एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयों ने राष्ट्रीय बालिका दिवस कन्या भागीदारी के रूप में मनाया
–स्वयंसेवकों और छात्र-छात्राओं ने ली समाज से बुराइयों और भेदभाव के खात्मे की शपथ
–जब हर क्षेत्र में बालिकाएं आगे, तो फिर क्यों हम बालिकाओं से भागें: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT, 24 जनवरी, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एन.एस.एस. इकाई के तत्वाधान में राष्ट्रीय बालिका दिवस पुरे जज़्बे और सम्मान भाव के साथ मनाया गया । प्रत्येक वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस एक उत्सव के रूप में देश की लड़कियों और महिलाओं को समर्थन देने और नए अवसर प्रदान करने के लिए मनाया जाता है । हाल ही में केन्द्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कॉलेज में पधारकर बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान को गति प्रदान की थी । इसी श्रृंखला में राष्ट्रीय बालिका दिवस नारी शक्ति का प्रतीक है । इसी शुभ अवसर के दिन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कॉलेज के स्वयंसेवकों और छात्र-छात्राओं को समाज से विविध बुराइयों को खत्म करने के लिए शपथ दिलाई गयी और बालिकाओ को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने की शुभकामना दी गयी । प्राचार्य के साथ कॉलेज एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ पवन कुमार, डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो मनोज कुमार और प्रो विशाल गर्ग उपस्थित रहे । इस अवसर पर बालिका चेतना रैली का आयोजन किया गया जिसमे छात्राओं ने हाथ में प्लाकार्ड उठाये जिनपर ‘मैं शिक्षित हूँ, मैं समर्थ हूँ और मैं देश का गौरव हूँ’, ‘बेटी बोझ नहीं सम्मान है, हम सभी का मान है’, ‘बेटी है शक्ति स्वरूप करती है हर घर को रोशन’ जैसे सन्देश लिखे हुए थे ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि आज चाहे खेल का हो मैदान हो या राजनीति, घर हो या उद्योग हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी छाप छोड़ी है । देश सेवा के हर क्षेत्र में लड़कियाँ समान रूप से भागीदारी कर रही है । उन्होनें कहा कि जब हर क्षेत्र में बालिकाएं आगे, तो फिर क्यों हम बालिकाओं से भागें । सरकार की इतनी योजनाओ के बाद आज भी बालिकाए अनेक कुरीतियों का शिकार हैं और यही कुरीतिया उनके आगे बढ़ने में बाधाएँ उत्पन्न करती है । पढ़े-लिखे लोग और जागरूक समाज भी इस समस्या से अनजान नहीं है । आज भी हज़ारों लड़कियों को जन्म लेने से पहले मार दिया जाता है और आज भी समाज में ऐसे लोग व्याप्त हैं जो अपनी बेटियों को बेटों की तरह नहीं पालते है । लड़कियों के आगे न बढ़ने का एक कारण यह भी है कि अकसर घरों में लड़की को अपने छोटे भाई-बहनों की देखभाल करने का जिम्मा दे दिया जाता है । उनको इस प्रकार से बाँध देना उनके खुद के सुधार में बाधक बन जाता है । इन्हीं सब स्थितियों और भेदभावों को मिटाने का काम ‘बालिका दिवस’ मनाने का मूल उद्देश्य है ।
कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल ने अपने सन्देश में कहा कि राष्ट्रीय बालिका दिवस को सच्चे अर्थो में तभी मनाया जा सकेगा जब हम लड़का-लड़की में भेद करना त्याग देंगे और समाज के लोगों को लिंग समानता के बारे में अधिक जागरूक कर पायेंगे । वर्तमान में देश में लड़कियों की संख्या निरंतर घट रही है और यह किसी आपदा से कम नहीं है । ऐसी कठिन परिस्थिति के कारण ही हम राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाते है । समाज में आज भी बालक और बालिकाओं में भेदभाव किया जा रहा है और यही कारण है कि कुछ लोग बालिकाओं को जन्म लेने से पहले ही खत्म कर देते है । वक़्त आ गया है हम सभी मिलकर इस कुरीति को मिटाए ।
डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि बाल विवाह व भ्रूण हत्या को रोकना, शिशु मृत्यु दर रोकना, नियमित टीकाकरण के प्रति सभी को जागरूक करना, दहेज प्रथा एवं अन्य सामाजिक समस्याओं में सुधार लाना ही इस उत्सव को मनाने का उद्देश्य है । राष्ट्रीय बालिका दिवस हमें लड़का-लड़की में भेद नहीं करने तथा समाज के लोगों को लिंग समानता के बारे में जागरूक करने का दिवस है ।
कार्यक्रम में यह शपथ बालिकाओ को दिलाई गई: ‘हम शपथ लेते है कि हम अपने जीवन में आने वाले सभी अवरोधों को पार करते हुए उच्चशिक्षा के ध्येय को प्राप्त करेंगे, अपने गाँव या नगर में बेटी बचाओ-बेटी पढाओ के अभियान की सफलता के लिए स्वयं भी प्रयास करेंगे और दूसरो को भी जागरूक व प्रेरित करेंगे तथा महिला सशक्तिकरण के माध्यम से सशक्त भारत का निर्माण करेंगे ।

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