एसडी पीजी कॉलेज पानीपत मेंरेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत द्वारा ‘एचआईवी-एड्स एवं अन्य बीमारियां’ विषय पर जिला स्तरीय क्विज प्रतियोगिताका सफल आयोजन
राजकीय महाविधालय पानीपत की टीम ने पाया पहला स्थान और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाई
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत द्वारा‘एचआईवी एड्स, टीबी, कोरोना, डेंगू, चिकन गुनिया एवं अन्य बीमारियां’ विषय पर जिला स्तरीय क्विज प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया जिसमे पानीपत जिले के 8 कालेजो की टीमों ने हिस्सा लिया और इसमें राजकीय महाविधालय पानीपत की नवनीत और भगत सिंह की टीम ने जीत हासिल करके पहला स्थान प्राप्त किया. राजकीय महाविधालय इसराना की आशा जागलान और हर्ष की टीम ने दूसरा और वैश्य महाविधालय समालखा की ट्विंकल और इशिका की टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया.प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने क्विज प्रतियोगिता का विधिवत उदघाटन किया और अंत में सभी विजेताओं को पुरस्कारों से नवाजा. क्विज प्रतियोगिता डॉ ललित वर्मा सिविल हॉस्पिटल पानीपत एवं क्विज मास्टर ओम प्रकाश एसटीएस, रवि भोला काउंसलर ईसीटीसी और गुरु दत्त पीपीएमसी समालखा की देख-रेख में संपन्न हुई. क्विज प्रतियोगिता में विषय आधारित राउंड, रैपिड फायर राउंड, बजर राउंड और ऑडियो-विजुअल राउंड शामिल रहे और इसमें प्रतिभागियों ने बड़ी ही रूचि के साथ हिस्सा लिया. क्विज प्रतियोगिता के सफल आयोजन में डॉ राहुल जैन, डॉ प्रियंका चांदना, डॉ रवि कुमार, प्रो प्रवीण कुमारी, प्रो रिया, प्रो नम्रता का भरपूर सहयोग रहा. विजेता टीम अब राज्य स्तरीय क्विज प्रतियोगिता में भाग लेने पंचकूला जायेगी.

डॉ ललित वर्मा सिविल हॉस्पिटल पानीपत ने अपने सन्देश में छात्र-छात्राओं को बताया की अब एड्स और टीबी से ग्रसित लोगों को सरकार पेंशन भी देने लगी है ताकि वे अच्छे इलाज से वंचित न रह सके.तपेदिकयाटीबीआमतौर पर एमटीबी जीवाणु के कारण होता है और यह बहुत धीरे-धीरे बढ़ कर संक्रमण पैदा करता है. यह संक्रमण जीवन भर रह सकता है. दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी के टीबी बैक्टीरिया से संक्रमित होने का अनुमान है जबकि लोगों को इस बात की खबर तक नहीं होती है. उन्होनें कह की उपचार के साथ टीबी लगभग हमेशा ठीक हो सकता है. एंटीबायोटिक्स का एक कोर्स आमतौर पर 6 महीने तक लेने की आवश्यकता होती है. इसके इलाज में कई अलग-अलग एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है क्योंकि टीबी के कुछ रूप कुछ एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोधी होते हैं. एचआईवी-एड्स पर बताते हुए उन्होनें कहा की इस बीमारी का आज भी कोई इलाज उपलब्ध नहीं है. दवाओं से हालांकि इस बीमारी को फैलने से रोका अवश्यजा सकता है और एचआईवी संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक जिंदा रह सकता है. यहबीमारी एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस से फैलती है. ये वायरस शरीर के इम्यून सिस्टम पर हमला करता है जिससे अन्य बीमारियाँ इंसान को जकड़ने लगती है.
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं के ज्ञान में वृद्धि होती है और उनमेआत्मविश्वास के भाव का संचार होता है. ‘एचआईवी एड्स, टीबी, कोरोना, डेंगू, चिकन गुनिया एवं अन्य बीमारियां’ विषयों परतैयार की गयी इस क्विज का उद्देश्य सार्थक एवं प्रासंगिक ज्ञान व जानकारी को प्रश्नों के रूप में छात्र-छात्राओं तक पहुंचाना था ताकि वे इन बीमारियों के प्रति न सिर्फ खुद सचेत हो सके बल्कि अपने परिवार और दोस्तों को भी सुरक्षित रहने में मदद कर सके.क्विज में भाग लेने से हमारी खुद की समझ भी व्यापक बनती है. उन्होनें कहा की क्विज़ एक प्रकार की दिमागी कसरत है जिसमें प्रतिभागी सवालों के सही उत्तर देने का प्रयास करते हुए अपने बौद्धिक विकास को सक्रिय करता है. क्विज़ एक प्रकार का संक्षिप्त मूल्यांकन भी हैं जिसका प्रयोग शिक्षा या इसी प्रकार के अन्य क्षेत्रों में ज्ञान, योग्यता और कौशल में वृद्धि को मापने के लिए किया जाता है.
डॉ राहुल जैन ने कहा की क्विज प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पुरे जोश और जूनून के साथ हिस्सा लिया. क्विज की सफलता ने उन्हें भविष्य में भी ऐसे आयोजन करने को प्रौत्साहित किया है.
डॉ रवि कुमार ने कहा की क्विज़ एक प्रकार का संक्षिप्त मूल्यांकन हैं जिसका प्रयोग शिक्षा या इसी प्रकार के अन्य क्षेत्रों में ज्ञान, योग्यता और कौशल में वृद्धि को मापने के लिए किया जाता है. क्विज़ छात्रों के मूल्यांकन के लिएभी एक सटीक माध्यम है. इसमें थोड़े एवं कम कठिनाई वाले सवाल होते हैं और एक परीक्षा की तुलना में इसे पूरा करने के लिए समय की भी कम आवश्यकता होती है.

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