Friday, October 2, 2026
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जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने सुनाया सुधारात्मक एवं सामाजिक सरोकार से जुड़ा फैसला।

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at October 2, 2026 Tags: , , , ,

जुवेनाइल कोर्ट में दिए गए एक फैसले में दोषी तीन नाबालिग किशोरों को सरकारी अस्पताल में करनी होगी 3 माह सामाजिक सेवा।

BOL PANIPAT : 2 अक्टूबर।जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड पानीपत द्वारा जुवेनाइल कोर्ट में एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए दोषी तीन नाबालिक किशोरों को सुधारात्मक दृष्टिकोण के तहत सरकारी अस्पताल में 3 माह सामाजिक सेवा देने की सजा सुनाई गई है। यह मामला विगत 19 अक्टूबर 2024 का था जिसमें सिटी पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 399 की गई थी। इसमें स्थानीय मार्केट में एक टेलर के साथ तीन लड़कों की कहासुनी हो गई थी। जिसमें उसके पड़ोसी ने बीच बचाव करने पर उन लड़कों ने उस पड़ोसी की आंख के नीचे कैंची मार दी थी और वहां से फरार हो गए थे। बाद में पुलिस ने इसमें मामला दर्ज किया और सीसीटीवी फुटेज में यह पकड़े गए। जिस पर भारतीय दंड संहिता के तहत 115 (2) 118 (1)190,191(3),333 351 (2) और 238 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें एक लड़का 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था जिसके आने वाले समय में परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह सजा सुनाई गई है।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा, सदस्य आशिमा कौशिक और अशोक कुमार ने अपने निर्णय में सजा के साथ-साथ दोषी के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा उसे समाज के प्रति अपने दायित्व का एहसास कराने पर विशेष जोर दिया है।
बोर्ड के समक्ष विचाराधीन मामले में तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के उपरांत दोषी के संबंध में यह आदेश पारित किया गया। बोर्ड ने निर्देश दिए कि दोषी को निर्धारित अवधि तक सरकारी अस्पताल में आगामी तीन माह तक सामाजिक सेवा करनी होगी तथा इस दौरान संबंधित विभाग द्वारा उसकी गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने स्पष्ट किया कि किशोर न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि बच्चों को अपराध की पुनरावृत्ति से रोकते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना भी है। सरकारी अस्पताल में सेवा के माध्यम से दोषी को सेवा, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व समझाने का प्रयास किया जाएगा। घायल या बीमार लोग जो सरकारी अस्पताल में अपना इलाज करवाने आते हैं उनके प्रति भी उन तीनों का दृष्टिकोण बदलेगा और दूसरे को चोट पहुंचाना कितना हानिकारक हो सकता है यह भी उन्हें पता चल सकेगा।
प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा की अध्यक्षता में बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामुदायिक सेवा के दौरान उक्त तीनों की गतिविधियों की नियमित निगरानी की जाए और निर्धारित शर्तों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। यदि उक्त किशोरों ने इसका पालन नहीं किया तो बोर्ड द्वारा यह अधिकार सुरक्षित रखा गया है कि इन्हें दोबारा से सजा दी जा सकती है। यह निर्णय किशोर न्याय व्यवस्था में सुधार, पुनर्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने की दिशा में लिया गया है।

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