धूमधाम से मनाया गया जैन समाज के द्वारा मकर संक्रांति एवं जिनबिम्ब दर्शन महोत्सव का त्योहार
BOL PANIPAT : पानीपत में स्थित सभी सातों दिगंबर जैन मंदिरों में धूमधाम के साथ मकर संक्रांति एवं जिनबिंब दर्शन महोत्सव मनाया गया. इस अवसर पर सभी साधर्मियो ने प्रातः की बेला में मंदिरो में जाकर देव दर्शन कर अभिषेक पूजन आदि की क्रियाएं संपन्न की तत्पश्चात अपने श्रद्धा अनुसार दान आदि देकर इस महोत्सव को धूमधाम के साथ मनाया इस अवसर पर जानकारी देते हुए अधिवक्ता मेहुल जैन ने बताया कि जैन मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति एक प्राकृतिक घटना है इस दिन सूर्य वर्ष एक बार मकर राशि में आता है एवं जैन पुराणों में यह वर्णन है कि मगर संक्रांति के दिन इस दिन प्रथम जैन तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के पुत्र भरत चक्रवर्ती जिनके नाम पर देश का नाम भारत हुआ ने उनके महल के छज्जे में खड़े होकर चूंकि उनका महल अत्यधिक ऊंचा था सूर्य में स्थित अकृत्रिम जिनबिंबो एंव जिनालयो के दर्शन किए थे क्योंकि चक्रवर्ती जी की देखने की शक्ति कई योजन तक की होती है इसलिए उन्हें उस दिन जिनबिंबो के दर्शन किए थे जैन धर्मा अनुसार आप और हम जैसे साधारण श्रावको या मनुष्यों के लिए यह केवल एक प्राकृतिक परिवर्तन है बहुत ही काम जैनो को इस दिवस की वास्तविकता के बारे में जानकारी है जो की प्रमाणिकता के साथ जैन दर्शन में उल्लेखित है मकर संक्रांति एक लोक पर्व है लेकिन जैन धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है आईए जानते हैं मकर संक्रांति लोग पर्व क्यों है मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है इस राशि परिवर्तन के समय को ही मकर संक्रांति कहते हैं यही एक मात्र पर्व है जो समूचे भारत में अलग अलग रूप में मनाया जाता है चाहे इसका नाम प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग हो और इसे मनाने के तरीके भी भिन्न हो मकर संक्रांति फसल से जुड़ा हुआ त्यौहार है जिसे सर्दियां समाप्त होने के साथ मनाया जाता है ऐसी मान्यता है इस दिन सूर्य दक्षिणायन से मुड़कर उत्तर की ओर रुख करता है ज्योतिष के अनुसार इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है सामान्य भारतीय पंचांग पद्धति की समस्त तिथियां चंद्रमा की गति को आधार मानकर निर्धारित की जाती है किंतु मकर संक्रांति को सूर्य की गति से निर्धारित किया जाता है इसी कारण यह पर्व प्रतिवर्ष 14 जनवरी को ही पड़ता है क्योंकि सूर्य की गति निश्चित रहती है आगम प्रमाण के अनुसार श्री नेमीचंद्र सिद्धांत चक्रवर्ती विचित्र त्रिलोकसार गाथा संख्या 389 से 391 तक में यह लिखा है की प्रथम परिधि में भ्रमण करता हुआ सूर्य जब निषद पर्वत के ऊपर आता है तब अयोध्या नगर के भीतर अपने भवन के ऊपर से चक्रवर्ती सूर्य विमान में स्थित जिनबिम्ब के दर्शन करता है चक्रवर्ती की चक्षु इंद्रिय का विषय 47263 योजन अर्थात 18 करोड़ 90 लाख 53400 मील प्रमाण होता है और यही चक्षु स्पर्श क्षेत्र का उत्कृष्ट प्रमाण है चक्रवर्ती के चक्षुओं में इतनी उत्कृष्ट क्षमता होती है और इस वजह से वह सूर्य में स्थित जिन बिम्बो के दर्शन कर लेते हैं
16-17-18 जनवरी को भगवान ऋषभदेव का मोक्ष कल्याणक महामहोत्सव का होगा आयोजन
इस अवसर जानकारी देते हुए श्री दिगंबर जैन पंचायत के सचिव मनोज जैन ने बताया कि आगामी 16-17-18 जनवरी को भगवान ऋषभदेव का मोक्ष कल्याणक महा महोत्सव के पावन अवसर पर श्री दिगंबर जैन ऋषभदेव मंदिर, हुड्डा सैक्टर-12 में त्रिदिवसीय भक्तामर महामंडल विधान बड़े ही धूमधाम के साथ आयोजित किया जाएगा
उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को ध्वजारोहण के साथ त्रिदिवसीय विधान का शुभारंभ होगा 17 जनवरी को प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव को धूमधाम से मनाया जाएगा साथ ही 18 जनवरी रविवार को जिन सहस्त्रनाम अर्घावली के माध्यम से जिनदेव की विशेष अराधना सम्पन्न होगी
अंतरराष्ट्रीय विद्वान श्री अमन जी शास्त्री मुंगावली के पावन सान्निध्य एंव निर्देशन में सभी मांगलिक क्रियाएं सम्पन्न होगी
विशेष रूप से 108 ऋद्धि महामंत्रो से मस्तकाभिषेक भी सम्पन्न होगा
प्रतिदिन संध्या में महाआरती व भक्तामर दीपानुष्ठान का भी आयोजन होगा

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