स्व. महेश दत्त शर्मा की छठी पुण्य तिथि के अवसर पर उनकी स्मृति में हवन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
BOL PANIPAT : 28 जनवरी, 2023, स्व. महेश दत्त शर्मा की छठी पुण्य तिथि के अवसर पर उनकी कर्मस्थली खादी आश्रम प्रांगण, जी.टी. रोड, पानीपत में उनकी स्मृति में हवन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में खादी आश्रम पानीपत, भारतीय खादी ग्रामोद्योग संघ उत्तरी क्षेत्र पानीपत, चेतना परिवार ट्रस्ट पानीपत के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं तथा विद्या भारती मॉडर्न स्कूल के स्टाफ ने भाग लिया।
खादी आश्रम, पानीपत के न्यासी शैलेश दत्त शर्मा ने इस अवसर पर बताया कि महेश दत्त का जन्म 5 जुलाई, 1939 को प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं खादी जगत की महान विभूति स्व. सोमभाई के परिवार में हुआ था। वे सोमभाई के सबसे बड़े पुत्र थे। सन् 1942 में मात्र चार वर्ष की आयु में भारत छोड़ो आन्दोलन के समय अपने माता-पिता के साथ मेरठ जेल में रहे। वे अपने जीवन काल में खादी एवं रचनात्मक कार्यों के प्रति पूर्णतः समर्पित रहे तथा अपना पूरा जीवन इन्हीं कार्यों के उत्थान में लगा दिया। वे अपने विद्यार्थी जीवन में पंजाब स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सन् 1956-1960 तक सहा. सचिव रहे। वे पंजाब युवा कांग्रेस के सचिव उस समय थे जब श्रीमती इन्दिरा गांधी युवा कांग्रेस की अध्यक्षा थी। वे ज्ञानोदय-सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरूकता की संस्था के सचिव भी रहे। वे हरियाणा प्रदेश कांग्रेस एस कमेटी के महामंत्री भी रहे। अपने विद्यार्थी जीवन में उन्होंने सन् 1956 में भूदान आंदोलन में भाग लिया।
विद्या भारती मॉडर्न स्कूल की प्रिंसिपल कुमारी आशा ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि पानीपत को जिला बनाने के लिए स्व. महेश दत्त ने एक सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने शहर भर के प्रमुख बुद्धिजीवियों, उद्योगपतियों तथा वकीलों को एक मंच पर ला कर पानीपत नागरिक मंच की स्थापना की तथा इस मंच के माध्यम से उन्होंने पानीपत को जिला बनाने के लिए पूरा संघर्ष किया था। उनके द्वारा किये गए कठिन संघर्ष के कारण ही पानीपत जिले के रूप में अस्तित्व में आया। पानीपत के लोगों को उनका हक दिलवाने के लिए उन्हें हमेशा याद किया जायेगा। इस पानीपत नागरिक मंच के अस्तित्व में आने से लेकर अपने अन्तिम समय तक वे इसके अध्यक्ष रहे।
खादी आश्रम पानीपत की अध्यक्षा निर्मल दत्त द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी आगन्तुकों का धन्यवाद किया गया तथा उन्होंने बताया कि वे अपने जीवन के अंतिम समय में बीमारी की हालत में भी सामाजिक एवं खादी कार्यों में लगे रहे। आज खादी संस्थाएं विभिन्न प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त हैं तथा खादी संस्थाओं का अस्तित्व ही खतरे में हैं। इस समय अब उनकी कमी महसूस हो रही है। उनके रहते हुए हमें किसी भी प्रकार की चिंता नहीं रहती थी, क्योंकि वे खादी संस्थाओं के हक की लड़ाई में हमेशा आगे रहते थे। आज समय आ गया है कि उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चल कर हम समस्याओं को हल करने का प्रयास करेंगे।
इस अवसर पर डा. गायत्री दत्त, डा. अपर्णा दत्त, प्रमोद शर्मा, अजीत पाल, बिशम्बर दास एवं मीनाक्षी, जसनित कौर, अनिता, शालिनी आदि ने भी अपने-2 श्रद्धासुमन अर्पित किये।

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