हरियाणा की बीजेपी जेजेपी सरकार ने गवर्नमेंट चार्जेस के नाम पर जनता की जेब पर डाला डाका :सुखबीर मलिक
-विकास शुल्क में 10 गुना से लेकर 50 गुना तक कर दी बढ़ोतरी-
-छोटे शहरों में भी 100 गज मकान वाले व्यक्ति को देने होंगे विकास शुल्क के तौर पर कम से कम ₹1 लाख रुपए-
-नगर परिषद वाले शहरों में ₹50 गए से बढ़ाकर विकास शुल्क कर दिया सीधा कलेक्ट्रेट का पांचवा हिस्सा-
BOL PANIPAT : आम आदमी पार्टी जिला अध्यक्ष सुखबीर सिंह मलिक ने कहा हरियाणा की बीजेपी जेजेपी सरकार ने जनता की जेब पर सीधा डाका डालने का काम कर दिया है। सरकार ने विकास शुल्क सीधा कलेक्ट्रेट के साथ जोड़कर जनता पर भारी बोझ डाल दिया है। अभी तक हरियाणा में विकास शुल्क के तौर पर ₹30 से लेकर ₹150 तक ही शुल्क लिया जाता था लेकिन बीजेपी जेजेपी सरकार इसे सीधा कलेक्ट्रेट का पांचवा हिस्सा यानी 20% कर दिया है।
18 फरवरी को जारी किए गए इस नए आदेश के अनुसार अब गांव से लेकर महानगर तक के सभी लोगों को इसकी चपेट में ले लिया गया है और छोटे शहरों में भी ₹100 गज के विकास शुल्क ₹50 की बजाए अब कलेक्ट्रेट का पांचवा हिस्सा देना पड़ेगा। उदाहरण देते हुए कहां पानीपत मॉडल टाउन में 100 गज के मकान पर ₹175000 डेवलपमेंट चार्जेस देना होगा। जो कि पहले ₹50 या ₹100 था.
यह भी कह सकते हैं कि छोटे शहरों में जहां अभी तक ₹50 प्रति गज विकास शुल्क लगता था वहां अब 1000 से ₹2000 प्रत्येक गज के हिसाब से विकास चार्ज लगेगा। बाजारों और प्राइम लोकेशन पर तो यह चार्ज 5 लाख से ₹20 लाख तक भी पहुंच जाएगा।
बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के ऊपर भी विकास शुल्क के नाम पर हरियाणा की बीजेपी जेजेपी सरकार ने बड़ी चोट मारने का काम किया है।
₹20 हजार रुपए प्रति गज वाले विकास शुल्क को अब सीधा कलेक्टर रेट के हिसाब में सीधा ₹4000 गज के तौर पर विकास शुल्क लिया जाएगा यानी प्रदेश के हर नागरिक को गठबंधन सरकार ने भारी वसूली के दायरे में ला दिया है।
इस वसूली से अब गांव भी नहीं बचेंगे। गांवों के लाल डोरे के अंदर आने वाले मकानों से भी विकास शुल्क लिया जाएगा। इससे भी बड़ी बात यह है कि नगर पालिका या नगर निगम में शामिल होने वाले गांवों के लोगों से भी नक्शा पास या ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट लेते समय भी विकास शुल्क लिया जाएगा। चाहे वह मकान 50 से 100 साल पहले भी क्यों न बनाया गया हो।
यानी प्रदेश की गठबंधन सरकार ने लोगों पर बड़ा आर्थिक बोझ लादने का काम किया है। इसे किसी भी तौर पर तर्कसंगत नहीं ठहरा जा सकता क्योंकि इतना अधिक विकास शुल्क किसी भी तौर पर जायज नहीं है। इस पर सरकार को चिंतन करना चाहिए ।इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की जनता सरकार के खिलाफ बड़ा आक्रोश फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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