डॉ. भीम राव अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता का है प्रतीक- उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया
समानता और शिक्षा ही सच्ची श्रद्धांजलि. संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में उतरे. सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने की अपील
BOL PANIPAT , 14 अप्रैल। भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136 वीं जयंती पर उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया ने जिला के नागरिकों से संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया है।
उपायुक्त ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता का प्रतीक है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने अद्वितीय ज्ञान व दृढ़ संकल्प के बल पर देश को एक मजबूत संविधान प्रदान किया।
उपायुक्त ने कहा कि “डॉ. अंबेडकर ने हमें जो संविधान दिया है, वह केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता और समानता का मार्गदर्शक है।”
डॉ. दहिया ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि आज के दिन हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम समाज में भेदभाव, छुआछूत और असमानता को समाप्त करने के लिए मिलकर प्रयास करेंगे।
उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है और हर व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया जा सकता है।
उपायुक्त डॉ दहिया ने कहा कि “डॉ. अंबेडकर का सपना एक ऐसे भारत का था, जहां हर नागरिक को समान अवसर मिले और कोई भी व्यक्ति अपने अधिकारों से वंचित न रहे। हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलकर एक सशक्त और समरस समाज का निर्माण करना है।”
उपायुक्त ने युवाओं को विशेष रूप से आह्वान किया कि वे डॉ. अंबेडकर के जीवन से प्रेरणा लें और शिक्षा, अनुशासन व कड़ी मेहनत को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और वे ही समाज में बदलाव के सच्चे वाहक हैं।

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