पुलिस कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन. विधिक विशेषज्ञों ने गिरफ्तारी बारे दिया व्यापक प्रशिक्षण.
BOL PANIPAT , 20 अप्रैल: पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के निर्देशानुसार व पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह आईपीएस के मार्गदर्शन में जिला पुलिस कर्मियों की कार्यक्षमता को सुदृढ़ बनाने एवं उन्हें विधिक प्रक्रियाओं के प्रति अधिक जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष प्रशिक्षण शत्र आयोजित किए जा रहे है। सोमवार को जिला सचिवालय स्थित पुलिस विभाग के सभागार में डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन राजेश चौधरी और जिला न्यायवादी संजीव कुमार द्वारा प्रशिक्षण शत्र में पर्यवेक्षण अधिकारियों, थाना प्रबंधकों, क्राइम युनिट इंचार्जों व चौकी इंचार्जों को गिरफ्तारी से संबंधित नियमों, प्रक्रियाओं एवं आवश्यक दिशा-निर्देशों की विस्तार से जानकारी दी।
पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह आईपीएस ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और प्रशिक्षण के महत्व बारे बताया कि वर्तमान समय में पुलिस की भूमिका केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की गिरफ्तारी करते समय निर्धारित विधिक प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी है।
डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन राजेश चौधरी ने प्रशिक्षण सत्र के दौरान गिरफ्तारी से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सरल एवं स्पष्ट तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि किसी भी मामले में गिरफ्तार करने से पहले पर्याप्त साक्ष्य एवं उचित आधार होना अनिवार्य है। बिना ठोस कारण, संबंधित नियमों, प्रक्रियाओं की उल्लंघना कर की गई गिरफ्तारी को माननीय न्यायालय में अवैध माना जाएगा है और आरोपी को इसका लाभ मिल सकता है।
उन्होंने पुलिस कर्मियों को अवगत कराया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को उसके अधिकारों की जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। इसमें उसे गिरफ्तारी के कारण बताना, उसके परिजनों को सूचित करना इत्यादी शामिल है। साथ ही गिरफ्तारी मेमो तैयार करने, उसमें समय, स्थान एवं गवाहों का विवरण दर्ज करने जैसी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण में मानवाधिकारों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया।
उन्होंने गिरफ्तारी से संबंधित प्रावधानों, आरोपी के अधिकारों, तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बारे में अधिकारियों को बताया कि गिरफ्तारी के दौरान पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं कानूनी प्रावधानों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न केस स्टडी के माध्यम से व्यावहारिक जानकारी भी दी गई, जिससे वे वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर निर्णय ले सकें।
डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन राजेश चौधरी ने इस दौरान स्टेट ऑफ गुजरात बनाम किशन भाई के जजमेंट बारे भी जानकारी दी। किसी भी मामले में आरोपी जिसको गिरफ्तार किया है उसको माननीय न्यायायल में पेश करने से कम से कम 2 घंटे पहले लिखित में ग्राउंड्स ऑफ अरेस्ट देना जरूरी है। और यह उसी भाषा में लिखकर देना है जिसको वह जानता हो। इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 6 नवंबर 2025 के मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य के फैंसले बारे भी बताया गया।
जिला न्यायवादी संजीव कुमार ने बताया कि वे प्रत्येक कार्रवाई को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाएं। प्रत्येक कार्रवाई का पूर्ण एवं सही रिकॉर्ड रखें, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी जटिलता से बचा जा सके। प्रशिक्षण शत्र में उपस्थित पुलिस अधिकारियों ने विषय पर अपनी जिज्ञासाएं भी रखीं, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया।
इस दौरान एएसपी हर्षित गोयल आईपीएस, डीएसपी मुख्यालय सतीश वत्स, डीएसपी राजबीर सिंह, डीएसपी नरेंद्र, डीएसपी सुरेश कुमार सैनी और सभी थाना प्रभारी, क्राइम युनिट इंचार्ज व चौकी इंचार्ज मौजूद रहे।

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