एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 194वीं जयंती के अवसर पर स्त्री शक्ति दिवस संगोष्ठी का आयोजन.
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् पानीपत ने स्वाधीनता अमृत महोत्सव के शुभ अवसर पर किया आयोजन
अदम्य साहस, समर्पण और नारी शक्ति की मिसाल थीं महारानी लक्ष्मीबाई: डॉ बालकिशन शर्मा
BOL PANIPAT , 19 नवम्बर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 194वीं जयंती के अवसर पर स्त्री शक्ति दिवस संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमे बतौर मुख्य अतिथि एवं वक्ता एसडी पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व-विभागाध्यक्ष एवं जनकवि मेहर सिंह पुरस्कार से अलंकृत डॉ बालकिशन शर्मा ने शिरकत की. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अरमान कोहली विभाग संयोजक सोनीपत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् रहे. डॉ संगीता गुप्ता विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग एवं नगर संयोजक एबीवीपी पानीपत, डॉ सुशीला बेनीवाल विभागाध्यक्ष शारीरिक शिक्षा विभाग, डॉ एसके वर्मा, प्रो जुगमती सांगवान और प्रो किरण मलिक ने संगोष्ठी में हिस्सा लेकर छात्राओं का मार्गदर्शन किया. मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने तुलसी रोपित गमले भेंट करके किया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 194वीं जयंती के अवसर पर स्त्रियों की दशा और दिशा को तय करना तथा आज के समय की छात्राओं को जागरूक करना था. विदित रहे कि झाँसी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख केन्द्र बना था जिसमे रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी की सुरक्षा को सुदृढ़ किया था और एक स्वयंसेवक सेना के गठन की शुरुआत की थी. उनसे प्रेरणा पाकर ही साधारण जनता ने इस संग्राम में भरपूर सहयोग किया. रानी लक्ष्मीबाई आज की महिलाओं के लिए एक आदर्श का प्रतीक है. जनकवि मेहर सिंह पुरस्कार से अलंकृत डॉ बालकिशन शर्मा पूर्व-विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग ने कहा कि छात्राओं को चाहिए की वे जीवन में त्याग और समर्पण के गुण अपनी खुद की माँ से सीखे. जैसा आचरण वे अपने खुद के घर में करती है वैसा ही आचरण उन्हें अपनी ससुराल में भी करना चाहिए. अन्याय को कभी सहन नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें हर प्रकार के अन्याय का विरोध करना चाहिये. आज की छात्राओं को महारानी लक्ष्मीबाई के जीवन से प्रेरणा लेने की जरुरत है. ‘चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव को मिली भवानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी’ पंक्तियों को गाकर डॉ बालकिशन ने पुरे माहौल को देश भक्ति के भाव से भर दिया. उन्होनें कहा कि हमें हज़ारों पुस्तकें पढ़ने की बजाये किसी एक महान पुरुष की जीवनी और विचारों को जानकार उन्हें अपने जीवन में उतारना चाहिए.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि अच्छी शिक्षा और तकनीकी प्रचार-प्रसार के फलस्वरूप अब भारतीय नारी की स्थिति में सुधार आया है और वह अब पुरुषों से कम नहीं हैं. महिलाएं कई गुणों में तो पुरुषों से भी आगे है. त्याग, समर्पण और धैर्यशीलता में महिलाओं का कोई सानी नहीं है. इन्दिरा गाँधी, कल्पना चावला, प्रतिभा देवीसिंह पाटिल, सरोजिनी नायडू, किरण बेदी. न्यायमूर्ति एम. फातिमा बीवी, पुनीता अरोड़ा, मीरा कुमार, एनी बेसेंट इत्यादि जैसी कितनी ही महिलाएं है जो हम सब के लिए मिसाल और प्रेरणा का श्रौत है. महिलाएं देश का गौरव है और बिना इनके सामान के देश आगे नहीं बढ़ सकता.
डॉ संगीता गुप्ता विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग ने महिला सशक्तिकरण और महारानी लक्ष्मीबाई के इतिहास और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला. ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देव’ अर्थात मनुस्मृति के इस श्लोक में बताया गया है कि जहाँ नारी की पूजा होती है वही देवताओं का वास होता है. दुःख की बात यह है कि आज यह बात केवल नाम मात्र रह गयी है. यदि हमने नारी को सम्मान देना है तो सबसे पहले हमे खुद को बदलना होगा. हम बदलेंगे तभी युग बदलेगा. उन्होनें कहा कि हमें शपथ लेनी चाहिए कि हम जहाँ भी रहेंगे वहां अपने आस-पास की स्त्रियों को पूरा सम्मान देंगे और उनके सम्मान के लिए अपनी जान तक देने में संकोच नहीं करेंगे. अगर यह सोच सभी लोगों में आ जायेगी तो हम सही मायने में इस महान भारत देश के निवासी बन पायेंगे.
डॉ सुशीला बेनीवाल विभागाध्यक्ष शारीरिक शिक्षा विभाग ने कहा कि वीरांगना नाम सुनते ही हमारे मन में रानी लक्ष्मीबाई की छवि उभरने लगती है. रानी लक्ष्मीबाई को उनकी उत्कृष्ट बहादुरी के लिए जाना जाता है जिन्होनें अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके इस साहस से ही स्वतंत्र भारत के सपने को पूरा करने में देशवासियों को मदद मिली. रानी लक्ष्मीबाई भारत में बाद के राष्ट्रवादियों के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन गईं. उन्हें हमेशा एक महान शहीद के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. साहस, वीरता और नारी शक्ति का दूसरा नाम रानी लक्ष्मीबाई है.

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