Wednesday, September 16, 2026
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संत विनोबा के विचारों को जीवन में उतारना ही सच्ची शिक्षा : विनोद भाई

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at September 16, 2026 Tags: , , , , ,

हाली अपना स्कूल में संत विनोबा प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित, सैकड़ों विद्यार्थियों ने लिया भाग

BOL PANIPAT , 16 सितंबर। माता सीता रानी सेवा संस्था द्वारा संचालित हाली अपना स्कूल में संत विनोबा भावे के विचारों एवं जीवन-दर्शन पर आधारित संत विनोबा प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्वोदय कार्यकर्ता एवं सेवाग्राम, वर्धा से जुड़े विनोद भाई ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में कोई भी अच्छा कार्य करेंगे तो कठिनाइयां अवश्य आएंगी। इन कठिनाइयों से घबराने या भागने के बजाय उनका सामना करते हुए संघर्ष करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संघर्ष जीवन का अनिवार्य हिस्सा है। इतिहास में राणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, भगत सिंह और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसे अनेक उदाहरण हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया और आगे बढ़े। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे भी अपने जीवन में चुनौतियों से जूझने का साहस पैदा करें।

विनोद भाई ने शिक्षा के महत्व को समझाते हुए कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर छिपी प्रतिभा और क्षमता को बाहर निकालना है। उन्होंने कुएं में मौजूद पानी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार रस्सी, बाल्टी, मोटर या पंप के माध्यम से कुएं का पानी बाहर निकाला जाता है, उसी प्रकार शिक्षा का कार्य बच्चों के भीतर मौजूद प्रतिभा, योग्यता और क्षमता को निखारकर सामने लाना है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल नौकरी अथवा पेशा प्राप्त करने का माध्यम नहीं समझना चाहिए। यदि शिक्षा को जीवन का उद्देश्य और समाज के लिए उपयोगी बनने का माध्यम बनाया जाए, तभी उसका वास्तविक महत्व सामने आता है। उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कानून की पढ़ाई और उच्च शिक्षा प्राप्त की, लेकिन केवल धन कमाना ही अपने जीवन का उद्देश्य नहीं बनाया, बल्कि समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया।

विनोद भाई ने विद्यार्थियों को ‘सादा जीवन’ और ‘साधारण जीवन’ के बीच अंतर भी समझाया। उन्होंने कहा कि साधारण जीवन में व्यक्ति दूसरों से तुलना और ईर्ष्या कर सकता है, जबकि सादा जीवन सरलता, संतोष और अनावश्यक प्रतिस्पर्धा से मुक्त जीवन है। महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद के जीवन को उन्होंने सादगी के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ ज्ञान और बोध, दोनों आवश्यक हैं। ज्ञान पढ़कर, सुनकर और याद करके प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन बोध तब पैदा होता है जब उस ज्ञान को हम अपने जीवन में अनुभव और व्यवहार के रूप में उतारते हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधी के बारे में जानकारी होना अलग बात है और गांधी के विचारों का बोध होना अलग बात। गांधीजी के जीवन में सत्य, अहिंसा, निर्भयता और ईश्वर में विश्वास केवल शब्द नहीं, बल्कि आचरण का हिस्सा थे।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में जो चीजें तत्काल आकर्षित करती हैं, वे हमेशा हमारे हित में हों, यह आवश्यक नहीं। मनोरंजन और भौतिक आकर्षण क्षणिक आनंद दे सकते हैं, जबकि अध्ययन, श्रम और अनुशासन जीवन को वास्तविक रूप से निर्मित करते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अपनी ऊर्जा पढ़ाई, श्रम, चरित्र निर्माण और समाजोपयोगी कार्यों में लगानी चाहिए।

कार्यक्रम में कर्मयोगी खादी आश्रम, पानीपत की अध्यक्ष निर्मल दत्त ने माता सीता रानी सेवा संस्था द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की जानकारी दी। गांधी ग्लोबल फैमिली के महासचिव राम मोहन राय ने भी अपने विचार रखते हुए विद्यार्थियों से गांधी, विनोबा और सर्वोदय के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

माता सीता रानी सेवा संस्था की महासचिव पूजा सैनी ने हाली अपना स्कूल की गतिविधियों एवं संस्था के कार्यों का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन न्यायिका भारती ने किया। कार्यक्रम में स्कूल के सैकड़ों विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

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