एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में मेगा रक्तदान शिविर का आयोजन।
कॉलेज एनएसएस, वाईआरसी, रोटरी क्लब पानीपत रोयल और रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत के संयुक्त तत्वाधान में हुआ आयोजन
जलियाँ वाला बाग़ हत्याकांड की तिथि पर शहीदों को श्रद्धान्जली स्वरूप हुआ इस कैंप का आयोजन
मानव जीवन रक्षा हेतु रक्तदान परमात्मा की सर्वोत्तम आराधना : गौरव रामकरण सचिव जिला रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत
रक्त की न कोई जाती न धर्म, यह समाज सेवा का सर्वश्रेष्ठ साधन: पवन गोयल
BOL PANIPAT , 13 अप्रैल. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस और वाईआरसी इकाइयों, रोटरी क्लब पानीपत रोयल और जिला रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत के संयुक्त तत्वाधान में मेगा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया जिसमे कॉलेज के एनएसएस एवं वाईआरसी कार्यकर्ताओं, छात्र-छात्राओं एवं स्टाफ सदस्यों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और 175 यूनिट रक्त का दान किया. रक्तदान शिविर की विधिवत शुरुआत शिविर के मुख्य अतिथि और जिला रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत के सचिव गौरव रामकरण ने की. अतिविशिष्ट मेहमान के तौर पर एसडी पीजी कॉलेज प्रधान पवन गोयल उप-प्रधान मनोज सिंगला, जनरल सेक्रेटरी तुलसी सिंगला और कोषाध्यक्ष बिकुल बिंदल उपस्थित रहे. इस पावन अवसर पर रोटरी क्लब पानीपत रोयल के असिस्टेंट गवर्नर विनोद धमीजा और असिस्टेंट गवर्नर अजय मलिक, प्रधान ज्योति अग्रवाल, सचिव अंजलि गोयल और प्रोजेक्ट निदेशक विनीत शर्मा एवं अर्चना शर्मा, जिला प्रशिक्षण अधिकारी जतिन कुमार, रेड क्रॉस ब्लड बैंक से डॉ पूजा सिंघल और अन्य मेडिकल अधिकारियों ने रक्त को एकत्रित करने का दायित्व संभाला और रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाया. माननीय मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कॉलेज एनएसएस प्रभारीडॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने किया.विदित रहे कि एसडी पीजी कॉलेज विगत कई वर्षों से रक्तदान शिविरों का नियमित आयोजन करता आ रहा है और इस एकत्रित रक्त का इस्तेमाल भारतीय सेना, गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों तथा दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को बचाने के लिए किया जायेगा.
मेगा-रक्तदान शिविर में रक्तदान करने वाले छात्र-छात्राओं को रिफ्रेशमेंट, गिफ्ट और प्रमाण पत्र वितरित किये गए. बैसाखी के अवसर पर गृह विज्ञान विभाग ने प्रो गीता प्रुथी और प्रो तन्नु मेहता की अगुआई में छात्राओं को ग्रामीण परिवेश में तैयार होने वाले व्यंजनों बारे प्रशिक्षण दिया और उनमे देश भक्ति की अलख जगाई.
ज्ञात हो कि आज ही के दिन भारतीय इतिहास की वो घटना जिसके बारे में सोचने पर ही रूह कांप जाती है घटित हुई थी. जलियांवाला बाग हत्याकांड की दुखद घटना 13 अप्रैल 1919 को घटी थी जब अमृतसर (पंजाब) में स्वर्ण मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित जलियांवाला बाग में निहत्थे मासूमों का कत्लेआम हुआ. बेशक आज इस नरसंहार को पूरे 104 साल बीत चुके हैं लेकिन इसके जख्म आज भी हमारे मनों में ताजा हैं और इस दर्दनाक और दुख से भरे दिन को भारत के इतिहास की काली घटना के रूप में याद किया जाता है. आज का शिविर इन्ही वीर शहीदों की याद में लगाया गया.
