लगाने से भूमि की उर्वरा शक्ति पर बुरा असर पड़ता है और दूसरा पराली में आग के जुर्म में उन पर जुर्माना होगा और कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अपनी आय में भी बढ़ौतरी करें।
पोर्टल पर 31 दिसंबर तक करना होगा पंजीकरण: डॉ. वजीर
वहीं, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पानीपत के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि पराली का खेत में ही प्रबंधन करने के लिए सरकारा द्वारा कृषि यंत्रों पर भारी अनुदान दिया जाता है, जिसमें सीएचसी हेतु 80 प्रतिशत अनुदान और व्यक्तिगत कृषि यंत्रों हेतु 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। इसलिए किसानों को कृषि यंत्रों के माध्यम से पराली का प्रबंधन करना चाहिए। किसान हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रिवर्सिबल एमबी प्लो, जीरो ड्रिल, रोटावेटर एवं हैरो की सहायता से धान के अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर तथा बेलर द्वारा गांठें बनाकर प्रोत्साहन राशि के पात्र बन सकते हैं। इसके लिए उन्हों विभाग की वेबसाइट एचटीटीपीएस://एग्रीहरियाणाडॉटजीओवीडॉटइन पर आवेदन करना होगा। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पोर्टल पर 31 दिसंबर तक पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।
केवीके उझा में प्रशिक्षण शिविर आज
उप कृषि निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार 7 अक्तूबर को कृषि विज्ञान केंद्र उझा में फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत एक शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसमें पानीपत व बापौली खंड के सैकड़ों किसान भाग लेंगे। किसानों को धान की सीधी बिजाई तथा फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने दोनों खंडों के किसानों से इस कैंप में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है।

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