एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्वविधालय स्तरीय सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना कैंप का चौथा दिन
जीवन जीने की कला, अंगदान, फर्स्ट ऐड एवं होम नर्सिंग और तनाव प्रबंधन विषयों पर स्वयंसेवकों ने लिए टिप्स
सफ़लता का अर्थ हम पैसा कमाना समझते हैं पर पुरुषार्थ के साथ साथ ईमानदारी भी जरूरी है प्रभु का धन्यवाद भी जरूरी है : बलवान शर्मा
लिंग अनुकूल वातावरण का अभाव देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों का मुख्य कारण: डॉ नीलम आर्य, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, फॉरेंसिक विभाग, मधुबन
जागृत बुद्धि ,अनुशासन और निरन्तरता ,अच्छी भावना से ही सफलता प्राप्त होगी : रोशन लाल सचदेवा पूर्व मैनेजर पंजाब नेशनल बैंक
BOL PANIPAT , 17 मार्च,
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्वविधालय स्तरीय सात दिवसीय एनएसएस कैंप के चौथे दिन विभिन्न विषय के विशेषज्ञों ने स्वयंसेवकों को टिप्स देकर अपने अनुभव उनके साथ साझा किये । डॉ नीलम आर्य वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, फॉरेंसिक विभाग मधुबन करनाल ने अपना व्याख्यान दिया । श्री बलवान शर्मा जी ने भी अपने टिप्स बच्चों से साँझा किये । पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व मैनेजर रोशन लाल सचदेवा ने ‘तनाव प्रबंधन’ पर व्याख्यान देते हुए युवा स्वयंसेवकों को तनावमुक्त जीवन जीने के तरीके और सलीके सिखाये । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कैंप सेक्रेटरी डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने किया ।
रोशन लाल सचदेवा पूर्व मैनेजर पंजाब नेशनल बैंक पानीपत ने ‘तनाव प्रबंधन’ पर बोलते हुए कहा कि तनाव इंसान के जीवन का अटूट हिस्सा है और यह हमें किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए प्रेरित भी कर सकता है । यहां तक कि गंभीर बीमारी, नौकरी छूटना, परिवार में मृत्यु या किसी दर्दनाक घटना से उच्च तनाव भी जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा हो सकता है । तनाव में हम उदास या चिंतित महसूस कर सकते हैं, और परन्तु इससे हम सामान्य व्यवहार करके निपट भी सकते है । यदि हम कई हफ्तों से अधिक समय तक उदास या चिंतित महसूस करते हैं तो विभिन्न थेरेपी, दवा और अन्य रणनीतियाँ इससे लड़ने में हमारी काफी मदद कर सकती हैं । सकारात्मक दृष्टिकोण, उन घटनाओं को स्वीकार करना जिन्हें हम नियंत्रित नहीं कर सकते है, आक्रामक होने के बजाय दृढ़ रहना, क्रोधित, रक्षात्मक या निष्क्रिय बनने के बजाय अपनी भावनाओं, राय या विश्वास पर जोर देंना और अपने समय का अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना तनाव से छुटकारा पाने में हमारी मदद करता है ।
डॉ नीलम आर्य वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, फॉरेंसिक विभाग मधुबन करनाल ने कहा कि लिंग अनुकूल वातावरण का अभाव ही देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों का मुख्य कारण है । फॉरेंसिक साइंस अपराध से जुड़ा विज्ञान है और इसमें अपराध का पता लगाने के लिए शरीर के तरल पदार्थो की जांच की जाती है । फॉरेंसिक रिपोर्ट को अदालत भी अहम साक्ष्य मानती है । देश-विदेश में बढ रही आतंकी घटनाओ और अपराधों ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग बढा दी है । आपराधिक वारदातों के सूत्रधारों की धर-पकड के लिए प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की जरूरत आज समाज और समय की मांग है । इस साइंस का जानकार अपराध से जुडे लोगों को पकडवाने में काफी मददगार होता है । आतंकवादी गुत्थियां हों या रहस्यमय मौत, इसे सुलझाने में फॉरेंसिक साइंस की अहम भूमिका होती है । फॉरेंसिक साइंस अब विदेश में ही नहीं देश में भी लोकप्रिय होती जा रही है । इस क्षेत्र में बढती नौकरियों