विद्यार्थियों ने फिल्म के माध्यम से स्कारलेट लेटर के बारे में जानकारी अर्जित की।
BOL PANIPAT : आई.बी.(पी जी) महाविद्यालय में एम.ए. प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए नथानिएल हॉथोर्न द्वारा रचित ‘द स्कारलेट लेटर’ विषय पर फिल्म को प्रदर्शित किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने फिल्म के माध्यम से अपने पाठ्यक्रम पर आधारित विषय स्कारलेट लेटर के बारे में जानकारी अर्जित की। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. शशि प्रभा मलिक ने कहा कि साहित्य को स्याही और सिनेमा को प्रकाश समाज से प्राप्त होता है। स्याही को साहित्य निखारता है जबकि प्रकाश को सिनेमा सतरंगी बनाता है। इसके बाद जो दिखता है वही फिल्म है। पुस्तक और फिल्म मनुष्य को मांजने का कार्य करती है जो साहित्य व्यक्ति को जितना ज़्यादा तराशे वह उतना सफल माना जाता है। उन्होंने इस अवसर पर अंग्रेजी विभाग के सभी प्राध्यापकों को कार्यक्रम के सफल आयोजन की बधाई दी। अंग्रेज़ी विभाग अध्यक्ष डॉ. नीलम दहिया ने कहा कि किताबें हमारी कल्पनाशीलता को विकसित करती हैं, वहीं फ़िल्में हमें सामाजिक रूप से बेहतर बनाने में मदद करतीं हैं तथा उन तथ्यों को ग्रहण करने में भी हमारी सहायता करती है जिन से हम पहले परिचित नहीं रहे होते हैं। साहित्यिक फिल्म हमारी अंग्रेज़ी लेखन क्षमता को भी बेहतर बनाती हैं और बेहतर नौकरियाँ पाने में हमारी मदद भी करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि साहित्यिक फिल्में समाज को व्यापक दृष्टिकोण देती हैं और ये संस्कृति और मूल्यों का संरक्षण भी करती हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यिक फिल्में कहानी को ज़्यादा प्रभावी बनाती है तथा विभिन्न दर्शक वर्गों तक सामाजिक समस्याओं पर जागरूकता भी बढ़ाती है। फ़िल्में हीं लिखित साहित्य की अपेक्षा अधिक लोगों तक पहुंच सकती हैं और कल्पना को दृश्यात्मक रूप देती हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कहानी से गहरे स्तर पर जुड़ने में मदद करना एवं इसे रुचिकर बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन सहायक प्रोफ़ेसर रेशु द्वारा किया गया। इस अवसर पर अंग्रेजी विभाग से डॉ. निधि, डॉ. स्वाती पुनिया, डॉ. नेहा पुनिया, सहायक प्रो. रेखा शर्मा, सहायक प्रो. प्रिया, सहायक प्रो. राहुल व सहायक प्रो. दीप्ति शर्मा भी मौजूद रहे।

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