“मानव पीड़ा को कम करना रेडक्रास का उद्देश्य”: गौरव आर करण
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय एनएसएस विशेष कैंप का तीसरा दिन
110 एनएसएस कार्यकर्ताओं ने नशे और बाल शोषण के खिलाफ चलाया अभियान
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र के एनएसएस पाठ्यक्रम के अनुसार 15 से 21 फरवरी तक चलने वाले सात दिवसीय एनएसएस विशेष कैंप का आज तीसरा दिन रहा जिसमे गौरव आर करण सचिव रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत, डॉ अशोक कुमार वर्मा सब-इंस्पेक्टर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो हरियाणा, डॉ पूजा सिंघल इंचार्ज रेड क्रॉस ब्लड बैंक पानीपत, पूजा मलिक को-ऑर्डिनेटर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, विनोद कुमार डिप्टी सुपरिटेनडेंट रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत, सोनू सिंह प्रोजेक्ट डायरेक्टर रेड क्रॉस आरसीआईटी पानीपत और सुदेश कुमार इंचार्ज टीआई प्रोजेक्ट रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत ने भाग लिया और अपने अनुभव एवं ज्ञान को एनएसएस कार्यकर्ताओं के साथ बांटा. माननीय मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कॉलेज में एनएसएस प्रभारी डॉ राकेश गर्ग एवं डॉ संतोष कुमारी ने किया. माननीय मेहमानों के अनुभवों और ज्ञान को लेकर कॉलेज एनएसएस यूनिटस के लगभग 110 कार्यकर्ता काबड़ी के लिए रवाना हुए और वहां जाकर युवाओं, बच्चों, वयस्कों और महिलाओं को नशे के नुकसान और बच्चों के शोषण के खिलाफ जागरूक किया. सभी मेहमानों ने प्रत्येक वर्ष नियमित रूप से ब्लड डोनेशन कैंप लगाने पर कॉलेज प्रशासन की तारीफ़ की. विदित रहे की कॉलेज के एनएसएस कार्यकर्ताओं ने लॉकडाउन की अवधि के दौरान भी मास्क, सेनिटाइजर, दवाईयाँ इत्यादि वितरित करने में प्रशासन और रेड क्रॉस की काफी मदद की थी.


डॉ अशोक कुमार वर्मा सब-इंस्पेक्टर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो हरियाणा ने कहा की हरियाणा सरकार ने अपराध के तौर पर गति पकड़ रहे नशे के धंधे को नष्ट करने के लिए नारकोटिक्स ब्यूरो की स्थापना की है. ब्यूरो को नशे के खिलाफ सख्ती से निपटने के निर्देश है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का मुख्यालय मधुबन में बनाया गया है ताकि राज्य के सभी हिस्सों में आसानी से आवागमन हो सके. उन्होनें कहा कि देश में नारकोटिक्स ब्यूरो स्थापित करने वाला हरियाणा पहला राज्य है. हरियाणा सरकार ने राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम एवं नियंत्रण के साथ इनकी आपूर्ति, विनिर्माण, परिवहन, वितरण और भंडारण में संलिप्त लोगों का पता लगाने और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के लिए हरियाणा राज्य मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो का गठन किया है. ब्यूरो का कार्य नशीली दवाओं एवं मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त असामाजिक तत्वों पर कानून के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार तकनीकी एवं मानव खुफिया जानकारी एकत्रित करना और उन पर निगरानी रखना तथा विशेष टीमों के माध्यम से और हरियाणा पुलिस एवं अन्य सरकारी विभागों की इकाइयों के सहयोग से ड्रग-तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चलाना भी शामिल है. ब्यूरो मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं की तस्करी के संचालन में शामिल गिरोह और फाइनेंसरों का पता लगाने और एनडीपीएस अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से इनके द्वारा अर्जित संपत्ति को जब्त करने का कार्य करता है. नशे का सबसे बुरा प्रभाव हमारी युवा पीढ़ी पर पड़ता है. ऐसे में एनएसएस कार्यकर्ताओं का दायित्व है की वे गाँव में जाकर वहां के युवाओं और बच्चों को नशे के खिलाफ समझाए और जागरूक करे.

गौरव आर करण सचिव रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत ने बताया कीरेड क्रॉस एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो युद्ध में घायल होने वाले सैनिकों की सहायता के लिए बनाई गई थी. इसका उद्देश्य मानव जीवन की रक्षा करना और किसी भी युद्ध या कठिनाइयों में लोगों की सहायता करना है. इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (आईआरसीएस) की स्थापना 1920 में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी एक्ट के तहत हुई जिसे 1992 में संशोधित किया गया. मानव पीड़ा को कम करना ही रेडक्रास का उद्देश्य है.
पूजा मलिक को-ऑर्डिनेटर चाइल्ड हेल्पलाइन ने कहा की 1098 हेल्पलाइन का उद्देश्य बाल मजदूरी, बाल शोषण, लोक अदालतों और रोजाना की जिंदगी में आने वाली मुश्किलों के बारे में बच्चों को कानूनी जानकारी संबंधी जागरूकता देना है ताकि वे अपने अधिकारों की लड़ाई बेहतर तरीके से लड़ सकें. उन्होनें कहा कि बच्चे किसी भी मुश्किल में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर डायल करके जरूरी मदद ले सकते हैं. गरीबी और लाचारी के चलते छोटे बच्चे बाल मजदूरी की दलदल में धंसते चले जाते हैं जिससे उन्हें बचाना और उनका जीवन बढ़िया बनाना बहुत जरूरी है. बाल मजदूरी एक अभिषाप है और आधुनिक कहे जाने वाले समाज के माथे पर एक कलंक है. बाल यौन शोषण एक और ज्वलंत समस्या है जिसके बच्चों पर भयंकर बुरे प्रभाव पड़ते है. ऐसे ही बच्चों का विकास करने और बाल शोषण रोकने के लिए यह हेल्पलाइन शुरू की गई है. बच्चों को चाहिए की किसी भी मुश्किल परिस्थिति में इस नंबर पर मदद जरुर लें. बड़े भी यदि किसी भी बच्चे के शोषण को महसूस करे तो इसी नंबर पर सूचित कर सकते है.