ने विद्यार्थियों को फॉरेंसिक साइंस का कोर्स करने के लिए प्रेरित किया है । इसकी पढाई करने वालों के लिए नौकरियों के कई विकल्प हैं. इसमें डिप्लोमा कोर्स से लेकर पीएचडी करने वालों के लिए हर स्तर पर नौकरी के अवसर है । एक अच्छे फॉरेंसिक एक्सपर्ट का स्वभाव जिज्ञासु, उसकी कानून-व्यवस्था पर आस्था, उसमे सटीकता का गुण, तार्किक, व्यावहारिक, व्यवस्थित दृष्टिकोण तथा उसमे वैज्ञानिक विश्लेषण की क्षमता होनी चाहिए । फॉरेंसिक साइंस में प्राप्त शिक्षा के आधार पर हम अध्यापक, फॉरेंसिक इंजीनियर, जेनेटिक एक्सपर्ट, फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट, फॉरेंसिक साइंटिस्ट, फॉरेंसिक इंवेस्टिगेटर, सिक्योरिटी एक्सपर्ट, फॉरेंसिक कंसलटेंट, डिटेक्टिव आदि महत्वपूर्ण पदों पर नौकरियां पा सकते है ।
बलवान शर्मे ने कहा कि योग केवल एक विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन शैली है। यह न केवल हमारे शरीर को स्वस्थ बनाता है, बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा को भी शांति और संतुलन प्रदान करता है। “पहला सुख निरोगी काया” की भावना को साकार करते हुए योग हमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है। आज के समय में जहाँ सफलता को केवल धन अर्जन से जोड़ा जाता है, वहीं यह समझना आवश्यक है कि सच्ची सफलता पुरुषार्थ, ईमानदारी और प्रभु के प्रति कृतज्ञता में निहित है। समाज के लिए कार्य करने वाले व्यक्ति को जीवन के बाद भी सम्मान और स्मरण मिलता है। एक कमजोर व्यक्ति बदले की भावना में उलझा रहता है, जबकि एक सशक्त व्यक्ति क्षमा करके आगे बढ़ता है। परिवार और समाज में पारस्परिक सहयोग, प्रेम और सम्मान अत्यंत आवश्यक है। माता-पिता से बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं होता, और परिवार के सभी रिश्तों—विशेषकर सास, ससुर और बहू के बीच—सौहार्द और समझ समाज को मजबूत बनाते हैं। योग, प्राणायाम और ‘ॐ’ का उच्चारण हमारे मन और शरीर को सुदृढ़ बनाते हैं। गहरी और लंबी सांसें हमारे शरीर में ऑक्सीजन स्तर को बढ़ाकर स्वास्थ्य को बेहतर करती हैं। योग हमारे भाव और स्वभाव में सकारात्मक परिवर्तन लाता है तथा सात्विक, राजसी और तामसिक प्रवृत्तियों के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायक होता है। अतः सभी नागरिकों से अपील है कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ, संतुलित तथा समृद्ध समाज के निर्माण में योगदान दें।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि इस प्रकार के कैंपो से छात्र-छात्राओं के आत्मविश्वास में तो वृद्धि होती ही है साथ ही उनके मन में देश और समाज को समझने और बदलने का जज्बा भी पैदा होता है । वे सृजनात्मक और रचनात्मक सामाजिक कार्यों में खुद को प्रवृत्त कर सके, स्वयं तथा समुदाय के ज्ञान में वृद्धि कर सके, समस्याओं को हल करने में स्वयं की प्रतिभा का व्यावहारिक उपयोग कर सके – यही इस कैंप का उद्देश्य है ।
डॉ राकेश गर्ग प्रोग्राम ऑफिसर ने कहा कि इस कैंप में स्वयंसेवक वित्तीय, जल संरक्षण, प्रदूषण और पर्यावरण संतुलन, स्वच्छता, लैंगिक समानता, साक्षरता, परिवार कल्याण और पोषण, महिलाओं की स्थिति एवं इसके सुधार के उपाय, आपदा राहत तथा पुनर्वास, समाज में व्याप्त बुराईयाँ, डिजिटल भारत, कौशल भारत, योग आदि जैसे विषयों पर व्यावहारिक ज्ञान एवं प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे । अपने प्रयासों से भविष्य में राष्ट्र के निर्माण में अपना स्थान और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करेंगे ।
इस अवसर पर डॉ संगीता गुप्ता, डॉ संतोष कुमारी, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ राकेश गर्ग, डॉ पवन कुमार, डॉ दीपिका अरोड़ा, प्रो मनोज कुमार, प्रो आशीष गर्ग उपस्थित रहे ।

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