आई.बी. महाविद्यालय, पानीपत में हवन-यज्ञ के साथ नए सत्र का शुभारंभ
BOL PANIPAT । आई.बी.महाविद्यालय, पानीपत में नए शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रबंध समिति के महासचिव एल.एन. मिगलानी , उपप्रधान आई. बी. एल. एजुकेशनल सोसाइटी परम वीर ढींगरा, कोषाध्यक्ष रवि गोसाईं , प्रबंधक आई. बी. एल. पब्लिक स्कूल युधिष्ठर मिगलानी , सदस्य रमेश नागपाल , अशोक मिगलानी , महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह, उप-प्राचार्या डॉ. शशि प्रभा , शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और हवन में आहुतियां अर्पित कीं।
इस अवसर पर प्रबंध समिति के महासचिव एल.एन. मिगलानी ने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ पर हवन-यज्ञ का आयोजन हमारे महाविद्यालय की वर्षों पुरानी एवं गौरवशाली परंपरा है। हवन-यज्ञ के माध्यम से हम ईश्वर से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं समस्त महाविद्यालय परिवार के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हैं। उन्होंने कहा कि हवन हमें सकारात्मक सोच, शांति, अनुशासन और सामूहिक सद्भाव का संदेश देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे नए सत्र में पूरे उत्साह और लगन के साथ अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ें तथा शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कारों और मानवीय मूल्यों को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ पर आयोजित हवन-यज्ञ महाविद्यालय की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है। हवन-यज्ञ भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। यह हमें शांति, सकारात्मकता, अनुशासन, एकाग्रता, प्रकृति के प्रति सम्मान तथा सामूहिक सद्भाव का संदेश देता है। हवन के माध्यम से सभी विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय परिवार के उज्ज्वल भविष्य, सुख-समृद्धि और सफलता की मंगलकामना की गई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हवन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि यह हमारे संस्कारों, सकारात्मक जीवन-दृष्टि एवं भारतीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की परंपराएं हमें अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच एवं सामूहिक सद्भाव की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक एवं Artificial Intelligence (AI) के युग के लिए तैयार रहने का संदेश देते हुए कहा कि आज का समय तेजी से बदल रहा है। विद्यार्थियों को नई तकनीकों को सीखना और उनका रचनात्मक एवं जिम्मेदार उपयोग करना चाहिए,| उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान एवं तकनीकी दक्षता के साथ अपने संस्कारों और मानवीय मूल्यों को भी बनाए रखना भी अत्यंत आवश्यक है । उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी कहा कि कॉलेज के ये तीन वर्ष केवल डिग्री प्राप्त करने के वर्ष नहीं हैं, बल्कि उनके पूरे जीवन की नींव रखने वाले वर्ष हैं। इन वर्षों में प्राप्त ज्ञान, विकसित कौशल, अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच ही उनके आने वाले जीवन और करियर को दिशा प्रदान करेंगे । उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा “हर दिन कुछ नया सीखिए, अपने सपनों को बड़ा रखिए और मेहनत को अपनी आदत बनाइए। असफलताओं से घबराइए नहीं, क्योंकि हर चुनौती आपको पहले से बेहतर बनने का अवसर देती है। आज आप जो सीख रहे हैं और जो बन रहे हैं, वही आपके आने वाले कल की पहचान बनेगा।” उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ खेल, सांस्कृतिक, रचनात्मक एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है, ताकि वे ज्ञानवान होने के साथ-साथ जिम्मेदार, आत्मनिर्भर और संवेदनशील नागरिक बन सकें।
हवन-यज्ञ के साथ ही महाविद्यालय में प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की कक्षाएं भी प्रारंभ हो गई हैं। इस अवसर पर नए विद्यार्थियों का महाविद्यालय परिवार में स्वागत करते हुए उन्हें नए शैक्षणिक सत्र के लिए शुभकामनाएं दी गईं।”
हवन-यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात सभी उपस्थितजनों को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Comments