पंजाब और हरियाणा में वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध हैं: नितिन कुमार यादव
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने चंडीगढ़ में हितधारक संवाद आयोजित किया. पंजाब और हरियाणा के उद्योग एवं किसानों को भारत की नई एफटीए संरचना के अंतर्गत विशाल निर्यात अवसरों से अवगत कराया.
श्री नितिन कुमार यादव ने चंडीगढ़ में एपीडा (APEDA) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया
BOL PANIPAT : चंडीगढ़, 9 जून 2026: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने चंडीगढ़ में एक उच्च-स्तरीय हितधारक संवाद आयोजित किया, जिसका उद्देश्य पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों, उद्योग संगठनों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसानों तथा सरकारी अधिकारियों को भारत के तेजी से विस्तारित हो रहे मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नेटवर्क द्वारा उपलब्ध कराए गए व्यापक निर्यात अवसरों के प्रति जागरूक करना था। इस संवाद का उद्देश्य विशेष रूप से वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद, कृषि, औषधि एवं रसायन क्षेत्रों में क्षेत्र की निर्यात क्षमता को नई बाजार पहुंच संरचना के माध्यम से ठोस व्यापारिक परिणामों में परिवर्तित करना था।
वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री नितिन कुमार यादव ने “कृषि उत्पादों के निर्यात संवर्धन एवं हरियाणा तथा पंजाब राज्य के निर्यातकों एवं अन्य हितधारकों के साथ बैठक” विषय पर एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय का भी उद्घाटन किया। इसी प्रकार, एपीडा के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव ने क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ के उद्घाटन में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्रीय कार्यालय पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में कृषि निर्यात के क्षेत्र में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।
मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करते हुए श्री नितिन कुमार यादव ने कहा, “पिछले एक दशक में भारत के कुल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसमें वस्तु एवं सेवा निर्यात को मिलाकर कुल निर्यात वित्त वर्ष 2014-15 के 468 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में सर्वकालिक उच्च स्तर 863 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो 5.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) को दर्शाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “इस अवधि के दौरान वस्तु निर्यात 310 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 442 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, सेवा निर्यात 158 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 421 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें 9.3 प्रतिशत की सीएजीआर दर्ज की गई तथा गैर-पेट्रोलियम निर्यात 387.9 अरब अमेरिकी डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया, जो भारत के निर्यात आधार की गहराई और विविधता को रेखांकित करता है।”
संवाद के दौरान प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि नए एफटीए वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा औषधि क्षेत्रों में सभी टैरिफ लाइनों पर 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करते हैं — जो पंजाब और हरियाणा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने कई ऐतिहासिक व्यापार समझौते संपन्न किए हैं, जो देश को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के केंद्र में स्थापित करते हैं। भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए, 2025), जो 100 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रतिबद्धता द्वारा समर्थित है, भारत के लगभग 98 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि 27 उच्च-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं को शामिल करने वाला भारत-यूरोपीय संघ एफटीए (2026), मूल्य के आधार पर द्विपक्षीय व्यापार के 99 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क रियायतों के माध्यम से भारतीय निर्यात के 3.2 लाख करोड़ रुपये मूल्य को लाभान्वित करने की अपेक्षा रखता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौता (सीईसीपीए) (2021) तथा भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) मिलकर इन बाजारों में भारत के 99 प्रतिशत निर्यात को शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान करते हैं, जबकि यूएई के साथ द्विपक्षीय व्यापार पहले ही 80 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ‘मिशन 500’ पहल के अंतर्गत एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा समझ विकसित की, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से अधिक बढ़ाकर 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से भारत के नौ एफटीए अब 38 देशों को कवर करते हैं और लगभग 70 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी तक पहुंच प्रदान करते हैं।
