Friday, April 17, 2026
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एस.डी. पी.जी. कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा संविधान प्रस्तावना वाचन कार्यक्रम का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at January 17, 2025 Tags: , , , ,

हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान है. यह हमारे लोकतंत्र की आत्मा है: डॉ अनुपम अरोड़ा

BOL PANIPAT : , 17 जनवरी. एस.डी. पी.जी. कॉलेज पानीपत के एनएसएस प्रकोष्ठ द्वारा “हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान” थीम पर प्रस्तावना वाचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, एन.एस.एस. प्रोग्राम अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, प्राध्यापकों, स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया । कार्यक्रम का उद्देश्य संविधान के महत्व को उजागर करना और छात्रों के बीच राष्ट्रीयता एवं संविधान के प्रति सम्मान की भावना जागृत करना था । कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन से हुई जिसमें कॉलेज के छात्रों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया । इस अवसर पर प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने संविधान की प्रस्तावना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संविधान न केवल हमारा मार्गदर्शक है बल्कि यह हमारे अधिकारों और कर्तव्यों का भी प्रतीक है । प्राचार्य ने एनएसएस प्रकोष्ठ के प्रयासों की सराहना की और कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी सदस्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद किया । अंत में सभी को सत्यनिष्ठा से कार्य करने की शपथ दिलाई गयी । कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ ।

डॉ अनुपम अरोड़ा ने संविधान की प्रस्तावना को पढ़ा और इसे विस्तृत रूप से समझाया । “हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्त्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिये तथा इसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिये तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता तथा अखंडता सुनिश्चित करने वाली  बंधुता बढ़ाने के लिये दृढ़ संकल्पित होकर अपनी इस संविधान सभा में आज दिनांक 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं ।” उपस्थित स्टाफ सदस्यन और छात्रों ने प्रस्तावना के शब्दों को पूरे सम्मान और गर्व के साथ पढ़ा । इस वाचन ने संविधान के महत्व और उसके आदर्शों को गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया । उन्होनें कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं है बल्कि यह हमारे लोकतंत्र की आत्मा है । इसकी प्रस्तावना हमें यह सिखाती है कि हम सभी समान हैं और देश के विकास में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है । उन्होंने युवाओं से संविधान के मूल्यों को अपनाने और अपने कर्तव्यों को निभाने का आह्वान किया ।

डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना हमारे अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है । ऐसे कार्यक्रम छात्रों को संविधान के महत्व को समझाने और उनके भीतर स्वाभिमान की भावना को जगाने में सहायक होते हैं । डॉ बीआर अंबेडकर ने भी प्रस्तावना के बारे में कहा था कि यह वास्तव में एक जीवन पद्धति थी जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को जीवन के सिद्धांतों के रूप में मान्यता देती है और जिसे एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता । स्वतंत्रता को समानता से अलग नहीं किया जा सकता और समानता को स्वतंत्रता से अलग नहीं किया जा सकता । न ही स्वतंत्रता और समानता को बंधुत्व से अलग किया जा सकता है । समानता के बिना, स्वतंत्रता बहुतों पर कुछ लोगों की सर्वोच्चता पैदा करेगी । स्वतंत्रता के बिना समानता व्यक्तिगत पहल को खत्म कर देगी । बंधुत्व के बिना, स्वतंत्रता और समानता चीजों का एक स्वाभाविक क्रम बन सकती है ।

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