एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में शिक्षक दिवस धूमधाम और श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया
–सशक्त, सुदृढ़, संस्कारी राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की सर्वोच्च भूमिका: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 05 सितम्बर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में शिक्षक दिवस के अवसर पर शानदार कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं ने अपने प्राचार्य और प्राध्यापकों के प्रति आभार व्यक्त किया और केक काटे । प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कॉलेज के शिक्षकों को सम्मानित किया और उन्हें शिक्षक दिवस की बधाईयाँ दी और मिष्ठान खिलाया । इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं ने गीत, चुटकुले और डॉ राधाकृष्णन के जीवन कि घटनाओं को सुनाया । सभी प्राध्यापकों ने कार्यक्रमों में विद्यार्थियों के साथ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया ।
दिनेश गोयल प्रधान ने अपने सन्देश में कहा कि शिक्षक राष्ट्र की उन्नति व विकास में रीड की हड्डी है । शिक्षक ही अपने विद्यार्थियों में समाज के संस्कार पोषित करता है व उन्हें चरित्रवान बनाता है । भारत की संस्कृति में गुरु को ईश्वर तुल्य माना गया है । विद्यार्थियों को पूर्ण विश्वास से परिश्रम करना चाहिए, उन्हें सफलता अवश्य मिलेगी।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने बताया कि स्वतंत्रता के पश्चात मात्र 70 वर्षों में भारत आज एक स्पेस पावर है, मिसाइल पावर है, न्यूक्लियर पावर है, आईटी पावर है, व विश्व की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था है । इन सबका मुख्य कारण शिक्षा व शिक्षक की गुणवत्ता है । विक्रम साराभाई, होमी जहांगीर बाबा, डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जैसे अनेक वैज्ञानिक विभूतियां राष्ट्र की उन्नति के आधार स्तंभ है । उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य मात्र कक्षा में पुस्तकों के माध्यम से पाठ्यक्रम पढ़ना नहीं है । एक शिक्षक की भूमिका बहू उद्देशीय है । शिक्षकों को विद्यार्थी के मेंटर, विद्यार्थी के प्रेरणा स्रोत, विद्यार्थी के मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता, व विद्यार्थी का कल्याण, विद्यार्थी के प्रति स्नेह की भावना से एक संपूर्ण भूमिका निभानी होती है। आधुनिक पीढ़ी को इस और सजग होना पड़ेगा । शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से कोई समझौता नहीं कर सकता क्योंकि वह राष्ट्रीय हित से समझौता हो जाएगा । उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत निर्माण हेतु युवा की अपेक्षित भूमिका है । कौशल विकास से रोजगार सृजन कर युवा स्वयं को आत्मनिर्भर बनाता है । उन्होनें कहा कि सन 1962 से प्रत्येक वर्ष डॉ राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है । डॉक्टर राधाकृष्णन भारत के 1952 से 1962 तक उपराष्ट्रपति व 1962 से 1967 तक राष्ट्रपति रहे । उन्होंने बताया कि राधाकृष्णन 20वीं सदी के तुलनात्मक धर्म व दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में महानतम विचारको व दार्शनिकों में से थे । उन्होंने अनेक पुस्तकों, लेखों, व्याखानों के माध्यम से हिंदू संस्कृति को विस्तार से प्रकाशित किया । उन्होंने वेदांत दर्शन की पुनः व्याख्या की । डॉक्टर राधाकृष्णन में एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण विद्यमान थे । वह 1931 से 1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय व 1938 से 1939 तक बनारस विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे । 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया।

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