किसानों को पुराली जलाने से रोकें, बेलरों की पूरी व्यवस्था कृषि विभाग को करनी होगी: उपायुक्त डॉक्टर विरेंदर कुमार दहिया
-धान सीजन से पहले मंडियों में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश
-पराली जलाने पर किसान व अधिकारी दोनों होंगे जिम्मेदार
-सभी एसडीएम मंडियों का करें निरीक्षण
BOL PANIPAT , 19 सितंबर। उपायुक्त डॉक्टर वीरेंद्र कुमार दहिया ने शुक्रवार को जिला सचिवालय सभागार में कृषि विभाग, मार्केट कमेटी, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, पुलिस विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि इस बार जिले में पराली जलाने की घटनाओं को हर हाल में रोकना है। किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि यदि कहीं पराली जलाने की घटना सामने आती है तो संबंधित किसान पर कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज होगी। उपायुक्त ने कहा कि सरकार किसानों को पराली प्रबंधन के लिए हर संभव साधन उपलब्ध करा रही है। विशेषकर बेलरों की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसानों को आसानी से पराली प्रबंधन के विकल्प मिल सकें और उन्हें पराली जलाने की नौबत ही न आए।
उपायुक्त ने कहा कि पराली जलाने से सिर्फ खेत की उर्वरा शक्ति ही नष्ट नहीं होती, बल्कि इससे वातावरण में जहरीली गैसें फैलती हैं। धुएं से लोगों को सांस की बीमारियां, आंखों में जलन और प्रदूषण संबंधी समस्याएं होती हैं। खेत की मिट्टी में पाए जाने वाले लाभकारी जीवाणु और कीट भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे आने वाली फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा हवा में धुआं फैलने से सडक़ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए किसानों को पराली जलाने के बजाय वैज्ञानिक ढंग से उसका प्रबंधन करना चाहिए। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव-गांव में मनादी कराई जाए, लोगों को पराली जलाने के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाए और किसानों को बेलरों सहित अन्य साधन समय पर उपलब्ध कराए जाएं। उपायुक्त ने कहा कि पटवारी और ग्राम सचिवों की ड्यूटी तहसीलदारों के माध्यम से सुनिश्चित की जाए, ताकि हर स्तर पर निगरानी रखी जा सके।
कृषि विभाग के उप निदेशक आत्माराम गोदारा ने बैठक में उपायुक्त को आश्वस्त किया कि जिले में इस समय 35 बेलर वर्किंग में हैं। इसके अलावा 15 बेलर अन्य जिलों से मंगवाए जा रहे हैं। इस संदर्भ में अन्य जिलों से संपर्क किया जा चुका है। उपायुक्त ने कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों को आवश्यकता के अनुसार बेलर उपलब्ध हों। यदि किसी किसान को पराली प्रबंधन में कठिनाई आए तो तुरंत समाधान किया जाए। मंडियों की तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त ने आगामी धान खरीद सीजन को देखते हुए मंडियों की व्यवस्थाओं की भी गहन समीक्षा की। उन्होंने कहा कि धान की फसल मंडियों में आने में अभी समय है, लेकिन हमें पहले से ही सभी तैयारियां पूरी करनी होंगी। मंडियों में साफ-सफाई, पीने के पानी की सुविधा, तौल व्यवस्था, नमी नापने के लिए मास्चर मीटर और लिफ्टिंग पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र की मंडियों का नियमित निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। उपायुक्त ने कहा कि जिले की आठ मंडियों में वेयरहाउस और हैफेड के माध्यम से धान की खरीद होगी। ऐसे में अधिकारियों को यह ध्यान रखना होगा कि किसानों को कोई असुविधा न हो और खरीद में पारदर्शिता बनी रहे। उपायुक्त ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि धान की खरीद के दौरान किसी भी प्रकार की लिफ्टिंग समस्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धान का उठान समय पर होना चाहिए ताकि मंडियों में भीड़भाड़ की स्थिति पैदा न हो। इस मौके पर उन्होंने मंडियों में अतिरिक्त मास्चर मीटर लगाने के भी निर्देश दिए।
बैठक में उपायुक्त डॉक्टर विरेंदर कुमार दहिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा हमें किसानों को समझाना होगा कि पराली जलाना उनके खुद के खेत और आने वाली फसल के लिए नुकसानदायक है। सरकार किसानों को विकल्प दे रही है, बेलर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन यदि इसके बावजूद कोई किसान पराली जलाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। प्रदूषण से पूरे समाज पर असर पड़ता है और इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि अधिकारियों को चाहिए कि वे किसानों से लगातार संवाद बनाए रखें और गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएं। उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि वे पराली जलाने के मामलों पर नजर रखें और तुरंत कार्रवाई करें। उपायुक्त ने बताया कि प्रशासन इस बार पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह से रोकने के लिए सख्त कदम उठा रहा है। बेलरों की पर्याप्त व्यवस्था, किसानों को जागरूक करने के अभियान, मंडियों की बेहतर तैयारियां और अधिकारियों की जवाबदेही तय कर प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब पराली जलाना बर्दाश्त नहीं होगा। उपायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि यह केवल सरकारी आदेश नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढिय़ों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मामला है। यदि सभी विभाग तालमेल से काम करें तो जिले को पराली मुक्त और प्रदूषण मुक्त बनाने का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।
इस मौके पर एडीसी डॉ. पंकज, पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह, एसडीएम मनदीप सिंह, एसडीएम समालखा अमित कुमार, एसडीएम इसराना नवदीप नैन, डीएफएससी कुमारी नीतू, डीएम वेयर हाउस रसु दहिया, डीएम हैफेड कृपाल दास, तहसीलदार वीरेंद्र गिल, तहसीलदार सुमन, तहसीलदार समालखा विनती, डीआईसी संयुक्त निदेशक सतीश कुमार, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी समालखा शीतल गुलिया, शक्ति सिंह और डीएमईओ महावीर सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

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