बोर्ड परीक्षाओं में पानीपत का परिणाम सुधारने के लिए ‘मिशन सफलता’ लागू
शून्य प्रतिशत परिणाम वाले स्कूलों को खत्म करने और 100 प्रतिशत परिणाम देने वाले विद्यालयों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य, हर शनिवार टेस्ट और कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष कक्षाएं
BOL PANIPAT, 3 नवम्बर। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की आगामी वार्षिक परीक्षाओं (सत्र 2026-27) में दसवीं एवं बारहवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग ने ‘मिशन सफलता’ की कार्ययोजना लागू की है। प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया के दिशा-निर्देशों के तहत जिला शिक्षा अधिकारी नीलम कुंडू के नेतृत्व में शुरू किए गए इस अभियान का लक्ष्य जिले में किसी भी सरकारी स्कूल का परिणाम शून्य प्रतिशत नहीं रहने देना तथा शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले विद्यालयों की संख्या दोगुनी करना है।
अतिरिक्त उपायुक्त अंकित कुमार चौकसे ने कहा कि जिला प्रशासन का संकल्प है कि पानीपत का कोई भी सरकारी विद्यालय शून्य परिणाम की श्रेणी में न रहे। कमजोर विद्यार्थियों की समय रहते पहचान कर उनके लिए विशेष कक्षाएं लगाई जाएंगी तथा कमजोर परिणाम वाले विद्यालयों की नियमित निगरानी की जाएगी।
कार्ययोजना के तहत स्कूलों को अर्धवार्षिक परीक्षा परिणाम के आधार पर रेड (50 प्रतिशत से कम), येलो (50 से 80 प्रतिशत) और ग्रीन (80 प्रतिशत से अधिक) जोन में बांटा गया है। रेड जोन के विद्यालयों तथा प्रत्येक ब्लॉक के तीन सबसे कमजोर स्कूलों के लिए 30 दिन की विशेष सुधार योजना लागू होगी। जिला शिक्षा अधिकारी एवं DIET की टीम प्रत्येक 15 दिन में इन स्कूलों की समीक्षा और मेंटरिंग करेगी।
दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों का प्रत्येक शनिवार बोर्ड पैटर्न पर टेस्ट लिया जाएगा। इसके बाद उत्तर-पुस्तिकाओं का विश्लेषण कर गलतियों को दूर करवाया जाएगा और पुन: टेस्ट लिया जाएगा। 50 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य उपचारात्मक कक्षाएं संचालित होंगी, जबकि मेधावी विद्यार्थियों को 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने के लिए HOTS आधारित अभ्यास करवाया जाएगा।
बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक जनवरी 2027 से परीक्षा समाप्ति तक ‘जीरो इंटरप्शन पीरियड’ लागू रहेगा। इस दौरान बोर्ड कक्षाओं में गणतंत्र दिवस समारोह को छोडक़र गैर-शैक्षणिक गतिविधियां नहीं होंगी तथा संबंधित शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से मुक्त रखा जाएगा। विषय अध्यापकों की कमी वाले विद्यालयों में डिजिटल माध्यमों और विजिटिंग टीचर की सहायता से पढ़ाई करवाई जाएगी।
मिशन की निगरानी के लिए प्रत्येक खंड शिक्षा अधिकारी को प्रतिमाह कम से कम 10 विद्यालयों का औचक निरीक्षण करना होगा। निरीक्षण में विद्यार्थियों की उपस्थिति, विशेष कक्षाओं, टेस्ट परिणाम और शिक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। लापरवाही मिलने पर संबंधित विद्यालय मुखिया अथवा शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नीलम कुंडू ने कहा कि मिशन का उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी शैक्षणिक क्षमता के अनुरूप आगे बढऩे का अवसर देना है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों से सरकारी विद्यालयों के बोर्ड परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है।

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