Sunday, March 8, 2026
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विश्व जल दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय बेविनार का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 22, 2022 Tags: , , , ,

जल संचयन के लिए समाज को नयी आचार संहिता विकसित करनी होगी-डा0 प्रवीन कुमार

पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब जल संरक्षण के लिए मार्गदर्शक ग्रन्थ-संजय विशवाल

BOL PANIPAT : 22 मार्च 2022, विश्व जल दिवस के अवसर पर विद्युत विभाग हरियाणा ,वन विभाग हरियाणा एवं एस.डी. पी.जी कॉलेज पानीपत के सानिध्य में राज्य स्तरीय बेविनार का आयोजन किया गया। ‘‘बिन पानी सब सून’ विषय पर आयोजित विमर्श में राज्य भर के शिक्षक विद्यार्थी एवं पर्यावरणविद्ों ने सक्रिय हिस्सेदारी निभायी।

तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान के गोवा के निदेशक डा. प्रवीण कुमार ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि जल ही जीवन का आधार है इसलिए जल संरक्षण मनुष्य का पावन कर्तब्य है। उन्होंने कहा कि गोवा के धरा पर 4000 मिली लीटर वर्षा होती है जिसका संरक्षण नहीं हो पाता और सारा जल समुद्र में बह जाता है। ऐसे में जल संचयन के लिए समाज के सभी वर्गाे को एक आचार संहिता विकसित करनी होगी।

लखीमपुरी खीरी उ. प्र. से श्री संजय विशवाल आई एफ एस ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व जल दिवस मनाने का उद्देश्य प्रकृति संरक्षण का व्यवहार है। उन्होंने कहा कि बडे़-बड़े नारे लगाने के बजाय छोटे-छोटे व्यवहार प्रकृति रक्षा के आदर्श व्यवहार हो सकते हैं। आज 22 मार्च का दिन पानी बचाने के लिए स्वयं से संकल्प करने का दिन है। प्रकृति ने जीवन जीने के लिए जो हमें जल उपलब्ध कराया है उसके लिए हमारा नैतिक कर्तब्य है कि हम प्रकृति के इस खजाने का जितना हो सके उतना उसे वापस करें यही हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।

वन मंडल अधिकारी प्रशिक्षण अजय पाल ने कहा कि प्रकृति रक्षा हमारे समय का यक्ष प्रश्न है। दुनिया के जल भंडारण का 3 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है जिसमें से 68 प्रतिशत पानी ग्लेशियर से आता है जलवायु परिवर्तन की वजह से तेजी से पिघलते ग्लेशियर भविष्य में जल संकट का कारण बनेगा।

वन राजिक अधिकारी प्रशिक्षण संजय ने कहा कि पानी के संरक्षण के लिए पहला कदम यह है कि पानी को बर्बाद होने से बचाए और इसके लिए जरूरत है जागरूकता की। जब प्रत्येक व्यक्ति जागरूक होगा तथा पानी बचाने को अपना धर्म समझेगा तो पानी संरक्षण की यह मुहिम सार्थक हो जायेगी।

संयोजन करते हुए संस्कृतिकर्मी राजीव रंजन ने कहा कि पानी पंचभूतों में से एक है जीवन है जिंदगानी है। उन्होंने कहा कि भारत में कुछ ऐसे राज्य हैं जहां लोग पानी के अभाव का सामना करते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान, जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी इलाके में सबसे कम वर्षा होने केे बावजूद जल संचयन की संस्कृति पूरी दुनिया के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।

अध्यक्षता करते हुए एस डी पी जी कालेज के प्राचार्य डा. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि ज्ञान के सभी मंदिरों में पर्यावरण विषय को अध्ययन के लिए अनिवार्य किया गया है इस अवसर पर डा. रवि रघुवंशी, डा. मनजीत नरवाल, डा मोनिका खुराना, डा. दीप्ती शर्मा, डा. साहब सिंह ने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में वन विभाग की मुख्य प्रचार अधिकारी सरोज पवार, पी आर ओ रीता राय सहित राज्य भर से वर्चुवल मंच पर सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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