एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस यूनिट्स ने सारगर्भित भाव के साथ खादी महोत्सव को मनाया
भारत सरकार के निर्देशानुसार 2 से 31 अक्टूबर के दौरान पूरे देश में मनाया जा रहा है खादी महोत्सव
एनएसएस स्वयंसेवकों ने खादी आश्रम पानीपत का किया दौरा और निकाली खादी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने हेतू जागरूकता रैली
खादी हमारी आत्मनिर्भरता, गौरव और स्वतंत्रता का प्रतीक है: निर्मल दत्त चेयरपर्सन खादी आश्रम पानीपत
BOL PANIPAT , 26 अक्टूबर.
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस यूनिट्स ने भारत सरकार के निर्देशानुसार खादी महोत्सव को पूरे आदर और सारगर्भित भाव के साथ मनाया । कॉलेज एनएसएस यूनिट्स के लगभग 150 स्वयंसेवकों ने न सिर्फ खादी आश्रम पानीपत का दौरा किया बल्कि खादी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने हेतू जागरूकता रैली निकाली । खादी आश्रम की चेयरपर्सन निर्मल दत्त, ट्रस्टी अजीत पाल और ऑफिस सेक्रेटरी जगदीप चंद ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और उन्हें खादी आश्रम का भ्रमण करवाया । कॉलेज में खादी महोत्सव अभियान और राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जीवन और विचारों से जुड़े विषयों पर क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और पूजा (बीए तृतीय) और विशाल मित्तल (बीए प्रथम) की टीम ने बाजी मार प्रथम स्थान हासिल किया । सम्पूर्ण कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, एनएसएस अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी और डॉ संगीता गुप्ता की अगुआई में हुआ । विदित रहे कि खादी स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रपिता का वस्त्र है । महात्मा गांधी ने बेरोजगार ग्रामीण आबादी को रोजगार प्रदान करने के साधन के रूप में खादी की अवधारणा विकसित की थी । इसी अवधारणा को हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन’ का मंत्र और खादी को एक नया आयाम दिया है । इस अवसर पर प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने खादी के प्रचार और प्रसार की ‘खादी शपथ’ स्वयंसेवकों को दिलाई । खादी आश्रम पानीपत पहुंचकर प्रफुल्लित एनएसएस स्वयंसेवकों ने चरखा चलाना सीखा और गांधी संग्रहालय एवं लाइब्रेरी जाकर बापू के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया ।

निर्मल दत्त चेयरपर्सन ने कहा कि खादी एक प्राकृतिक, हस्तनिर्मित कपड़ा है जो भारत में प्राचीन काल से बुना जाता रहा है । यह कपड़ा अपने गुणों के लिए जाना जाता है जिसमें आराम, टिकाऊपन और पर्यावरण मित्रता शामिल हैं । खादी को अक्सर भारत की राष्ट्रीय पहचान के प्रतीक के रूप में देखा जाता है । खादी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । महात्मा गांधी ने सैदेव खादी को आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता का प्रतीक माना है । उन्होंने भारतीयों को खादी पहनने के लिए प्रोत्साहित किया । वर्तमान में खादी भारत की आर्थिक प्रगति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है । खादी का उत्पादन ग्रामीण विकास को बढ़ावा देता है और बेरोजगारी को भी कम करने में मदद करता है । खादी को बढ़ावा देने से भारत के कपड़ा उद्योग में आत्मनिर्भरता बढ़ गई है ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि ‘खादी महोत्सव’ खादी और ग्रामोद्योग, हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों, ओडीओपी उत्पादों और स्थानीय स्तर पर निर्मित विभिन्न पारंपरिक और कुटीर उद्योगों के उत्पादों को बढ़ावा देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान एवं ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के विचार को गति देने के उद्देश्य शुरू किया गया है । यह अभियान 2 से 31 अक्टूबर के दौरान पूरे देश में मनाया जा रहा है । कॉलेज के एनएसएस स्वयंसेवकों ने जिस तरह से खादी के प्रचार और प्रसार का बीड़ा अपने युवा कन्धों पर उठाया है उसे देखकर वे गद-गद है । खादी हमारी परम्पराओं, मूल्यों, संस्कृति और संस्कारों का प्रतिरूप है । डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि कपड़े हमेशा से इंसान की पहचान का अभिन्न अंग रहे हैं । कपड़ों ने न केवल व्यक्तियों को परिभाषित किया है बल्कि अक्सर उन्हें विशेष समूहों, समुदायों, कस्बों और यहां तक कि देशों की पहचान के रूप में भी देखा जाता है । हम जैसा पहनते हैं उससे जुड़े विचार हमारे व्यक्तित्व में समा जाते है । गांधी जी की खादी को भारतीय स्वतंत्रता का कपड़ा कहा गया है और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका वाकई में महत्वपूर्ण रही है । आज खादी का बढ़ता उत्पादन एवं प्रयोग ग्रामीण विकास को बढ़ावा दे रहा है और इससे बेरोजगारी को कम करने में मदद मिल रही है । खादी के उत्पादन से पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई है । हमें खादी के कपड़ों को कम दामों पर अधिक से अधिक उपलब्ध कराना चाहिए । तभी आमजन खादी का अपने जीवन में उपयोग कर पायेगा और देश का भविष्य उज्जवल होगा ।

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