प्रदर्शनी ने आगंतुकों का किया ज्ञानवर्धन
BOL PANIPAT, 6 जनवरी, पट्टी कल्याणा में आयोजित संस्कृत भारती के दो दिवसीय प्रांत सम्मेलन में लगी प्रदर्शनी आगंतुकों का संस्कृत के प्रचार प्रसार के साथ-साथ ज्ञान वर्धन का भी कार्य किया। मुख्य सभागार के सामने लगी इस प्रदर्शनी के माध्यम से आगंतुकों को बताया गया कि सम्पूर्ण विश्व में भारत से अतिरिक्त 146 अन्य देशों में संस्कृत का पठन और पाठन हो रहा है। इनमें एशिया में बाइस अफ्रीका में एक,आस्ट्रेलिया में बारह ,यूरोप में छियासठ,उतरी अमेरिका में चौवालीस तथा दक्षिणी अमेरिका में एक देश शामिल है।
प्रदर्शनी में खगोलीय विज्ञान में संस्कृत की उपादयेता, इंजीनियरिंग, गणित, विज्ञान, चिकित्सा आदि विभिन्न क्षेत्रों में संस्कृत के महत्त्व को दर्शाते चित्रों का प्रदर्शन किया गया। इसी गैलरी में विभिन्न सूक्तों और संस्कृत श्लोको के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं का निवारण, नियम और न्याय, शस्त्रों के प्रकार , अर्थशास्त्र का राजमंडलीय सिद्धांत, व्यापार, आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। तीसरी गैलरी में तिथि और नक्षत्र, वैदिक गणित, भौतिकी ,रसायन, आदि विषयों के बारे में विस्तार से बताया गया। यहां जल निस्तारण, वेद और उनका विस्तार, वैमानिकी, युद्ध और युद्धनीति,जलसिंचन के बारे में भी चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इसके साथ साथ भरत मुनि नाट्यशास्त्र, रस, स्वर, वाद्य,गान,अभिनय के साथ साथ पहले नाट्यशास्त्र की सर्वसमांवेशकता की जानकारी भी दी गई । चिकित्सा शास्त्र के तहत प्राचीन भारत में पैथोलॉजी, शरीर और मन के दोष रक्तवाहिनियां , रक्त प्रसरण, पल्स टेस्ट, रजत न्यूनापूर्ति जनित हृदयरोग, इंद्रियजय टेस्ट ट्यूब, धातु चिकित्सा, रक्त संचार की जानकारी के साथ प्राकृतिक संरक्षण और निवारण व्यवस्था, व्यापार का नियंत्रण, कर पद्धति, ग्राहकों का संरक्षण, नियम और न्याय, कृषि संरक्षण आदि में भी संस्कृत की उपादेयता की जानकारी दी गई।

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