Monday, September 21, 2026
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जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने सुनाया फैसला राज्य स्तर के खिलाड़ी को दिया सुधरने का मौका।

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at September 21, 2026 Tags: , , , ,

पीडि़ता को न्याय देते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दिया जाएगा 3 लाख का मुआवजा।

पोक्सो एक्ट के तहत ब्लात्कार के प्रयास के आरोप में काट चुका है 6 माह की कस्टडी।

BOL PANIPAT, 21 सितंबर। पानीपत में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने दुष्कर्म के प्रयास करने के आरोपी नाबालिक को सुधारने का मौका देते हुए उसे छह माह का प्रोबेशन पीरियड प्रदान किया है। वहीं पीडि़ता को भी न्याय देते हुए बोर्ड ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से 3 लाख रुपए का मुआवजा देने का भी प्रावधान किया है।

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अपने फैसले में बताया कि यह मामला विगत 2025 का स्थानीय सेक्टर 13-17 पुलिस थाने से संबंधित था। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 62,65(2),87 और 137 के साथ-साथ पोक्सो एक्ट के तहत 6 और 18 नंबर धाराएं भी लगाई गई थी। इस मामले में नाबालिक लडक़ी ने अपने बयान देते हुए बताया कि आरोपी लडक़ा उसके पड़ोस में ही रहता था। जब पीडि़ता किसी काम से जा रही थी तो उस आरोपी नाबालिक ने पीडि़ता लडक़ी को कहा कि उसे उसके पापा बुला रहे हैं। जब वह उसके साथ उस स्थान पर गई तो उसने उसके साथ रेप करने की कोशिश की और उसे कई जगह चोट के निशान भी आए। मौके पर ही एक अन्य लडक़े ने आकर उस आरोपी लडक़े को इस हरकत पर डांट भी मारी और वहां से वह आरोपी लडक़ा भाग गया। उस नाबालिग लडक़ी ने यह सारी बात घर पर आकर अपने मां-बाप को बताई जिसके तहत उक्त पीडि़ता के पिता ने पुलिस स्टेशन में विगत 24 अक्टूबर 2025 को एफआईआर दर्ज करवाई। इसके तहत जिस व्यक्ति ने उसे लडक़े को डांट मार के भगाया था उसको भी गवाह बनाया गया लेकिन वह गवाही देने नहीं आया तो जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने लडक़ी के बयान पर ही आरोपी लडक़े को आरोपी मानते हुए उसे सजा सुनाई। इसी के तहत सुनवाई करते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा,सदस्य आशिमा कौशिक और अशोक कुमार ने उक्त आरोपी लडक़े के पढ़ाई और कैरियर को भी प्राथमिकता दी चूंकि लडक़ा फिलहाल नौवीं कक्षा में पढ़ रहा है और राज्य स्तर का खिलाड़ी भी रह चुका है। उसके कैरियर और पढ़ाई को देखते हुए उसे 6 माह के प्रोबेशन पीरियड पर भेजने का फैसला किया है।

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अपने फैसले में कहा है कि खिलाड़ी अपने राज्य और अपने देश के लिए इतनी मेहनत करते हैं। क्योंकि यह एक खिलाड़ी से जुड़ा हुआ हुआ भी केस था इसके दृष्टिगत उसकी पढ़ाई और कैरियर बर्बाद ना हो, इसी को देखते हुए उसे सुधरने का मौका दिया गया है। 6 महीने के प्रोबेशन पीरियड पर  भेज गया है और सख्त हिदायत दी है कि वह 6 महीने तक किसी भी आपराधिक या असामाजिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा। 6 महीने तक प्रोबेशन अधिकारी द्वारा उसके चाल चलन पर पूरी तरह से नियमित रूप से रखी जाएगी और अगर वह किसी ऐसी अपराधिक गतिविधि में शामिल हुआ पाया जाता है तो उसे वापस बुलाकर उसे सजा दी जाएगी। यह अधिकार जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अपने पास रखा है। अगर उसका रवैया सुधारात्मक पाया गया तो इसकी रिपोर्ट प्रोबेशन अधिकारी से ली जाएगी और उसका प्रोबेशन पीरियड और केस समाप्त हो जाएंगे।

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