गौरव रामकरण सचिव जिला रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत ने रक्तदान को महादान बताते हुए कहा कि एक वयस्क पुरुष एवं स्त्री में 5 से 6 लीटर तक रक्त होता है और कोई भी व्यक्ति हर तीन महीने में एक बार रक्तदान कर सकता है. उन्होंने कहा कि 450 मिली रक्त से तीन लोगों का जीवन बचाया जा सकता है. भारत में प्रत्येक दो सेकंड में किसी न किसी व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता होती है परन्तु दुखद पहलू यह है कि भारत में रक्तदान योग्य व्यक्तियों में से सिर्फ चार प्रतिशत लोग ही रक्तदान करते हैं. उन्होंने इस कैंप में रक्तदान करने वाले हर युवा की प्रशंसा की और कहा कि रक्तदान करने के बाद किसी का जीवन बचने से हम मे आत्मसंतोष की दैवीय भावना उत्पन्न होती है. उन्होंने कहा कि मानव जीवन की रक्षा हेतु रक्तदान परमात्मा की सर्वोत्तम साधन है.

पवन गोयल प्रधान ने रक्तदान के महत्व पर बोलते हुए कहा कि रक्त हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है. रक्त का विकल्प केवल और केवल रक्त ही है. बढ़ती दुर्घटनाओं के मद्देनजर आज रक्त की मांग में काफी वृद्धि हुई है. हस्पताल भी रक्त के बगैर कुछ नहीं कर सकते है. रक्तदान करके हम चिकित्सकों के काम में काफी मदद कर सकते है. उन्होंने कहा कि रक्तदान के हमारे शरीर को कई फायदे भी होते हैं. जब हम रक्तदान करते हैं तो हमारे खुद के शरीर में कैंसर जैसी कई बीमारियों के खतरे कम हो जाते है. रक्तदान से लिवर और पाचन ग्रंथि भी तंदुरुस्त रहती है और दिल का स्वास्थ्य काफी अच्छा रहता है. रक्तदान से लाखों जानें बच सकती हैं और रक्त उपलब्ध रहे तो किसी का भी जीवन बचाया जा सकता है. रक्तदान करने से नयी रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में वृद्धि होती है. नियमित रक्तदान करने वाला व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर सहजता से रक्त पा भी सकता है. उन्होनें कहा कि रक्तदान के मिथकों और भ्रांतियों को तोड़ कर ही हम रक्तदान करने के भय से मुक्त हो सकते है. उन्होंने कहा कि रक्त की न कोई जाति और धर्म नहीं होता है बल्कि यह समाज सेवा करने का सर्वश्रेष्ठ साधन है.
डॉ अनुपम अरोड़ा प्राचार्य ने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ब्लड डोनेशन कैंप को आयोजित करने का मूल उद्देश्य सामान्य जन में असामान्य दैवीय भावों को उत्पन्न करना है. रक्तदान शिविर के माध्यम से छात्र-छात्राए खुद को देश और समाज से जुड़ाहुआ महसूस करते है. इसके साथ-साथ उनके द्वारा दिया गया रक्त किसी दुर्घटना के शिकार व्यक्ति की जान बचाने में तथा किसी बीमार की मदद में सहायक सिद्ध होता है. मानवता से भरे इस नेक कार्य जैसा पुनीत कार्य अन्यत्र कोई नहीं है.
डॉ राकेश गर्ग एनएसएस अधिकारी और वाईआरसी प्रभारी ने कहा कि रक्तदान को लेकर आज भी लोगों के मन में कई सारी गलत धारणाएं मौजूद हैं. परन्तु इसके फायदों के बारे में आज भी सही बात हमें पता ही नहीं है. नियमित रक्तदान वजन घटाने में हमारी मदद करता है, हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, हृदय रोग के खतरे को कम करता है, कैंसर की संभावना को घटाता करता है और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने में भी अत्यधिक मददगार साबित होता है.
रक्तदान शिविर में डॉ मुकेश पुनिया, डॉ एसके वर्मा, दीपक मित्तल तथा अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे.

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