डॉ पूजा सिंघल इंचार्ज रेड क्रॉस ब्लड बैंक पानीपत ने अपने वक्तव्य में रक्तदान और रक्तदान शिविरों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होनें कहा कि विज्ञान में इतनी प्रगति होने के बावजूद भी इंसान आज तक खून का विकल्प नहीं बना पाया है. इसीलिए रक्तदान शिविरों की आवश्यकता महसूस होती है. कोई भी सेहतमंद व्यक्ति तीन महीने में एक बार रक्त दान कर सकता है. कोरोना वायरस का जिक्र करते हुए उन्होनें कहा कि साफ़-सफाई एवं पौष्टिक भोजन को अपनाकर हम कोरोना वायरस के संक्रमण से हम खुद को बचा सकते है. उन्होनें रेड क्रॉस को हर बीमार और दिव्यांग का सच्चा साथी बताया. रेड क्रॉस के माध्यम से ही सरकार आमजन तक मदद पहुंचाती है.
सोनू सिंह प्रोजेक्ट डायरेक्टर रेड क्रॉस आरसीआईटी पानीपत ने अपने उर्जापूर्ण भाषण में एनएसएस कार्यकर्ता के मायने समझाए. उन्होनें कहा कि कॉलेज में पढने वाले विद्यार्थियों में एनएसएस कार्यकर्ता सबसे सौभाग्यशाली एवं श्रेष्ठ है और उन पर सबसे अधिक जिम्मेदारी होती है. उन्होनें कहा कि रेडक्रॉस का जमा का निशान सकारात्मकता का सूचक होता है और ऐसी ही सकारात्मकता हर कार्यकर्ता में होनी चाहिए. नर की सेवा ही नारायण सेवा है और एनएसएस कार्यकर्ता को सैदव दूसरो की मदद के लिए तत्पर रहना चाहिए.
विनोद कुमार डिप्टी सुपरिटेनडेंट रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत ने कहा की नशे से होने वाले दुष्परिणाम बहुत ही ज्यादा हानिकारक होते हैं. नशा हमारे हँसते-खेलते जीवन को तहस-नहस कर के रख देता है. आजकल नाबालिक बच्चे भी अधिक मात्रा में नशे का सेवन करने लगे है जो बहुत ही चिंता का विषय है. भारत सरकार की ओर से हर नशे से संबंधित सामग्री पर चेतावनी दी होती है फिर भी लोगों पर इसका बिल्कुल भी प्रभाव नही पड़ता है और वह नशा करते जाते है. ऐसे में जिम्मेदारी युवा एनएसएस कार्यकर्ताओं की है की वे दुसरे लोगों को नशे के दुष्परिणामों एवं इससे होने वाले नुकसान के बारे में सचेत करे.
सुदेश कुमार इंचार्ज टीआई प्रोजेक्ट रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत ने कहा की रेड क्रॉस केवल युद्ध से प्रभावित लोगों के लिए ही नहीं बल्कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों का पुनर्वास भी करती है. वर्तमान में विश्व के कुल 210 देश रेड क्रॉस सोसाइटी से जुड़े हुए हैं और संस्था के सदस्य निस्वार्थ भाव से मानव सेवा का काम करते हैं. ज़रूरत पड़ने पर रेड क्रॉस गॉंवों और शहरों में एंबुलेंस सेवाएं और दवाईयाँ पहुंचाने का काम करती है. रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन भी किया जाता है और लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक किया जाता है. यह संस्था लोगों को कैंसर, एनीमिया, थैलीसीमिया जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाव के तरीके के बारे में जागरूक करती है. एनएसएस कार्यकर्ताओं को चाहिए की वे ग्रामीणों को भी रेड क्रॉस के बारे में बताएं ताकि उन्हें भी इससे फायदा मिल सके.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने एनएसएस कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाते हुए कहा की समय की मांग है की आज के युवा सभी को अपने साथ लेकर चले. कोरोना आपदा ने वैसे भी सामूहिक जीवन के महत्व को और उजागर किया है. आज के एनएसएस कार्यकर्ताओं के जज्बे, हौंसले और कार्यों को देख कर उन्हें इस बात की तस्सली हो गई है की अब भी युवा जिम्मेदार और प्रगतिशील है. गाँव में नशे और बाल शोषण के खिलाफ अभियान चला कर इन युवाओं ने राष्ट्र के निर्माण में अपना स्थान और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया किया है.

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