श्री नितिन कुमार यादव ने आगे कहा, “पंजाब के लिए वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध हैं। हरियाणा के लिए प्रमुख निर्यात उत्पादों में बासमती चावल, भैंस का मांस, गैर-बासमती चावल, प्राकृतिक शहद, डेयरी उत्पाद तथा विविध खाद्य तैयारियाँ शामिल हैं, जबकि औषधि एवं रसायन क्षेत्रों में भी बढ़ती संभावनाएं हैं। नए एफटीए के अंतर्गत सभी प्रमुख क्षेत्रों में निर्यातकों को उपलब्ध बाजार पहुंच रियायतों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया।”
भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की निदेशक श्रीमती मोनिका गौर ने अपनी प्रस्तुति में दोनों राज्यों में मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत विकसित महत्वपूर्ण निर्यात अवसंरचना की जानकारी दी। पंजाब में निर्यातकों को अवसंरचना उन्नयन सहायता का लाभ मिला है; अमृतसर हवाई अड्डे (एएआई) पर पैकहाउस एवं गुणवत्ता अनुपालन सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है ताकि शीघ्र नष्ट होने वाले उत्पादों के परिवहन समय को कम किया जा सके तथा हॉर्टिकल्चर फसलों के लिए किसान एवं खेत पंजीकरण को हॉर्टीनेट ट्रेसबिलिटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ किया गया है।
हरियाणा में बासमती नेट और हॉर्टीनेट प्रणालियों को एकीकृत किया गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, मार्च 2026 में भारतीय पैकेजिंग संस्थान के सहयोग से एक सप्ताह का पैकेजिंग उत्कृष्टता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय पैकेजिंग मानकों, निर्यात दस्तावेजीकरण तथा लेबलिंग आवश्यकताओं को शामिल किया गया।
क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण निर्यात मील के पत्थरों को भी रेखांकित किया गया। इनमें अबोहर से सिंगापुर और रूस के लिए किन्नू की परीक्षण खेपें (जनवरी 2025); डेराबस्सी से ‘कॉर्न ट्रूपर’ ब्रांड के अंतर्गत दक्षिण कोरिया को भारत का पहला रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न निर्यात (जनवरी 2025); पठानकोट से कतर और यूएई को ताज़ी लीची (जून 2025); संगरूर से कनाडा को मूल्य संवर्धित बाजरा उत्पाद (जून 2025); हरियाणा से मेडागास्कर को फोरेज्ड राइस कर्नेल्स (7,000 मीट्रिक टन); तथा सोनीपत के अटेरना गांव से टोरंटो, कनाडा के लिए सोया चाप का पहला किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) निर्यात शामिल हैं।
भारत ने दुबई में आयोजित गुलफूड 2026 में आधिकारिक भागीदार देश के रूप में भाग लिया तथा जर्मनी में आयोजित बायोफाख 2026 में ‘कंट्री ऑफ द ईयर’नामित किया गया, जिससे क्षेत्र के कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान प्राप्त हुई। श्री नितिन कुमार यादव ने कहा कि भारत का कृषि निर्यात कैलेंडर वर्ष 2014 के 40.95 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर कैलेंडर वर्ष 2024 में 52.76 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि कृषि-समुद्री-खाद्य निर्यात वर्ष 2025-26 में 4.3 लाख करोड़ रुपये को पार कर 206 देशों तक पहुंच गया है।
इसी प्रकार, इस अवसर पर हरियाणा और पंजाब से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर केंद्रित एक उच्च-स्तरीय हितधारक संवाद भी आयोजित किया गया। हितधारकों को निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसे 12 नवंबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किया गया था। इस मिशन का कुल बजटीय परिव्यय वित्त वर्ष 2025-26 से छह वर्षों के लिए 25,060 करोड़ रुपये है, जिसे वाणिज्य विभाग, एमएसएमई मंत्रालय और वित्त मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया जा रहा है। ईपीएम दो उप-योजनाओं के माध्यम से संचालित होता है: निर्यात प्रोत्साहन’, जो एमएसएमई क्षेत्र में व्यापार वित्त अंतर को पाटने के लिए प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट ऋण पर ब्याज सहायता, निर्यात फैक्टरिंग, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड तथा संपार्श्विक (कोलेटरल) सहायता प्रदान करता है। ‘निर्यात दिशा’, जो गैर-टैरिफ बाधाओं, निर्यात गुणवत्ता अनुपालन, बाजार पहुंच, निर्यात भंडारण, कम निर्यात तीव्रता वाले जिलों के लिए अंतर्देशीय परिवहन सहायता तथा ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग से संबंधित चुनौतियों का समाधान करता है। यह मिशन बिखरी हुई योजनाओं से हटकर एक व्यापक, डिजिटल-संचालित ढांचे की दिशा में एक रणनीतिक परिवर्तन का प्रतीक है, जो विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
एपीडा, चंडीगढ़ के क्षेत्रीय प्रमुख श्री हरप्रीत सिंह ने कहा कि इस संवाद ने पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसानों और एमएसएमई को भारत की नई एफटीए संरचना का लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया है। मंत्रालय ने हितधारकों से आग्रह किया कि वे उत्पाद-विशिष्ट निर्यात तैयारी योजनाएं तैयार करें, एपीडा की वित्तीय सहायता एवं ट्रेसबिलिटी प्लेटफॉर्म का उपयोग करें तथा निर्यात संवर्धन मिशन के ढांचे के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप अपनी वैश्विक उपस्थिति का विस्तार करें।

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