महात्मा गाँधी और लाल बहादुर शास्त्री जयंती को साम्प्रदायिक सदभावना दिवस के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया
कॉलेज एनएसएस इकाइयों के युवा स्वयंसेवकों ने निकाली राष्ट्रीय सौहार्द रैली
युवाओं को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और भारत माता के सपूत लाल बहादुर शास्त्री के बताये मार्ग पर चलना चाहिए: डॉ. राकेश गर्ग, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी
BOL PANIPAT , 02 अक्टूबर.
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और देश के सपूत लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के शुभ अवसर को राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सदभावना दिवस के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ राकेश गर्ग रहे. उनके साथ कॉलेज के अन्य स्टाफ सदस्य प्रो मनोज कुमार प्रो आशीष गर्ग, प्रो डेनसन डी पॉल, प्रो सचिन, प्रो इंदु पुनिया, प्रो ममता और लगभग 100 एनएसएस कार्यकर्ता कार्यक्रम में मौजूद रहे.
एनएसएस स्वयंसेवकों ने पहल करते हुए एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राकेश गर्ग के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम की शुरुआत एनएसएस गीत के साथ हुई और उसके बाद स्वागत भाषण दिया गया। गणमान्य व्यक्तियों द्वारा गांधीजी और शास्त्रीजी को पुष्पांजलि अर्पित की गई। फिर प्रो. डेंसन को दर्शकों से परिचित कराया गया। उन्होंने गांधीजी के जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से साझा किए. उन्होंने गांधीजी और उनके भाई की बचपन की कहानी सुनाकर बताया कि कैसे गांधीजी ने सच्चा होने का फैसला किया और सरल रहना चुना। फिर उन्होंने बताया कि कैसे गांधी जी समय के बारे में निश्चित थे और कैसे उनका दिन सुबह 3:30 बजे ही शुरू हो जाता था। इस प्रकार उन्होंने छात्रों को सुबह जल्दी उठने और अपने समय का सर्वोत्तम उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों को गांधीजी के जीवन के कुछ और दिलचस्प प्रसंगों से अवगत कराया।
कार्यक्रम में एनएसएस के युवा कार्यकर्ताओं ने प्राचार्य अनुपम अरोड़ा के माध्यम से साम्प्रदायिक सदभावना की शपथ ली और फिर कॉलेज में साफ़-सफाई कर गाँधी जी के आह्वान को पूरा किया. अंत में ‘एकता और अखंडता’का भाव लिए एवं सामाजिक समरसता से औत-प्रौत युवा कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली और समाज में शान्ति और अमन का पैगाम दिया
बापू के सपनों को सभी को फिर से सजाना है,
देकर खून का कतरा-कतरा,
इस जहां को बचाना है,
बहुत गा चुके हैं हम सभी आज़ादी के गीतों को
अब हम सब को देशभक्ति का फर्ज निभाना है.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि जहाँ एक और महात्मा गाँधी देश के राष्ट्रपिता है तो वही लाल बहादुर शास्त्री देश का गौरव एवं मान है. गाँधी जी ने सत्य और अहिंसा के सहारे विश्व को शान्ति का मार्ग दिखाया. लाल बहादुर शास्त्री जी ने सादा जीवन उच्च विचार का दर्शन हर व्यक्ति को सिखाया. दोनों महापुरुष आज भी हम सभी के लिए अनुसरणीय है. गांधी जी चाहते थे कि भारत में एक समाज का निर्माण हो जहां सभी लोग बराबर हो और किसी के बीच किसी भी प्रकार का कोई मतभेद न हो. आज हम गांधी जी के विचारों को अपनाकर अपने भविष्य को संवार सकते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं. आज के विशेष दिन हमें यह शपथ लेनी चाहिए कि हम सदैव उनके विचारों को अपने जीवन में उतार कर सफलता प्राप्त करेंगे और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करेंगे. गांधी जी केवल युवाओं के लिए ही प्रेरणाश्रोत नहीं थे बल्कि दुनिया भर के महान व्यक्तित्वों के लिए भी मार्गदर्शक बने. मार्टिन लूथर किंग, नेल्सन मंडेला, जेम्स लॉसन, अल्बर्ट आईन्स्टीन जैसे कितने ही व्यक्तित्व महात्मा गांधी के विचारों के कायल हुए.
डॉ राकेश गर्ग एनएसएस अधिकारी ने लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व, जीवन दर्शन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बचपन में शास्त्री जी के पास स्कूल जाते वक्त नदी पार करने के लिए पैसे नहीं होते थे इसलिए वह तैराकी करके स्कूल जाते थे. ‘जय जवान जय किसान’ का नारा देकर उन्होनें भारत के भविष्य को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. स्वतंत्रता संग्राम में शास्त्री जी गांधी जी के साथ जेल भी गए और उस समय उनकी उम्र मात्र 17 साल थी. आजादी के बाद बतौर परिवहन मंत्री उन्होंने सार्वजनिक परिवहन में महिला ड्राइवरों और कंडक्टरों के प्रावधान की शुरुआत की. अपनी शादी में दहेज के रूप में उन्होंने केवल खादी का कपड़ा और चरखा स्वीकार किया. भारत में खाद्य उत्पादन की मांग को बढ़ावा देने के लिए ‘हरित क्रांति’ और दूध के उत्पादन को बढाने के लिए ‘श्वेत क्रान्ति’ के जनक शास्त्री जी थे. उन्होंने ही राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड बनाया और गुजरात में अमूल दूध सहकारी का समर्थन किया. शास्त्री जी दहेज प्रथा और जाति व्यवस्था के खिलाफ बहुत मुखर रहे और इनका उन्होनें घोर विरोध किया. ऐसे महान सपूत और आदर्श व्यक्तित्व को हमारा शत-शत नमन.

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